संजीवनी घंटा

25 -26 को मुम्बई से गुरूजी का Live….
संजीवनी घंटा बनाना और उससे सामूहिक उपचार सिखाएंगे
साधकों के आभामंडल में लम्क्षी सम्मोहन उर्जाओं की स्थापना


Capture

#Meena Sitlani· 32:07 last day i was suffering from muscle pain .my sister have this sangeevni bell .she did this for me with out photo. my give my address .i was fine with in 15 minutes.
thanks guruji for this reacher】

राम राम, मै शिवप्रिया
ऊपर मैने उच्च साधक और सीनियर एनर्जी हीलर मीना सितलानी का एक्सपीरियंस शेयर किया है.
उन्होंने संजीवनी घंटा के उपयोग और उसके परिणाम की जानकारी दी है. संजीवनी घंटा सालों से बिगड़े वास्तु, पीढ़ियों से आ रहे परिवारिक दोष, रुकावटों, बाधाओं, आर्थिक दबाव, बीमारियों, कलह, रिश्तों में टूटन की नकारात्मक उर्जाओं को तोड़कर ध्वस्त कर देता है. मृत्युंजय योग की टीम ने अपने लेटेस्ट सर्वे में पाया कि जिन बच्चों का पढ़ाई में बिल्कुल मन नही लगता, उनकी भी एकाग्रता बढ़ जाती है.
हमारे ऋषियों मुनियों ने लाखों साल पहले घंटे के उपचारक उपयोग का पता लगा लिया था. तब से अध्यात्म में विभिन्न रूपों में लगातार इसका उपयोग होता आ रहा है.
शास्त्रों में लिखा है- आगमनाय देवानाम गमनाय दैत्यानाम, घंटा ध्वानि नमस्तुते।
भावार्थ- जो दैत्य तुल्य नकारात्मक शक्तियों को भगा देती है और देव शक्तियों को आकर्षित कर लाती है उस घंटा ध्वनि को नमस्कार है.
यही सच्चाई भी है. जहां नियमित घंटा बजता है वहां नकारात्मकता खत्म हो जाती है, सकारात्मकता स्थापित होती है. यहां हम बात सत्यनारायण भगवान की कथा के समय उपयोग किये जाने वाले घंटे की कर रहे हैं.
पूजापाठ में भी लोगों के सुविधाभोगी हो जाने के कारण घंटे की जगह घंटियों ने ले ली. इस कारण इसका वैज्ञानिक पक्ष पीछे छूट गया. उसकी जगह रूढ़िवादिता ने ले ली. विज्ञान ये है कि घंटे की तीब्र तरंगें आस पास फैली नकारात्मक उर्जाओं को छिन्न भिन्न कर देती हैं. वहां मौजूद लोगों के आभामंडल और उर्जा चक्रों में मौजूद नकारात्मकता को भी तोड़कर निकाल देती हैं. ऊपर दिया मीना सितलानी जी का अनुभव इसका प्रमाण है.
ऐसे अनुभव हर रोज असंख्य लोगों को होते हैं.
घंटे की सकारात्मक तरंगों को संजीवनी उपचार में वेदकाल से अपनाया जा रहा है. संजीवनी उपचार की इस विधा को पुनः स्थापित करने के लिये हमारे गुरू जी इस पर कई साल से अनुसंधान कर रहे थे. हाल ही में उन्होंने संजीवनी घंटा का आविष्कार कर लिया. जिससे चार सिद्ध रुदराक्षों के द्वारा घंटा ध्वनि के साथ मिलकर किसी भी जगह पर 4 औरिक दवारें स्थापित कर दी जाती हैं. जो उस जगह पर दुख देने वाली नकारात्मक उर्जाओं को घुसने से रोकने में सक्षम होती हैं. साथ ही घंटे की ध्वनि से वहां विखंडित हुई नकारात्मक उर्जाओं को फिल्टर करके कैम्पस के बार फेंक देती हैं. उसी समय घंटे के ऊपर स्थापित कपूर की तरंगे ध्वनि के साथ फैलकर चारो तरफ सुखकारी उर्जायें स्थापित कर देती हैं.
संजीवनी घंटा किसी भी स्थान, व्यक्ति या समूह का संजीवनी उपचार करने में सक्षम होता है. इसकी पावरफुल पाजिटिव वेब में ग्रह-वास्तु की नकारात्मकता, ऊपरी बाधाओं, बीमारियों यहां तक की डिप्रेशन की उर्जाओं को भी ध्वस्त कर देने की क्षमता होती है.
गुरू जी आगामी 25 व 26 नवम्बर 17 को मुम्बई आश्रम में साधकों को संजवनी घंटे से सामूहिक संजीवनी उपचार करना सिखाएंगे.
साथ ही संजीवनी घंटा तैयार करने की विधि भी बताएंगे.
इस बीच लक्ष्मी महासाधना के 40 दिन पूरे हो चुके हैं. मुम्बई के लाइव में गुरू जी अगले चरण की जानकारी देंगे.
लाइव फेसबुक के शिवचर्चा ग्रुप में होगा.
जो लोग लक्ष्मी मां का प्रत्यक्षीकरण करने की साधना कर रहे हैं. उनके आभामंडल में उसी दिन गुरू जी लक्ष्मी सम्मोहन ऊर्जाओं की स्थापना करेंगे. इसके लिये साधक अपनी लक्ष्मी बूटी साथ लेकर आयें.
हेल्पलाइन (दिल्ली)- 9999945010
मुम्बई (पूजा)- 7666261111

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