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उर्जा चक्र और उनको उपचारित करने के तरीके…

चक्रों का उपचार सावधानी से करें. संजीवनी रुद्राक्ष या कुंडली जागरण रुद्राक्ष के बिना न करें. कब कौन चक्र बिगड़ा है. कब किस चक्र को उपचारित करना है ये जानकारी आपकी एनर्जी रिपोर्ट में दी गई है. उसी के मुताबिक चक्रों को उपचारित करें. कोई कंफ्यूजन हो तो 9250300800 पर हमारे उर्जा विशेषज्ञों से सम्पर्क करें.


1… मूलाधार चक्र
इस चक्र को उपचारित करने के लिए निम्न स्टेप पूरे करें। मूलाधार को ही बेसिक व रूट चक्र भी कहा जाता है। ये पीठ के निचले हिस्से पर जहां रीढ़ की हड्डी समाप्त होती है, वहां स्थित होता है। ये धन, समृद्धी, साहस, आत्मबल, शारीरिक बल, रोजी-रोजगार, कर्मशीलता देता है।
2…कुण्डली चक्र
इस चक्र को उपचारित करने के लिए मूलाधार को उपचारित करने की विधि में 1 से 11 तक की तकनीक अपनायें। ये दोनों पैरों के बीच, निचले हिस्से पर मल-मूत्र द्वारों के मध्य स्थित होता है। इसके बिगड़ने से पैरों, कमर व पीठ को जाने वाली उर्जा का प्रवाह रुक जाता है। जिससे कमर, पैर, पीठ के दर्द होते हैं। साथ ही जीवन में अस्थिरता बनी रहती है। प्रसिद्धी रुक जाती है। सम्पन्नता टूटती है। इस चक्र को उपचारित करके इन सभी परेशानियों से मुक्त हुआ जा सकता है। इसी से कुण्डली का जागरण भी किया जा सकता है।
3…स्वाधिष्ठान चक्र
ये निम्न स्रजन का केन्द्र है। ये चक्र जननांगों से ऊपर और नाभि से कुछ इंच नीचे स्थित होता है। इसके बिगड़ने से सेक्स सम्बंधी सभी रोग, संतान उत्त्पति में दिक्कत, मूत्र रोग, नपुंसकता, यूट्रेस, गर्भाशय में रसौली, ट्यूमर, कैंसर, स्तन कैंसर, कमर, पैर, पीठ के दर्द होते हैं। साथ ही जीवन का आनंद बिगड़ा रहता है। इस चक्र को उपचारित करके इन सभी परेशानियों से मुक्त हुआ जा सकता है।
4…नाभि चक्र
ये चक्र नाभि के बीचो बीच स्थित होता है। इसके बिगड़ने से आंतों सहित पेट के सभी रोग होते हैं। कामनायें पूरी होने में रुकावट आती है। साथ ही जीवन का आनंद बिगड़ा रहता है। इस चक्र को उपचारित करके इन सभी परेशानियों से मुक्त हुआ जा सकता है।
5…मैंग मेन चक्र
कटि क्षेत्र में होने के कारण इसे कटि चक्र भी कहा जाता है। ये चक्र नाभि के पीछे पीठ पर स्थित होता है। इसके बिगड़ने पर ब्लड प्रेसर बिगड़ता है। जिससे कई बार जान जाने तक का खतरा होता है। ये चक्र मूलाधार चक्र द्वारा उत्पन्न की जाने वाली उर्जा, रक्त व सेल्स को शरीर के ऊपरी हिस्सों की तरफ पम्प करता है। इसका आकार व स्पीड बढ़ने से ब्लड प्रेसर बढ़ जाता है। आकार या स्पीड घटने होने से ब्लड प्रेसर कम हो जाता है। इसे हमेशा संतुलित होना चाहिये। सामान्य रूप से मुख्य चक्रों की तुलना में इसका आकार आधा या 2/3 होना चाहिये।
6…प्लीहा चक्र
ये पसलियों के नीचे बांयी तरफ होता है। ठीक उसके पीछे भी होता है। प्लीहा चक्र हमारी उर्जां का शोधन और वर्गीकरण करते हैं। इनके दूषित होने से बीमारियां बहुत परेशान करती हैं। स्वस्थ शरीर के लिये इनका ठीक रहना बहुत जरूरी है। सामान्य रूप से मुख्य चक्रों की तुलना में इनका आकार आधा होता है।
7…मणिपुर चक्र
ये निम्न भावना का केन्द्र है। नाभि से लगभग ६ इंच ऊपर दोनों पसलियों के बीच स्थित होता है। ठीक उसके पीछे पीठ पर भी होता है। इसके बिगड़ने पर गुस्सा, तनाव, नफरत, चिड़चिडापन, अज्ञात भय, अपराध की भावना, दुस्साहस, असफलतायें, चेहरे का तेज गायब, धोखाधड़ी, फ्रस्टेशन, डिप्रेशन, उग्रता, हिंसा, दुश्मनी, अपयश, अपमान, आलोचना और बदले की भावना पैदा होती है।
एसिडिटी, ब्लड प्रेसर, सुगर, थायराइड, सिर व शरीर के दर्द, किडनी, लीवर, कैलेस्ट्रोल,हृदय रोग, ट्यूमर, वैंŠसर, रसौली, व खून के रोगों की शुरुआत इसी चक्र के खराब होने से होती है। इसके बगिड़ने का मतलब है, जिंगदी का बिगड़ जाना। अक्सर गुस्सा, आलोचना व तनाव ही इसके बिगड़ने का मुख्य कारण है। इसके ठीक हुए बिना सुखी जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती।
8…अनाहत चक्र
ये उच्च भावना का केन्द्र है। इसे हृदय चक्र और सुख चक्र भी कहा जाता है। ये छाती के बीच में स्थित होता है। उसके ठीक पीछे पीठ पर भी होता है। इसके बिगड़ने पर सुख नष्ट होने लगते हैं। प्यार में धोखा, अपनेपन में कमी, मन में उदासी, जीवन में वीरानगी, सब कुछ होते हुए भी बेचैनी, हृदय रोग, कैलेस्ट्रोल में बढ़ोत्तरी, सांस लेने में असुवधिा, छाती में दर्द, प्रतिरक्षा तंत्र की कमजोरी आदि अनाहत चक्र के खराब होने के लक्षण हैं।
9… विशुद्धि चक्र
ये उच्च स्रजन का केन्द्र है। इसे हृदय चक्र और सुख चक्र भी कहा जाता है। ये गले के बीच में होता है। व्यक्तित्व, वाणी, आत्म जागरण, आत्म साक्षात्कार, क्रिएटिविटी, कला की क्षमता, गले, नाक, कान, दांत, जबड़ा, थायराइड और प्रतिरक्षा तंत्र को कंट्रोल करता है।
10…आज्ञा चक्र
ये ज्ञान का केन्द्र है। इसे अजना चक्र और मास्टर चक्र भी कहा जाता है। ये दोनों भौंहों के बीच में होता है। गुरु तत्व, निर्णय की क्षमता, सफलता की राह, ज्ञात-अज्ञात जानने की क्षमता, विल पावर, भले बुरे का फैसला, जीतने की क्षमता, एकाग्रता, जीने की चाह, मानसिक क्षमता और सभी उर्जा चक्रों को कंट्रोल करता है। इसके बिगड़ने का मतलब है सब कुछ बिगड़ जाने का खतरा।
11…थर्ड आई चक्र
ये परा ज्ञान का केन्द्र है। इसे तीसरा नेत्र चक्र और मेमोरी चक्र भी कहा जाता है। ये माथे के बीच में होता है। हमारे भीतर के शिव तत्व, पराशक्ति की क्षमता, अनंत का ज्ञान, ज्ञात-अज्ञात जानने की क्षमता, याददास्त, ब्रह्मांडीय खोज, जन्मों-जन्मों की मेमोरी, एकाग्रता, आँखों की रोशनी, न्यूरो सिस्टम को कंट्रोल करता है। इसके बिगड़ने का मतलब है बड़ा खतरा।
13… ब्रह्म चक्र
ये परा शक्ति का केन्द्र है। इसे सहस्रार चक्र और सौभाग्य चक्र भी कहा जाता है। ये सिर के ऊपर होता है। इसी के जरिये हम ब्रह्मा से जुड़े हैं। सिल्वर तंतु के द्वारा ये चक्र हर क्षण हमें ईश्वर के सम्पर्क में रखता है। दूसरे शब्दों में कहें तो इसी तंतु के द्वारा दुनयिा चलाने वाली ताकत हमारी निगरानी करती है।
ये चक्र हमारे भीतर के ब्रह्म तत्व, पराशक्ति की मौजूदगी, ब्रह्मांडीय शक्तियों और रहस्यों का उपयोग, साधना सिद्धी, मोक्ष, भाग्य, न्यूरो तंत्र, मस्तिकीय तंत्र को कंट्रोल करता है। इसके बिगड़ने का मतलब है भाग्य बिगड़ जाना।


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