दिव्य रूद्राक्ष से संजीवनी उपचार की विधि

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महासंजीवनी रुद्राक्ष से अपनी व दूसरों की उलझनें दूर करें. इसका उपयोग जीवन को निःसंदेह सरल व सफल बनाता है. जिनके पास ये है वे इसका उपयोग जरूर करें.
सबसे पहले भगवान शिव को गुरू बनाकर उन्हें संजीवनी महाविद्या रचने के लिये धन्यवाद दें.
संजीवनी उपचारक की उर्जाओं के प्रति ग्रहणशीलता और संवेदनशीलता ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिये. तभी उर्जाएं उनके निर्देशों का अनुपालन करती हैं. इसके लिये संजीवनी उपचार शुरू करने से पहले कम से कम 5 मिनट पूरे जोश में हाथों को उठाकर हर हर महादेव का योग करें.
हर हर महादेव योग के बाद….
1. शांत मन से बैठ जायें. 16 बार लम्बी और गहरी सांसें लें.
भगवान शिव को अपने मन के मंदिर में बुला लें. उनसे कहें *हे गुरूदेव देवाधिदेव महादेव सपरिवार मेरे मन के मंदिर में आकर विराजमान हो जायें. मै आपको साक्षी बनाकर दिव्य रुद्राक्ष के द्वारा संजीवनी उपचार कर रहा हूं. इसकी सफलता हेतु दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें.
2. रुद्राक्ष को हथेली पर रखकर उसे 1 मिनट तक अपलक देखें. फिर दूसरी हथेली को छतरी की तरह ऊपर लाकर रुद्राक्ष से कहें *हे दिव्य महासंजीवनी रुद्राक्ष मै अपने गुरुदेव भगवान शिव को साक्षी बनाकर संजीवनी उपचार कर रहा हूं. आपको मेरे लिये सिद्ध किया गया है. उस सिद्ध के अनुकूल आप ब्रह्मांड में संजीवनी शक्ति के स्रोत से जुड़ जायें. सदैव जुड़े रहें. वहां से हर क्षण संजीवनी शक्ति को ग्रहण करें. उससे मेरे द्वारा इच्छित लोगों के तन,मन,मस्तिष्क,आभामंडल,उर्जा चक्रों, रोम रोम का संजीवनी उपचार करें. उन्हें तन से, मन से, धन से स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित बनायें. इस हेतु मेरे द्वारा इच्छित …( जिसका उपचार करना है उसका नाम…)… के आभामंडल को तत्काल अपने भीतर आमंत्रित कर लें.
3. जिसका संजीवनी उपचार करना है उसका लेटेस्ट फोटो देखें. उसकी छवि अपनी आंंखों में बना लें. फिर उसका नाम लेकर कहें *….(नाम) के आभामंडल संजीवनी उपचार हेतु मेरे हाथ में पकड़े महासंजीवनी उपचार के भीतर आ जायें*.
4. महासंजीवनी रुद्राक्ष से कहें ….(नाम जिसकी संजीवनी कर रहे हैं) के आभामंडल व उर्जा चक्रों की सफाई करके वहां मौजूद ग्रहदोष-वास्तुदोष-पितृदोष-देवदोष-तंत्रदोष-बाधादोष-ऋणदोष-कलहदोष सहित सभी तरह की नकारात्मक उर्जाओं को विखंडित करके उन्हें निस्तारण हेतु ब्रह्मांड अग्नि में भेज दें.
फिर पांच मिनट तक संजीवनी मंत्र *ऊं. ह्रौं जूं सः …..(नाम) पालय पालय सः जूं ह्रौं ऊं*
का जाप रुद्राक्ष को एकटक देखते हुए करें.
5. महासंजीवनी रुद्राक्ष से फिर कहें ….(नाम जिसकी संजीवनी कर रहे हैं) के आभामंडल व उर्जा चक्रों को उर्जित करके स्वस्थ, सुडौल व शक्तिशाली बनायें.
फिर पांच मिनट तक संजीवनी मंत्र *ऊं. ह्रौं जूं सः …..(नाम) पालय पालय सः जूं ह्रौं ऊं*
का जाप रुद्राक्ष को एकटक देखते हुए करें.
अंत में दिव्य रुद्राक्ष को, भगवान शिव को, अपने गुरू को धन्यवाद दें. मुझे भी धन्यवाद दें. ताकि ज्ञानऋण के शिकार न होने पायें.
*सुनिश्चित परिणामों के लिये खास बातें-*
1. संजीवनी उपाचर उर्जा विज्ञान पर आधारित एक वैज्ञानिक क्रिया है. उसकी सफलता के लिये कहीं भी कल्पना का उपयोग न करें. बल्कि आभामंडल और उर्जा चक्रों को सीधे कमांड दें. हाथ-पैर-मुंह-आंख आदि की तरह आभामंडल, उर्जा चक्र भी हमारे अंग हैं. अदृश्य होने के बावजूद भी ये अन्य अंगों की तरह हमारे कमांड को स्वीकार करते हैं.
अदृश्य अंगों को कमांड दृढ़ शब्दों में कोमलता के साथ दी जानी चाहिये.
2. संजीवनी उपचार करते समय इसमें हीलिंग की किसी विधि की मिलावट न करें.
3. सुखी जीवन के लिये इसी विधि से अपना भी संजीवनी उपचार नियमित करें.
हर हर महादेव
मृत्युंजय योग हेल्पलाइन-9250500800
सबका जीवन सुखी हो, यही हमारी कामना है
शिव शरणम्

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