देवदोष निवारण हेतु शिवगुरू से आग्रह का विधान

devdosh

15 अक्टूबर 2018
सभी अपनों को राम राम
माता-पिता का अनादर, गुरू के प्रति दुर्भावना, बार बार ईष्ट बदलने, गैर जरूरी मूर्ति स्थापना, खंडित मंत्र जप, अधूरी साधनायें, पूजा पाठ के समय क्रोध, धार्मिक लोगों की आलोचना, पूजा पाठ में लगे व्यक्ति को डिस्टर्ब करने, प्रसाद का अनादर, मूर्तियां तोड़ने, हरे पेड़ काटने, नदियों- जलाशयों को गंदा करने, देवी देवताओं का तिरस्कार देवदोष उत्पन्न करता है.

एेसी समस्यायें जिनका कारण समझ में न आये. काम अचानक बिगड़ने लगें, सोचे हुए काम परिणाम तक न पहुंच सकें, आर्थिक समस्या बार बार वापस आये, अकारण बीमारी परेशान करें, समृ्द्धि भंग होती रहे, एकाएक मित्र छूटने लगें, जीवन साथी का व्यवहार दुखदायी बन जाये, राजदंड का भय उत्पन्न हो तो देवदोष पर विचार जरूर कर लेना चाहिये.
देवदोष बड़ा ही कष्टकारी होता है. एेसे समझें कि जब बचाने वाले ही मारने लग जायें तो मारकता भयानक हो जाती है. एेसा ही देवदोष से होता है. इससे मुक्त हुए बिना जीवन को आगे बढा पाना असम्भव सा होता है.
सबसे गम्भीर बात ये है कि देवदोष कई जन्मों तक पीछा करता है. जिसका प्रभाव विभिन्न ऋणों के रूप में जन्मकुडंली में स्पष्ट देखा जा सकता है.
शिव गुरू से देवदोष मुक्ति का आग्रह करके शिवशिष्य जन्म जनमान्तर से पीछे लगे देवदोष से मुक्ति पाकर जीवन को उज्जवल बना ही लेते हैं.
विधान मै आगे दे रहा हूं. ध्यान से पढ़ें और अपनायें.


विधान…
आंखें बंद करके पूर्व मुख हो आराम से बैठ जायें.
शिव गुरू से मन में विराजमान होने का आग्रह करें.
कहें- हे देवों के देव महादेव मेरे मन को सुखमय शिवाश्रम बनाकर माता महेश्वरी भगवान गणेश जी सहित सपरिवार मेरे मन मंदिर में विराजमान हों. आनंदित हों. मेरे जीवन में सुखों की स्थापना करें.
फिर एकाग्रचित्त मन से 10 मिनट तक देवासुर गुरुर्देव देवासुर महेश्वरः देवासुर महामित्रः देवदेवात्म सम्भवः मंत्र का जप करें.
उसके बाद शिवगुरू से देवदोष मुक्ति का आग्रह करें. कहें- हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं, मुझे शिष्य पर दया करें. जाने अनजाने मुझसे त्रुटि वश हुए अपराधों के कारण मेरे जीवन में देवदोष लग गया है. देवदोष समाप्त करके मेरे जीवन को निर्विघ्न करने हेतु मेरे सौभाग्य चक्र में देवशक्तियों की स्थापना करें.
आग्रह को तीन बार दोहरायें.
फिर शिव गुरू को, देवमित्रों को, संजीवनी शक्ति को, अपने सौभाग्य चक्र को, धरती माता को और विधान से परिचित कराने के लिये मुझे धन्यवाद दें. ध्यान रहे अध्यात्मिक ज्ञान से परिचित कराने वालों को धन्यवाद न देने अर्थात् उनकी अनदेखी करने से भी देवदोष उत्पन्न होता.
इसे 16 दिन करे।
सबका जीवन सुखी हो, यही हमारी कामना है
शिव शरणं
जय माता दी.

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