जीवन की चौथी दुनियाः 23

शिव की दुनिया में जाने की तैयारी

बैकुंठ और ब्रह्म लोक के पार। शिव की दुनिया ब्रह्मांड के जिस डाइमेंशन में है। वहां दूसरी दुनियाओं के नियम लागू नही होते। मै प्रीति की जीवात्मा को बता रहा था। वे ध्यान से सुन रही थीं। जब तुम जाओगी। पाओगी वहां सूर्य नही हैं। चंद्रमा नही है। तारे नही हैं। फिर भी सब कुछ प्रकाशमान है। शिव धाम में बाहरी उर्जा या रोशनी की जरूरत नही। सब कुछ शिव की उर्जा से चलता मिलेगा। वहां पंचतत्व नही। फिर भी जीवन है। वहां मृत्यु का प्रवेश नही है। वहां काल नही है। वहां तुम्हें टाइम अलग मिलेगा। जानोगी कि दुनिया बनाने वाले लाखों ब्रह्मा जन्म लेकर मर जाते हैं। तब वहां एक पल बीतता है। प्रलय का वहां कोई असर नही होता।

मृत्यु पर किसी का जोर नही। आप ही तो कहते हैं। वश चलता तो मै अभी न मरती। आपके लिये जीती। मेरे दुख को देख मेरी पत्नी प्रीति की जीवात्मा भी मायूस हो गई। अपनी बेबसी जताई। बोलीं, क्या करती? हमारे बीच प्रारब्ध आ गया। कर्मों की सजा का समय आ गया। मौत आ गई। आप अकेले रह गये। उनकी बातों में गहरा दुख छलक पड़ा। जिससे अब तक उन्हें बचाकर रखा था। वह दुख झलकने लगा। यह ठीक नही था। इससे उनका धैर्य खत्म हो सकता था। सामान्य जीवात्माओं की तरह वे जन्म मृत्यु के बीच अटक सकती थीं। उनका योगिनी बनने का देव संकल्प खंडित हो सकता था।

मृत्यु के बाद विभिन्न अनुष्ठानों, शास्त्रों के विधान, उर्जा तकनीक, आत्म प्रार्थनाओं का उपयोग करके हम प्रीति की सूक्ष्म चेतना से सम्पर्क में सफल हुए। यमराज के त्रास उपचार से बचाने के लिये उनके सूक्ष्म शरीर का उपचार और पुनर्जनन हुआ। यमलोक से निकल कर पितरों की दुनिया पितृ लोक पहुंचीं। वहां से देवताओं की दुनिया में प्रवेश मिला। उनके लिये सम्पन्न आत्मा उत्थान अनुष्ठान सफल हुए। देवताओं की दुनिया में उन्हें अगला जन्म खुद चुनने का अवसर मिला। उन्होंने योगिनी स्वरूप धारण करने का संकल्प लिया। इसके लिये उन्हें मोह – माया, दुख, ग्लानि, ईष्या, क्रोध, अहंकार, बदले की भावना से मुक्त रहना जरूरी है। आज मेरी बातों ने उन्हें भावुक कर दिया। दरअसल कुछ पुरानी बातों को लेकर मुझे उनकी याद आ गई। मैने उनसे कह दिया मुझे छोड़कर चली गईं। यह अच्छा नही किया। इसी बात ने उन्हें भावुक कर दिया।

ऐसे में मुझे अपना दुख छिपाना जरूरी हो गया। भीतर की छटपटाहत को ऊपरी कांफीडेंस में बदलना था। मै बोला तुम तो सेंटी होने लगी। शरीर छूट गया तो क्या। हम तो अभी भी एक दूसरे के साथ हैं। बातें वातें कर लेते हैं। एक दूसरे से मिल लेते हैं। साथ बैठकर खा लेते हैं। मै तुम्हें देख नही सकता तो क्या। तुम तो मुझे देख लेती हो। मेरी सिखाई साधनायें कर लेती हो। मेरे बताये मंत्र जप लेती हो। मेरी बातें समझ लेती हो। उन्हें अपना लेती हो। मेरे बताये विधान से योगिनी अभ्यास कर ही रही हो। बस और क्या चाहिये।

दुख तो दुख होता है। एक बार मन पर कब्जा कर ले, तो चुटकियों में गायब नही होता। वे खामोश हो गईं। बहुत देर तक के लिये। मै उनकी आदतें जानता हूं। आदतें सूक्ष्म शरीर में होती हैं। सूक्ष्म शरीर मरने के पहले भी रहता है और बाद में भी। इसलिये जो आदतें मरने से पहले होती हैं। अक्सर मरने के बाद भी वही रहती हैं। उन्ही में से खराब आदतों या मोह माया को छुड़ाने के लिये यमदूतों की प्रताड़ना का जिक्र होता है।

प्रीति का मन बदलने के लिये मैने विषय बदला। पूछा तुम तो शिव की दुनिया में जाने की तैयारी कर रही थी। उस पर फोकस करो। मुझे तो जानती हो यादों के थपेड़ों में बह जाने ववालों में से नही हूं। तुम्हें तुम्हारी मंजिल तक पहुंचाये बिना न कहीं अटकुंगा, न भटकुंगा।

लम्बी खामोशी के बाद वे बोलीं। आप चाहो तो एक बार के लिये मै आपको दिख सकती हूं।

वो कैसे ? मैने पूछा। देवताओं की दुनिया के किसी नियम को तोड़ने के बारे में तो नही सोच रही देवी जी।

नही जी, नियम नही तोड़ रही। उन्होंने बताया। बहुत जरूरी होने पर मै अपने नये रूप में किसी के सामने कुछ क्षण के लिये दिख सकती हूं। आप कहें तो आपको दिख जाऊं।

अभी रुको, मैने कहा। यह अवसर किसी इमेर्जेंसी के लिये बचा कर रखो। फिलहाल तो शिव की दुनिया में जाना है तो उस पर फोकस करो।

कैसे फोकस करूं? मुझे तो वहां के बारे में कुछ भी मालुम नहीं। उन्होंने कहा। आप बताइये क्या करना है। मेरा तो मन है इसी सावन जाऊं वहां। आप कह रहे हैं कि शिवलोक और शिव की दुनिया दोनो अलग जगहें हैं। इशका मतलब बताइये।

आमतौर से लोग कैलाश पर्वत को शिव लोक कहते हैं। मगर यह रुद्र भगवान का धरती पर कामकाज का मुख्यालय सा है। उनका घर उनकी दुनिया तो ब्रह्मांड के सबसे ऊंचे आयाम में है। उसे शिव धाम कहा जाता है। वहां नीचे आयाम में रहने वाले नही जा सकते। सारे ही देवी देवता उनसे नीचे के आयामों में रहते हैं। जिसका जितना ऊंचा आयाम उसका उनका महत्व। देवों में भी सबसे ऊंचा डाइमेंशन शिव का, तो वे हुए देवों के देव महादेव।

बैकुंठ और ब्रह्म लोक के भी पार। शिव की दुनिया ब्रह्मांड के जिस डाइमेंशन में है वहां दूसरी दुनियाओं के नियम लागू नही होते। मै प्रीति को बता रहा था। वे ध्यान से सुन रही थीं। जब तुम वहां जाओगी तो देखोगी वहां सूर्य नही हैं। चंद्रमा नही है। तारे नही हैं। फिर भी सब कुछ प्रकाशमान है। शिव धाम में बाहरी उर्जा या रोशनी की जरूरत नही। सब कुछ शिव की उर्जा से चलता मिलेगा। वहां पंचतत्व नही। फिर भी जीवन है। वहां मृत्यु का प्रवेश नही है। वहां काल नही है। वहां तुम्हें टाइम अलग मिलेगा। जब लाखों ब्रह्मा जन्म लेकर मर जाते हैं। तब वहां एक पल बीतता है। प्रलय का वहां कोई असर नही होता।
शिव पुराण में शिव की इस दुनिया को ही परम शिव धाम बताया गया है।

जब तुम जाओगी तो देखोगी वहां जमीन नही है। मिट्टी पत्थर नही हैं। उसकी जगह दिव्य चिंतामणि मणियां बिछी हैं। उन्हीं से शिवधाम का निर्माण हुआ है। वहां की जमीन, रास्ते सब रत्नों और सोने से बने मिलेंगे। पहुंचकर पाओगी वहां हवाओं में सरसराहट नही, बल्कि वेदों की गुनगुनाहट है। देखोगी वहां नदियों में पानी की तरह ज्ञान की धारायें बह रही हैं। उनकी तरफ देखते ही चेतना में अनंत ज्ञान समा गया। ऐसा लगेगा। वहां वृक्षों की जगह कल्पवृक्ष मिलेंगे। इनके पास जाते ही जो सोचोगी सब मिल जाएगा। मगर तुम सब भूल जाओगी। कल्पवृक्षों से कुछ मांगना है, याद ही नही रहेगा। वहां के कल्पवृक्ष अत्यन्त प्रबल हैं। वे तुम्हें इच्छाओं के पार की दुनिया में पहुंचा देंगे। जहां मांगने के लिये कुछ बचता ही नही।

शिव धाम ब्रह्मांड की अध्यात्मिक उर्जा का महाकेंद्र है। वहीं तुम्हें शिव मिलेंगे। मां पार्वती मिलेंगी। शिव परिवार मिलेगा। शिवगण मिलेंगे। शिव धाम पहुंचने वालों पर से ब्रह्मांड के सभी नियम हट जाते हैं। सभी कर्म कट जाते हैं। सभी प्रारब्ध मिट जाते हैं। सभी कष्ट भस्म हो जाते हैं। उनकी आत्मा स्वयं परमात्मा समान हो जाती है। पहुंचकर तुम जानोगी वहां प्रवेश पाने के लिये तमाम देवता भी आस लगाये इंतजार कर रहे हैं। मगर उनमें से ज्यादातर को अंदर जाने की अनुमति नही मिलती। शिव की दुनिया तक पहुंचने के लिये देवताओं को भी कठिन साधनायें, तपस्यायें करनी होती हैं। वे शिव लोक कैलाश तो पहुंच सकते हैं किन्तु शिव धाम पहुंचना आसान नहीं।

किन्तु शिव भक्त वहां आराम से पहुंच सकते हैं। शिव की दुनिया से उन्हें खुद विमान लेने आते हैं। शिव भक्तों के लिये वहां के दो रास्ते हैं। एक ज्ञान मार्ग, दूसरा भक्ति मार्ग। मै तुम्हें दोनों रास्ते सिखाउंगा। किन्तु जाना भक्ति मार्ग से। मैने प्रीति को सुझाव दिया। वे बड़े ध्यान से सुन और समझ रही थीं। आगे मै उन्हें बताउंगा वे क्या करें जिससे शिव के विमान उन्हें लेने आयें। सातों लोकों को पार करके शिव धाम के पहले दरवाजे तक कैसे पहुंचें? वहां के कठिन दरवाजों को कैसे पार करें?
क्रमशः।


Disclaimer: विज्ञान वाले जो लोग अध्यात्म को नही मानते और अध्यात्म वाले जो लोग सुपर पावर के फेर में विज्ञान को छोटा मानते हैं। वे तर्क-वितर्क की बजाय इस वृतांत को काल्पनिक कहानी मान लें। मन करे तो मात्र मनोरंजन के लिये पढ़ें।
लेखकः एनर्जी गुरू राकेश आचार्या