जब मैने गुरुदेव से प्रेत देखने की इच्छा जताई… 2

प्रणाम मै शिवांशु.

उन दिनों मै घुमंतू हो गया था.

बिना काम गुरुदेव के साथ घूमना मेरा सबसे पसंदीदा काम है. सो जब कभी इसका मौका मिलता है तो मै छोड़ता नही. पहले तो एेसे मौके बहुत मिलते थे.

मगर जब से गुरुदेव ने टी.वी. पर बैठकर लोगों की समस्याओं के समाधान देने शुरू कर दिये, तब से उनकी व्यस्ततायें अनलिमिटेड हो गईं हैं.

आपमें से शायद ही कोई जानता होगा कि लोगों की समस्याओं को हल करने की व्यस्तता के चलते उन्होंने अपने कई शौक छोड़ दिये.

एक राज की बात बताता चलूं. जब गुरुदेव भोजन छोड़ रहे थे, तब मै भी इस बात से परेशान था. और उनसे पूछा था एेसा करने की जरूरत क्या है.

जितनी देर मै खाना खाने में लगाता हूं उतनी देर में तो दो लोगों की समस्याओं का समाधान दे दूंगा. लोग बड़ा भरोसा लेकर मेरे पास आते हैं भाई. ये उनका जवाब था.

इसके अलावा उनके भोजन त्याग का एक कारण और था. उन दिनों उन्होंने एक संकल्प ले रखा था. कि रोज जब तक एक जरूरत मंद को भोजन नही करा लेगें, तब तक खुद नही खाएंगे. व्यस्तताओं के चलते कई बार रात होने तक वे किसी को भोजन कराने का समय नही निकाल पाते थे. एेसे में अक्सर ही उन्हें बिना खाये ही सोना पड़ता था.  

सो उन्होंने खाना ही छोड़ दिया. मैने पूछा था आपके न खाने से किसी जरूरत मंद को भोजन का आपका संकल्प कैसे पूरा हो रहा.

जब मै नही खाउंगा तो उतना राशन बचेगा. जो किसी के हिस्से में तो जाएगा ही. बस समझो मैने इस तरह से किसी का पेट भर दिया. ये उनका जवाब था. हमारी सोच से बहुत ऊपर.

गुरुवर को आजादी पसंद थी. न वे समय में बंधना चाहते थे, न जिम्मेदारियों में. मगर खुद पर भरोसा करने वालों की जिम्मेदारी में एेसे बंधे कि अब उनके खुद के लिये समय नही.  दिन भर लोगों की समस्यायें सुनते हैं. रात 2 बजे तक लोगो का संजीवनी उपचार करते हैं. सुबह 5 से 7 बजे के बीच पुनः संजीवनी उपचार करते हैं. 7 बजे से महासाधना कराने लगते हैं. इससे पहले 7 से 9 बजे तक विश्राम कर लिया करते थे. बीच बीच में समय निकाल कर ध्यान साधनायें करते हैं. 11 बजे से फिर लोगों की समस्यायें सुनने का समय हो जाता है.

उनके अपने लिये अब कोई समय नही बचा.

एेसा पहले कभी न था. चाहे कोई भी हो, वे किसी के लिये 1 मिनट भी इंतजार नही करते थे. चाहते तो अपनी आजादी को बनाये रखते. जमींदार परिवार से हैं. प्रतिष्ठित पत्रकार रहे हैं. शानदार जीवन यापन के लिये जो चाहिये वो सब कुछ उनके पास बहुत पहले ही से है.

मगर अब वे अपने लिये नही जीते.

मै उनके पास्ट से आज को मिलाने बैठता हूं. तो यकीन ही नही होता. उन्होंने अपना वो सब कुछ छोड़ दिया, जिसका उन्हें शौक था.

कहते हैं जिन्होंने हम पर विश्वास कर लिया है, उनसे रिश्ता तो निभाना ही होगा. अब उन्हें बीच में नही छोड़ सकते.

इसी कारण अब गुरुवर के साथ घूमने फिरने के मौके न के बराबर मिल पाते हैं. मै इस बात से दुखी सा हो जाता हूं. क्योंकि उनके साथ रहकर जो ज्ञान मिलता था. उसका आनंद किसी भी शौक से पूरा नही किया जा सकता.

मुझे शिकायत है उस समय चक्र से जिसके  कारण गुुवर ने अपनी लाइफ स्टाइल को बदल डाला. वो लाइफ स्टाइल जिसकी कापी करने के लिये लोग तरसते थे. मै भी.

मौका मिला था तो मै गुरुदेव के साथ घूमने निकल पड़ा. बनारस जाते समय रास्ते में  आजमगढ़ के एक गाव में चाय पीने के दौरान सपना नाम की लड़की पर ब्रम्हराक्षस का तांडव देखा.

गुुरुदेव ने सपना को ठीक किया. कैसे इस पर हम आगे चर्चा करेंगे.

तब क की राम राम.

(.कुछ साथियों ने ब्रह्मांड विलय साधना के बारे आगे का विवरण जानना चाहा है.  उसमें जितना बताने लायक था, मै बता चुका.)

सत्यम् शिवम् सुंदरम्

शिवगुरु को प्रणाम

गुरुवर को नमन.

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