जीवन की चौथी दुनियाः 20

सावन में जीवन संवारने का अचूक उपाय

सावन में कोई ऐसा उपाय बताइये जो सरल हो। अचूक हो। जिससे कामना पूरी हो। जिससे समस्या दूर हो। मेरी पत्नी प्रीति ने गुरू पूर्णिमा के दिन भगवान शिव को मृत्यु के बाद दोबारा अपना गुरू धारण किया। उसके तुरंत बाद मुझसे यह सवाल पूछा। जाहिर है यह सवाल खुद उनके लिये नही था। क्योंकि शरीर छोड़ने के बाद वे जिस दुनिया में हैं वहां न समस्यायें हैं न कामनायें। फिर भी वे उन लोगों के लिये हमेशा फिक्रमंद रहती हैं जो उन्हें गुरू मां मानते हैं।

लोगों के कल्याण के लिये बहुत अच्छा सवाल है यह। मैने कहा। सावन की उर्जाओं को आभामंडल और उर्जा चक्रों में स्थापित करके अवचेतन मन की शक्ति का उपयोग किया जाये तो बड़े ही शानदार परिणाम मिलते हैं। सावन के मौसम में ब्रह्मांड की उर्जाओं में स्रजन और उत्साह-उमंग की सकारात्मक उर्जायें हजारों गुना बढ़ी होती हैं। वे कामनायें पूरी करने में अचूक होती हैं। समस्यायें दूर करने में अचूक होती हैं। जीवन में सुख स्थापित करने में अचूक होती हैं।

इसके लिये लोग क्या करें? उपाय कठिन तो नही। प्रीति जी ने पूछा। उपाय पर अधिक खर्च तो नही आता।

उपाय सरल है। बिना खर्च का है। इसे महिला-पुरुष, बच्चे-बड़े, अमीर- गरीब कोई भी कर सकता है। मैने बताया। इसमें सावन की स्रजनात्मक उर्जाओं के साथ मन की शक्ति का उपयोग होता है। इसलिये साधक को मानसिक समर्पण के साथ करना चाहिये।
श्रद्धा, विश्वास, नियम पूर्वक किया यह उपाय हमेशा ही अचूक रहता है। इससे कोई फर्क नही पड़ता कामना कितनी बड़ी है। तन, मन, धन की कामना। शादी, संतान की कामना। कामकाज की कामना। कारोबार की कामना। सुख, शांति की कामना। बच्चों की पढ़ाई की कामना। धन, सम्पत्ति की कामना। स्वास्थ, दीर्घायु की कामना। सिद्धि, प्रसिद्धि की कामना। राज सुख की कामना। एक सावन में कोई भी एक कामना शामिल करें।

क्या इससे तन, मन, धन की समस्यायें भी हट सकती हैं? उनका सवाल था।

हांजी उर्जायें ठीक हों तो समस्यायें अपने आप खत्म हो जाती हैं। मैने बताया। इस उपाय के लिये आभामंडल, उर्जा चक्रों की सफाई की जाती है। जिससे समस्याओं का कारण बनी नकारात्मक उर्जायें हट जाती हैं। उनके साथ समस्यायें भी हट जाती हैं।

आभामंडल और उर्जा चक्रों की सफाई करना तो सबको नही आता। फिर वे कैसे करेंगे। उन्होंने पूछा।

नमक के पानी से नहाने से आभामंडल साफ हो जाता है। मैने बताया। घरों में यूज होने वाले साधारण समुद्री नमक में नकारात्मक उर्जाओं को तोड़ने का प्राकृतिक गुण होता है। ग्रहों के दुष्प्रभाव, वास्तु के दुष्प्रभाव, तंत्र के दुष्प्रभाव, बीमारियों के दुष्प्रभाव, कलह के दुष्प्रभाव सहित पीड़ा-परेशानी पैदा करने वाली नकारात्मक उर्जाओं को नमक विखंडित कर देता है। पानी उन्हें अपने भीतर खींच लेता है। साथ लेकर सीवर में बह जाता है। इस तरह आभामंडल की सफाई हो जाती है। आभामंडल में फैली नकारात्मक उर्जायें ही समस्यायें पैदा करती हैं।

नमक के पानी से नहाने की कोई खास विधि है क्या? उन्होंने पूछा।

पूरे पानी में नमक न मिलायें। आधा – एक लीटर के किसी बर्तन में पानी लें। उसमें 1 चम्मच नमक मिलायें। पहले उससे नहा लें। फिर जैसे रोज नहाते हैं वैसे नहा लें। मैने बताया। इसके बाद ग्रह, वास्तु, तंत्र के उपाय करने की जरूरत नही होती। सावन वाले उपाय के इसे रोज करें। समस्याओं से मुक्ति के लिये नमक के पानी से हमेशा नहायें।

उसके बाद उपाय कैसे करें? उन्होंने पूछा।

श्वेतार्क के 2 फूल लें। मैने बताया। एक लोटा जल लें। किसी शिव मंदिर में जायें। शिवलिंग पर जल अर्पित करें। फिर भगवान शिव से अपनी कामना पूरी करने का आग्रह करें।
कहें- हे देवाधिदेव महादेव आपको प्रणाम। आपको साक्षी बनाकर मै सावन स्वैतार्क साधना सम्पन्न कर रहा हूं। जिसमें सावन भर शिवलिंग पर रोज 2 स्वैतार्क पुष्प अर्पित करुंगा। जिससे मेरे आभामंडल, उर्जा चक्रों और मेरे 33 लाख से अधिक रोम चक्रों में कामना पूर्ति की उर्जायें स्थापित हों। मेरी ये कामना (. …….. यहां अपनी कोई एक कामना बोलें…….) पूरी हो।
आप मेरी साधना को स्वीकार करें, साकार करें। आपका धन्यवाद।
यह प्रयोग सावन भर प्रतिदिन करना है। कोई दिन छूटने न पाये। महिलायें पीरियड के दिनों में न करें। स्वच्छ होते ही उपाय पूरा करें।

श्वेतार्क क्या होता है? उन्होंने पूछा। अगर किसी दिन उपाय छूट गया तो क्या होगा?

सफेद फूल वाले मदार पुष्प को श्वेतार्क पुष्प कपा जाता है। यानी सफेद मदार। मैने बताया। उपाय किसी भी दिन छूटना नही चाहिये। इसके द्वारा आभामंडल में 30 डिग्री तक स्रजनकारी उर्जायें स्थापित की जाती हैं। जो महीने के हर दिन सूर्य की चाल के हिसाब से एक डिग्री रोज मिलाकर 30 दिन में पूरी होती हैं। कोई दिन छूटा तो उस डिग्री की उर्जायें खाली रहेंगी। तब कामना अटक सकती है। यह अचूक उपाय है। इसमें अपनी सुविधा न ढूंढ़े। नियमों का पालन करें। जिससे अवचेतन मन की शक्तियों का उपयोग होता है। कामनायें अवचेतन मन ही पूरी करता है।

सावन में श्वेतार्क पुष्प की बड़ी डिमांड होती है। फूल तोड़कर स्टोर कर लें। 2-2 फूल रोज चढ़ायें। स्टोर किये फूल सड़ने न पायें। उससे पहले फिर से लाकर रख लें।

आजकल प्रीति जी अपनी चेतना का उत्थान कर रही हैं। आत्मा का उत्थान करके देव आत्मा बना रही हैं। उसके लिये कल गुरू पूर्णिमा पर उन्होंने भगवान शिव को दोबारा गुरू स्वरूप में धारण किया। मृत्यु से पूर्व उन्होंने शिव जी को ही अपना गुरू बना रखा था।

मृत्यु के बाद शरीर खत्म हो गया। मस्तिष्क खत्म हो गया। धरती वाली यादें खत्म हो गईं। जब मैने उन्हें बताया कि धरती पर उन्होंने भगवान शिव को गुरू बनाया था। उनसे अपने सवालों के जवाब लेती थीं। यह सब जानकर वे दोबारा भगवान शिव को गुरू बनाने के लिये बेताब हो गईं। इसके लिये मुझसे लगातार आग्रह करने लगीं। गुरू पूर्णिमा का दिन तय हुआ। दोबारा शिव गुरू को पाकर वे बहुत खुश हैं।

आत्मा का उत्थान करके उसे देव आत्मा बनाने का अधिकार किसे है? इसके क्या लाभ हैं? हम धरती वाले इस शरीर के साथ अपनी आत्मा को देव आत्मा कैसे बना सकते हैं? इस पर हम आगे चर्चा करेंगे।
शिव शरणं।।


Disclaimer: विज्ञान वाले जो लोग अध्यात्म को नही मानते और अध्यात्म वाले जो लोग सुपर पावर के फेर में विज्ञान को छोटा मानते हैं। वे तर्क-वितर्क की बजाय इस वृतांत को काल्पनिक कहानी मान लें। मन करे तो मात्र मनोरंजन के लिये पढ़ें।
लेखकः एनर्जी गुरू राकेश आचार्या