देवताओं की दुनिया में शरीर परिवर्तन की सिद्धी

आजकल आप बदल गये हैं।
मेरे लिये यह सवाल चौंकाने वाला था। पूछने वाली मेरी पत्नी प्रीति थीं। जो अब इस दुनिया में नही। मृत्यु के कारण हायर डाइमेंशन वाली देवताओं की दुनिया में हैं। कुछ कहना होता है तो सूक्ष्म जगत से सम्पर्क करती हैं। मै इस दुनिया में हूं। वे मृत्यु पार की उस दुनिया में हैं। दुनियाओं का फासला होने के बाद भी हम अपनी बात कह लेते हैं। दूसरे की बात समझ लेते हैं। यह कोई सुपर साइंस नही। बल्कि उर्जा तरंगों की समझ का खेल है। उनके उपयोग का विज्ञान है। अध्यात्म को साइंस की तरह सोचने वाला कोई भी साधक इसे अपना सकता है।
चौंकाने की बात यह नही थी कि वे किसी और दुनिया से सवाल पूछ रही थीं। बल्कि उनकी सोच ने मुझे चौंकाया। उनका सवाल धरती वाले पति-पत्नियों जैसा था। जिसमें प्यार और शिकायत दोनो मिले होते हैं। धरती वालों के लिये यह सवाल अपनेपन का प्रूफ है। जिनके बीच प्रेम वाला अपनापन नहीं उनसे यह सवाल पूछा ही नही जाएगा। किन्तु जिस दुनिया में वे हैं वहां न तो प्यार चलता है और न ही शिकायत। वहां के रीति रिवाज धरती जैसे नहीं। न ही धरती जैसी बातों की छूट है।
ये सब कहां से सीख रही हो ? मैने सवाल के जवाब में सवाल किया। लगता है तुम्हें दोबारा मुझसे प्यार हो रहा है। देवी जी फिर से माया मोह में मत फंस जाना। वर्ना देवताओं के समक्ष लिये संकल्प का क्या होगा ?
नही फंसुगी माया मोह में। उनका जवाब आया। मगर आप मुझे अब बुलाते क्यों नहीं? बीच में तो रोज कई कई घंटे अपने पास रहने देते थे। अब बुलाते ही नही। बार बार याद आती है मुझे।
यही तो मोह-माया है। तुम्हें दोबारा मेरी आदत पड़ रही है। मैने कहा। बहुत बड़ा उद्देश्य है तुम्हारे पास। मुझमें ही अटकी रह गई तो देव संकल्प का क्या होगा। बड़ा भरोसा किया है उस दुनिया वालों ने तुम पर। शिवार्चन करने के लिये रोज बुलाता हूं तुमको। खाने के समय शिव शिष्या के रूप में हर बार बुलाता हूं। तुम्हारी एनर्जी चेक करने के लिये भी तोे कई बार बुलाता हूं।
हां यह तो है। किन्तु अब आप मुझे अपने पास रुकने नही देते। उनकी बातों में शिकायत अभी भी थी। शिवार्चन पूरा होते ही तुरंत वापस जाने को कह देते हैं। भोजन के बाद भी रुकने नही देते। मन करता है आपके पास ही रहूं। साथ रहकर साधनायें पूरी करूं। इसमें क्या बुराई?
बहुत बड़ी बुराई है। मैने कहा। तुम्हें आशक्ति हो रही। यह बिल्कुल ठीक नही। कंट्रोल करो देवी जी।
ठीक है जी। मुझे आश्वस्त करते हुए जवाब दिया। मगर आप बार बार मुझे देवी जी क्यों कहने लगे हैं। आपके मुंह से ठकुराइन ही अच्छा लगता है। जब आप कहते हैं ठकुराइन आओ भोजन करें। तब मुझे बहुत अच्छा लगता है।
वो सब तो ठीक है। मगर अभी तो मैने बुलाया नही फिर कैसे आ गई? मैने पूछा। क्योंकि उनकी दुनिया में बिना बुलाये या बिना अनुमति कहीं भी जाने की मनाही होती है।
आप भूल गये। खिचड़ी खाने के समय मुझे बुलाया था।
तब बुलाया था मुझे याद है। किंतु अभी तो नही बुलाया। मैने कहा। तुम्हारे आने का एतराज नही। पर इससे देव दुनिया का नियम टूटा।
मैने नियम नही तोड़ा। उन्होंने जवाब दिया। खाने के बाद आपने वापस जाने को कहा ही नही। तब से मै यहीं हूं। आप सो गये। मै उठने का इंतजार कर रही थी। उठे तो अपनी बात कही। आप बतायें मेरे पास शरीर नही बचा तो इतनी पाबंदी लगा रहे हैं। सच में आप बदल गये हैं।
नही ऐसा नही है। तुम्हारा ये शरीर तो देवियों जैसा है। मुझे डर है सामने आने पर मै ही तुम पर मोहित न हो जाऊं। मैने कहा। पर तुम्हारे सामने बड़ा चैलेंज है। उसे पूरा करने के लिये हम दोनो को संयम रखना होगा। सारा ध्यान साधना, अभ्यास पर लगाना होगा।
हां जी मै ऐसा ही करूंगी। उनकी बातों में कांफीडेंस लौट आया। आप जैसा गुरू हो तो मजाल है कोई अपनी राह से इधर उधर भटक पाये। मंजिल तक पहुंचना ही पड़ेगा।
आपको एक चीज बताऊं। उन्होंने उत्सुकता पैदा करने वाली बात कही।
हां बताओ। मैने सहमति दी।
मुझे छोटी बड़ी होने की अनुमति मिल गई। अब मै अपने शरीर को छोटा बड़ा कर सकती हूं। उन्होंने बताया। जल्दी ही प्रकट होने की क्षमता मिल सकती है। तब मै आपके सामने प्रकट होकर आपको दिख पाउंगी। आपको छू पाउंगी। आप भी मुझे छू पाएंगे।
यह मेरे लिये नई जानकारी थी। मेरी जानकारी के अनुसार उस दुनिया में अगले जन्म का इंतजार कर रहे सूक्षम शरीर धारियों को इन सबकी अनुमति नही। एक दुनिया से दूसरी दुनिया में आवक जावक। अंतरीक्ष में उड़ने, रहने। लाखों मील दूर से लोगों की बातें सुनने। उन्हें देख सकने। उनकी सहायता करने। लोगों की रक्षा करने सहित उनकी तमाम क्षमतायें धरती वासियों के लिये देवतुल्य हैं।
फिर भी धरती पर बिना अनुमति कुछ ग्रहण नही कर सकते। किसी को छू नही सकते। बिना बुलाये कहीं आ जा नही सकते। किसी को दिख नही सकते। अपने शरीर को बड़ा छोटा नही कर सकते।
यह जानकारी मृत्युंजय योग के हजारों साधकों के लिये उत्साहजनक हो सकती है। वे प्रीति जी को गुरु मां मानते हैं। चाहते हैं गुरू मां उन्हें दिखें। उनके सामने प्रकट हों। हो सकता है उनकी यह उपलब्धि उस दुनिया की मेरी जानकारी से बाहर की बात हो। या प्रीति जी द्वारा दिन रात किये जा रहे साधना-अभ्यास का परिणाम हो। देवताओं की दुनिया में यह उनके लिये सिद्धी है।
आगे हम जीवन मृत्यु के चार आयामों यानी चार दुनियाओं के बारे में जानेंगे। वहां की रहस्यमयी शक्तियों के बारे में जानेंगे। क्या उन शक्तियों का उपयोग हम भी कर सकते हैं। यह भी जानेंगे। साथ ही यमदूतों के दुख भी समझेंगे।
क्रमशः।
Disclaimer: विज्ञान वाले जो लोग अध्यात्म को नही मानते और अध्यात्म वाले जो लोग सुपर पावर के फेर में विज्ञान को छोटा मानते हैं। वे तर्क-वितर्क की बजाय इस वृतांत को काल्पनिक कहानी मान लें। मन करे तो मात्र मनोरंजन के लिये पढ़ें।
लेखकः एनर्जी गुरू राकेश आचार्या