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संजीवनी महासाधना का शुभारम्भ

संजीवनी महासाधना का शुभारम्भ

राम राम मै शिवांशु
कल सावन के सोमवार के शुभ मुहूर्त पर संजीवनी महासाधना शुरू हो रही है. आपको महासाधना के लाभ जरूर मिलें इसके लिए गुरुदेव आपके उर्जा चक्रों, आभामंडल को एक्टिवेट करेंगे. बस आपको हर रोज 20 मिनट खर्च करने हैं.

महासाधना का मंत्र…….. ऊं. ह्रौं जूं सः
महासाधना काआसन…. लाल या सफेद ऊनी आसन.
बैठने की दिशा…………..पूरब या उत्तर फेस होकर बैठें.
महासाधना की कीमत…. आपका विश्वास.
महासाधना की दक्षिणा….किसी जरूरत मंद को रोज भोजन दान करें.
महासाधना के परहेज….. किसी से तर्क न करें.
महासाधना का समय……रोज सुबह 9 से 9.20 बजे तक.
महासाधना किसी भी दिन से शुरू कर सकते हैं. बिना नागा लगातार करते रहें. यह आपकी शक्तियों के जागरण और सफल जीवन की स्थापना तक जारी रहेगी.

महासाधना की विधि…
1. हर दिन सुबह 9 बजे से 9.20 बजे तक शुद्ध होकर बैठें. अगर आप अपनी कुंडली का जागरण करना चाहते हैं तो सिद्ध रुद्राक्ष दायें हाथ की मुट्ठी में लेकर बैठें.
मुंह की दिशा पूरब या उत्तर की तरफ रखें.

2. महान संजीवनी शक्ति से अपनी शक्तियों का जागरण करने का आग्रह करें. कहें * हे दिव्य संजीवनी शक्ति आप मेरे तन, मन, मस्तिष्क, आभामंडल और उर्जा चक्रों में व्याप्त होकर उनका शुद्धीकरण करें. उन्हें उर्जित करके जाग्रत करें. मेरे मन मंदिर को सुखमय शिवाश्रम बना दें. महासाधना की सिद्धी हेतु मुझे भगवान शिव के चरणों से जोड़ते हुए मेरी उर्जाओं को एनर्जी गुरु जी की उर्जाओं से जोड़ दें. आपका धन्यवाद है.

3. भगवान शिव को साक्षी बनाते हुए संकल्प लें. कहें * हे देवों के देव महादेव भगवान शिव आप मेरे मन मंदिर में विराज हो जायें. मै आपको साक्षी बनाकर एनर्जी गुरू राकेश आचार्या के मार्गदर्शन में ऊं. ह्रौं जू. सः मंत्र का जप करके संजीवनी महासाधना कर रहा हूं. जिससे मुझे मान सम्मान, यश, प्रतिष्ठा, धन समृद्धि और दैवीय सुख प्राप्त हो. महासाधना की सफलता के लिए आप मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें. आपका धन्यवाद. एनर्जी गुरू जी का धन्यवाद.*

4. उसके बाद मंत्र से सिद्ध हो जाने का आग्रह करें. कहें * हे दिव्य मंत्र ऊं. ह्रौं जूं सः आपको नमन है. आप मेरे तन मन मस्तिष्क में व्याप्त हो जायें. मेरी भावनाओं के साथ जुड़कर सिद्ध हो जायें. और मुझें संजीवनी सिद्धी प्रदान करें. आपका धन्यवाद.*

5. लम्बी और गहरी सांस 16 बार लें. फिर शांत होकर बैठ जायें. ऊं. ह्रौं जूं सः मंत्र का जाप शुरू करें. लगातार 20 मिनट तक मंत्र जाप करें. चाहें तो अधिक समय तक भी कर सकते हैं. समय देखने के लिए बार बार घड़ी या मोबाइल न देखें. अलार्म लगाकर समय का पालन कर लें.
मंत्र जाप के दौरान देवी देवताओं के दर्शन हों या कुछ डरावने दृश्य दिखें तो विचलित न हों. मंत्र जाप पर ध्यान लगाये रखें.
गुरु जी भी उस समय आपके लिए महासाधना कर रहे होंगे. वे आपकी उर्जाओं को ब्रह्मांड से जोड़कर रखेंगे. आपके आभामंडल और उर्जा चक्रों को जाग्रत करेंगे. आपकी आंतरिक शक्तियों को जगायेंगे.
अगर आपके हाथ में सिद्ध रुद्राक्ष है तो गुरु जी की औरिक क्रियाओं से आपकी कुंडली जाग्रत होगी और सहस्रार चक्र की तरफ बढ़ने लगेगी. आंतरिक शक्तियों के जागरण से रुकावटें हटेंगी. चेहरे पर चमक बढ़ती जाएगी. आपकी पर्सनालिटी में सम्मोहन पैदा होने लगेगा. लोगों के बीच आपका प्रभाव बढ़ने लगेगा. धन का आकर्षण होने लगेगा. शरीर निरोगता की तरफ बढ़ चलेगा. जीवन भयमुक्त होकर दुखों से दूर होता जाएगा. आप और आपके अपने सुखी हो ही जाएंगे. आपकी कामनाएं, दुवाएं और आशीर्वाद फलित होने लगेंगे.
मंत्र जाप के बाद उठ जायें. आसन हटाकर उसकी जगह माथा टेकते हुए धरती मां को धन्यवाद दें. महासाधना की सफलता हेतु ग्रह नक्षत्र सहित समस्त ब्रह्मांड और अपने ईष्ट, अपने कुल देव सहित सभी देवों व अपने पितृों को धन्यवाद दें.
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्
शिव गुरु को प्रणाम
गुरुदेव को नमन.