Sanjivani Vigyan

Shiv Vd Chakras

संजीवनी विज्ञानः कामयाब जिंदगी की चावी


क्या संजीवनी विज्ञान कोई नई चीज है

नहीं। उपचार के लिये इसका उपयोग युगों युगों से होता आया है।
क्या इसका कोई प्रमाण है
हां- ऋग वेद त्रिस्ता उपनिषद गरुण पुराण योग आयुर्वेद वास्तु शास्त्र ज्योतिष मंत्र विज्ञान ध्यान- साधना- समाधि सहित अध्यात्म की सभी विधाओं में उर्जा विज्ञान का विस्तार से विवरण और विधान लिखा है। दरअसल ये सभी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से मानव उर्जा विज्ञान की ही शाखायें हैं।
सुखी जीवन की रुकावटें क्या हैं
काया, माया की समस्यायें ही सुखी जीवन में रुकावट पैदा करती हैं।
क्यों होती हैं समस्यायें
कर्ज-मर्ज-कलह सहित सभी तरह की समस्यायें हमारी उर्जायें बिगड़़ने के कारण पैदा होती है। हमारी उर्जाओं के बिगड़ने का कारण दूषित उर्जाएं होती हैं।
क्या होती हैं दूषित उर्जायें
ये गुस्सा, कंफ्यूजन, आलोचना, नकारात्मक भावनाओं, पाखंड, दिखावा, बिगड़़े पूजा-पाठ, देव दोष, पितृ दोष, ग्रह-नक्षत्र दोष, वास्तु दोष, तंत्र दोष, ऊपरी बाधा आदि से पैदा होती हैं। जब ये उर्जायें हमारे सूक्ष्म शरीर यानी आभामंडल में मिल जाती हैं तो हमारी उर्जायें बिगड़ जाती है।
जिससे बीमारियां, आर्थिक संकट, मानसिक अशांति पैदा करती हैं।
क्या होता है सूक्ष्म शरीर
पंचतत्वों की उर्जा से बना होने के कारण ये न दिखने वाला शरीर है। इसके भी अंग होते हैं। जिन्हें आभामंडल और उर्जा चक्र कहा जाता है। उनके बिना जीवन नही चल सकता। न दिखने के बावजूद वे हर क्षण काम करते हैं। दूषित उर्जायें इन्हे ही बीमार करके बिगाड़ती हैं। जिससे वे निष्कि्रय होने लगते हैं। इस कारण ये कमजोर हो जाते हैं। इनके कमजोर होने पर ही समस्यायें हावी होती हैं।
कैसे हो समस्याओं से मुक्ति
अपने सूक्ष्म शरीर को दूषित उर्जाओं से मुक्त करके तुरंत समस्या मुक्त हुआ जा सकता है।
कैसे मुक्त हों दूषित उर्जाओं से
आभामंडल व उर्जा चक्रों की सफाई करके सूक्ष्म शरीर को दूषित उर्जाओं से मुक्त किया जाता है।
कैसे करें सफाई
जैसे हम पानी से नहाकर स्थुल शरीर को साफ करते हैं। वैसे ही सूक्ष्म ब्रह्मांडीय उर्जा से स्नान करके सूक्ष्म शरीर को तेजी से साफ किया जा सकता है। संजीवनी उपचार तथा हीलिंग की विधाओं से भी ये सफाई की जाती है। नमक के पानी से नहाने पर भी आभामंडल की आंशिक सफाई हो जाती है।
ऋषियों ने सूक्ष्म शरीर को साफ करने व उपचारित करने के लिये पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान साधना, कर्मकाण्ड, अध्यात्म का विज्ञान बनाया। जो लाखों साल से कारगर है। मगर इसे जानबूझ कर या अनजाने में गलत तरीके से किया जाये तो, ये खुद ही दूषित उर्जायें पैदा कर देता है।
कैसे ठीक करें सूक्ष्म शरीर को
इसके लिये शरीर के विज्ञान और नेचर के विज्ञान का उपयोग करें तो नतीजे तुरंत और शानदार मिलते हैं।
क्या है शरीर का विज्ञान
जिन अंगों की साफ सफाई करके, उनसे नियमित काम लिया जाता हैंं वे स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं। जिनसे काम नही लेते वे निष्कि्रय व बीमार होते जाते हैं। हाथ पैर, आंख, नाक, मुंह, जीभ की तरह सभी अंग हमारे निर्देश मानते हैं। और हमारी इच्छानुसार काम करते हैं।
क्या है सूक्ष्म शरीर का विज्ञान
इसी तरह सूक्ष्म शरीर व उसके अंगों का विज्ञान है। जिन उर्जा चक्रों की साफ सफाई करके उनसे काम लिया जाता है वे सक्रिय और जाग्रत रहते हैं। जिनसे काम नहीं लिया जाता वे निष्कि्रय व कमजोर हो जाते हैं। हाथ पैर, आंख, नाक, मुंह, जीभ की तरह हमारे आभामंडल और उर्जा चक्र भी हमारा कहना मानते हैं। वे हमारी कामनाओं को निर्देश के रूप में स्वीकार करके काम करते हैं। ये भी हमारी इच्छानुसार काम करते हैं।
क्या काम करते हैं उर्जा चक्र
उर्जा चक्र ब्रह्मांड से जीवनदायी उर्जाओं को ग्रहण करके सूक्ष्म शरीर को देते हैं। उसी से जीवन चलता है। इस काम के लिये चक्र अपने केन्द्र पर घड़ी की दिशा में घूमते रहते हैं।
उर्जा चक्र ही शरीर द्वारा यूज की जा चुकी उर्जाओं के अवशेष को बाहर निकालते हैं। जो कि नकारात्मक व दूषित होता हैं। ठीक उसी तरह जैसे ग्रहण किये भोजन का अवशेष मल-मूत्र के रूप में नकारात्मक व दूषित होता है। इस काम के लिये चक्र उल्टी दिशा में घूमते हैं।
क्या है जीवनदायी उर्जा का सिद्धांत
ये हमारे लिये काम करती है और हमारा कहना मानती है। यही इसका सिद्धांत है। इसे ही संजीवनी शक्ति कहा जाता है। दिव्य शक्ति होने के बावजूद ये हमारा कहना मानती है। ठीक उसी तरह जैसे जीवनदायी आक्सीजन हमारा कहना मानती है।
उदाहरण के लिये जब हम नाक से सांस लेना चाहते हैं तो हमारी इच्छानुसार आक्सीजन नाक से हमारे भीतर जाने लगती है। जब हम मुंह से सांस लेना चाहते हैं तो आक्सीजन हमारे मुंह से भीतर जाने लगती है। जब हम कम सांस लेना चाहते हैं तो आक्सीजन कम मात्रा में भीतर जाती है, जब ज्यादा लेना चाहते हैं तो ज्यादा मात्रा में जाती है। बड़ी शक्ति होने के बावजूद आक्सीजन बिना किसी विरोध के हमारी इच्छानुसार काम करती है।
हमारे निर्देश कैसे मानती है संजीवनी शक्ति
ठीक इसी तरह संजीवनी शक्ति भी हमारी इच्छानुसार चक्रों में प्रवेश करती है। हम इससे जिस चक्र पर जिस रूप में जाने की कामना करते हैं, ये वहां उसी रूप में पहुंचने लगती है। जहां से निकलने की कामना करते हैं वहां से निकलने लगती है।
क्या है ब्रह्मांडीय शक्तियों का हमसे रिश्ता
आक्सीजन और संजीवनी शक्ति की तरह ब्रह्मांड की हर वो शक्ति हमारी बातों को मानती है जिसे हमारे लिये बनाया गया है। यही इनका हमसे रिश्ता है, जिसे ये पूरी वफादारी से निभाती है।
धरती, आकाश, जल, अग्नि, वायु आदि पंचतत्वों की उर्जायें भी हमारा कहना मानती हैं। बस आपको इनसे काम लेने का तरीका आना चाहिये। इनसे काम लेने का मतलब है, सुखी और शानदार जीवन की स्थापना।
क्या है इन शक्तियों से काम लेने का तरीका
शक्तिपात करके इनसे आसानी से काम लिया जा सकता है।
क्या होता है शक्तिपात
किसी व्यक्ति पर ब्रह्मांडीय उर्जाओं (शक्तियों )की बरसात को शक्तिपात कहते हैं।
कैसे करें शक्तिपात
एनर्जी गुरु डा। राकेश आचार्या जी ने एनर्जी रिपोर्ट में इस तकनीक को बहुत ही सरलता से पेश किया है। उसे अपनाने के लिये न तो उर्जा विज्ञान की खास जानकारी की जरूरत है, और न ही किसी खास काबिलियत की। इसे कोई भी, कभी भी, कहीं भी कर सकता है। बहुत खास बात ये भी है कि इस तकनीक को करने में, कोई खर्च भी नहीं आता। न ही इसमें किसी तरह के पाखंड की गुंजाइश है।
संजीवनी उपचार के द्वारा भी प्रभावशाली तरीके से शक्तिपात होता है- इसके जरिये दूसरों की5 भी उर्जा ठीक करके उन्हें दुखों से मुक्त कर दिया जाता है.
क्या एनर्जी के उपाय वाकई काम करते हैं-
हां,उर्जा के उपाय युगों युगों से काम करते आ रहे हैं। हम पहले जान चुके हैं कि उर्जा चक्र व आभामंडल को साफ रखा जायें। उनसे काम लिया जाये। तो वे सक्रिय व जाग्रत होकर मजबूत हो जाते हैं। जब ये मजबूत होते हैं, तब दूषित उर्जायें हम पर हावी नहीं हो पातीं।
हमने पहले ये भी जाना कि दूषित उर्जायें ही हमारी उर्जाओं को बिगाड़ती हैं। और सिर्फ इसी कारण से काया माया की सभी समस्यायें पैदा होती हैं। उर्जा चक्रों व आभामंडल की सफाई और उनसे काम लेने के कारण हमारी उर्जायें दूषित उर्जाओं से मुक्त होकर मजबूत हो जाती हैं। जिससे समस्यायें समाप्त होती हैं।
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