एेसे बनायें भगवान शिव को अपना गुरू…

आराम से बैठ जायें.

स्थान का चयन अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं.
समय का चयन भी अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं.
यदि उपलब्ध हो तो शिव ज्ञान जागरण रुद्राक्ष को गले या हाथ में धारण कर लें.
ये रुद्राक्ष न हो तो भी शिव को गुरू बना सकते हैं.
भगवान शिव से कहें…
हे देवों के देव महादेव और गुरुओं के गुरू भगवान शिव आपको मेरा प्रणाम है.
ब्रह्मांड के प्रति मुझसे जाने अनजाने हुए अपराधों को क्षमा करके मुझ पर प्रशन्न हों.
मेरे मन मंदिर में विराजमान हों.
मै आपको अपना गुरू धारण कर रहा हूं,
आप मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें.
मै आपको अपना गुरू धारण कर रहा हूं,
आप मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें.
मै आपको अपना गुरू धारण कर रहा हूं,
आप मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें.
मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करने के लिये आपका धन्यवाद. आपको साक्षी बनाकर मै इसकी घोषणा अंतरीक्ष में कर रहा हूं, ताकि अंतरीक्ष की शक्तियां मुझे शिव शिष्य के रूप में पहचान सकें.
अखिल अंतरीक्ष सम्राज्य में मेरी घोषणा उद्घोषित है, इसे दर्ज किया जाये.
शिव मेरे गुरू हैं मै उनका शिष्य हूं.
शिव मेरे गुरू हैं मै उनका शिष्य हूं.
शिव मेरे गुरू हैं मै उनका शिष्य हूं.
हर हर महादेव, हर हर महादेव, हर हर महादेव.
हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया करें. मेरा नमन स्वीकारें.
हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया करें. मेरा नमन स्वीकारें.
हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया करें. मेरा नमन स्वीकारें.


*शिव गुरू के प्रति रोज 20 मिनट समर्पित करें.*
इस बीच 3 स्टेप पूरे करें…
1. नमः शिवाय गुरूवें. इसका हर दिन 5 मिनट जप करके शिव गुरू को नमन करें.
2. हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया करें…. इसका हर दिन 5 मिनट जप करें.
3. भगवान शिव को राम नाम बहुत प्रिय है. वे सदैव राम नाम का चिंतन करते रहते हैं. इसलिये हुरु दक्षिणा के रूप में उन्हें रोज 10 मिनट राम नाम जरूर सुनायें. उनसे कहें… हे मेरे गुरू देव आपको प्रणाम है. आपको साक्षी बनाकर मै गुरू दक्षिणा के रूप में आपको राम नाम सुना रहा हूं. मेरे मन मंदिर में विराजमान होकर राम नाम सुने, प्रशन्न हों और मुझे निरंतर शिव ज्ञान प्रदान करें.
उसके बाद 10 मिनट मन ही मन में राम राम का जप करें.
ध्यान रखें राम नाम सुनने के लिये भगवान शिव को जहां कहीं भी आमंत्रित किया जाता है, वे तुरंत पहुंच जाते हैं. इसलिये जब उन्हें अपने मन में बुलायें तब किसी भी तरह के नकारात्मक भावों को मन में न रुकने दें. मन में बैठे शिव गुरू को ये अच्छा नही लगता.
यदि किसी वजह से नकारात्मक विचार आ रहे हैं तो उन्हें रोकें नही, आने जाने दें.


*शिव शिष्यता के नियम…*
वैसे तो भगवान शिव भोले भंडारी हैं. वे किसी पर कोई नियम नही थोपते. गलती होने पर भी अपने शिष्यों को अपनेपन से सीख देते हैं. सजा नही देते. मगर वे चाहते हैं कि उनके शिष्य किसी के लिये दुख का कारण न बनें. इसलिये गिने चुने प्रतिबंध निभाने होते हैं.
1. किसी की आलोचना न करें.
2. गैर जरूरी तर्क से बचें

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