गुरुदेव की हिमालय साधना-2

पहाड़ी देवी का गुस्साः जैसे प्रेत नाच रहे हों


18950993_425054067881347_6328611391919421045_nप्रणाम मै शिवांशु
महासाधना वाट्सअप ग्रुप के कुछ साथियों ने मुझसे चाहा है कि मै अपनी पिछली हिमालय साधना के कुछ अनुभव शेयर करूं. ताकि जो साथी उच्च साधनाओं की इच्छा रखते हैं. वे खुद को तैयार कर सकें.
गुरुवर से अनुमति लेकर मै अनुभव लिख रहा हूं. जब तक गुरुदेव के साथ हिमालय साधना के लिये दोबारा रवाना नही होता, तब तक पहले वाली साधना के अनुभव आपसे शेयर करता रहुंगा. कुछ व्यस्तताओं के कारण यदि हर दिन ऐसा न कर सकूं तो माफ करिएगा. समय मिलते ही लिखता रहुंगा. सम्भावना है कि 15 जून को गुरुदेव हिमालय साधना के लिये रवाना होंगे. मै 2 दिन पहले उनकी साधना की तैयारी के लिये ऋषीकेश पहुंच जाउंगा.
पिछले दिनो किसी ने कमेंट किया *अगर इतनी महान साधनाओं के होते हुए भी संसार में त्रासदी है तो क्या अर्थ है इन सब का , आडंबर से अधिक कुछ नहीं*.
हमारा आग्रह… ऐसे लोग कृपया फ्रस्टेशनबाजी की बजाय त्रासदी रोकने के सक्षम तरीके बतायें.

अब हिमालय साधना के दौरान का एक अनुभव आपके साथ शेयर कर रहा हूं.
बात बीते बरस सितम्बर की है.गुरुदेव हिमालय साधना से वापस जा चुके थे. इस बार की अपनी हिमालय साधना का अधिकांश समय उन्होंने केदार क्षेत्र में बिताया था. वहां गुप्त काशी में ज्यादा दिन रहे. उनके हिमालय प्रवास के दौरान मै सिर्फ एक बार ही मिल पाया. नीलमणि जी उनके साथ काफी समय रहे. नीलमणि जी उच्च साधक हैं. गुरुदेव के साथ हिमालय साधना करने के लिये वे मध्य प्रदेश के टीकमगड़ क्षेत्र से आये थे.
गुरुदेव के वापस जाने के बाद नीलमणि जी ऋषिकेश में रुक गये. वहीं उनसे मेरी मुलाकात हुई. मेरे आग्रह पर नीलमणि जी ने गुरुवर की साधना के दुर्लभ क्षणों की विस्तार से जानकारी दी.
उनके द्वारा बताये उन सिद्ध स्थानों पर जाने की इच्छा हुई जहां जहां गुरुवर ने साधना की थी.
मै सबसे पहले गुप्तकाशी पहूंचा. वहां कई दिन रुका. उच्च साधनाओं के लिये यहां की घाटियां बहुत उपयुक्त और सिद्ध हैं.
गुप्तकाशी में मेरी मुलाकात एक संत से हुई. वे मूल रूप से केदार क्षेत्र के ही रहने वाले थे. सिद्ध साधक थे. उन्हें घाटियों की बारीक जानकारी थी.
उनका नाम श्यामल जी था.
उन दिनो श्यामल जी केदार क्षेत्र में स्थित पांडवों द्वारा बनाये गए शिव मंदिरों की परिक्रमा कर रहे थे.
केदार क्षेत्र में केदारधाम के अलावा भी पांडवों द्वारा बनाये कई मंदिर हैं. अधिंकाश शिवमंदिर हैं. वे सभी सिद्ध हैं.
जल्दी ही श्यामल जी से मेरी घनिष्टता हो गई. उसी बीच श्यामल जी ने बताया कि वे पंचवत्र महादेव के दर्शन करने जाने वाले हैं.
नीलमणि जी ने गुरुदेव द्वारा शिवसहस्त्र नाम सिद्ध करने के लिये जिन स्थानों पर साधना किये जाने की जानकारी दी थी. उनमें एक पंचवत्र महादेव भी थे. मैने आग्रह किया तो श्यामल जी ने मुझे साथ चलने की सहमति दे दी.
हम श्यामल जी की बाइक से वहां के लिये रवाना हुए.
पहाड़ों पर बाइक से चलना बड़ा रोमांचकारी होता है.
पंचवत्र महादेव धामस लमगौंडी गांव में स्थापित हैं. पांडवों ने उस दुर्गम जगह को शिव स्थापना के लिये क्यों चुना ये तो वही जाने. मगर उस स्थान में मणिपुर और नाभि चक्र के बीच के उर्जा क्षेत्र को उत्तेजित करने वाली सघन ऊर्जाएं मिलीं. गुरुवर के वहां जाकर साधना करने का मकसद मै जान चुका था. मै शाम तक उस मंदिर में रहा.
व्यवस्था के स्तर पर वहां आकर्षित करने वाला कुछ भी नही था.
मगर उर्जाओं के स्तर पर वहां का आकर्षण गजब का था. जिसके कारण मै निर्धारित समय से अधिक देर तक बैठा रह गया.
वह क्षेत्र जंगली जानवरों के खतरे वाला है. खासतौर से भालुओं का खतरा अधिक होता है. वे च्ववन प्रास के पेड़ों पर लगे फल खाने के लिये बस्तियों तक पहुंच जाते हैं. अंधेरा होने पर तेंदुओं और चीतों का भी खतरा बढ़ जाता है.
हमने वापस गुप्तकाशी जाने का विचार छोड़ दिया.
श्यामल जी को पहाड़ी रास्तों पर बाइक चलाने का बढ़िया अनुभव था. उन्होंने मुझसे कहा कि वे गुप्तकाशी जाने लौटने की बजाय एक सिद्ध महिला के दर्शन कराने चल रहे हैं.
सिद्धों से मिलना मुझे पहुंच अच्छा लगता है.
मै उनके साथ चल दिया.
हम लगभग डेढ़ घंटे दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर चलते रहे. रात हो गई.
एक गांव में पहुंचे. मैने वहां की सिद्ध साधिका से पहचान गुप्त रखने का वादा किया था. इसलिये यहां गांव का नाम नही लिख रहा हूं.
श्यामल जी मुझे जहां ले गये वहां दरबार सा लगा था. देवी पंडाल बन था. पास में एक युवा महिला बैठी थीं. युवा होने के साथ ही उनकी खूबसूरती सम्मोहनकारी थीं.
उन्हें वहां लोग माई कहते थे.
दरबार में रात होने के बावजूद लगभग 15 लोग बैठे थे. जबकि पहाड़ों के लोग रात में घरों से निकलना बंद कर देते हैं.
वे सब उस माई के भक्त थे.
श्यामल जी को वहां के लोग जानते थे.
मुझे देखते ही माई एेसे झूमने लगी जैसे उन पर प्रेत चढ़ गया हो. मुझे बताया गया था कि पहाड़ों में एेसी देवियां, ओझा और उनके दरबार काफी ज्यादा मिलते हैं.
वे थोड़ा रुकी और मेरी तरफ देखकर मेरा नाम बताया.
इससे पहले कि मै सोचता इन्हें मेरा नाम कैसे पता चला उन्होंने मुझे चौंकाने वाली कई और जानकारियां दे दीं.
जैसे मेरे घर के सदस्यों के नाम, मैने कल क्या खाया था, आज क्या खाया. कल मै किससे किससे मिला था, उनसे क्या क्या बातें कीं. आज दिन भर क्या किया. साथ ही मेरे जीवन में गुजरी कुछ एेसी बातें जिन्हें सिर्फ मै ही जानता था.
माई की बातों ने कुछ देर के लिये मुझे स्तब्ध कर दिया.
मै समझ गया कि उन्हें लोगों के बारे में ज्ञात अज्ञात जान लेने की सिद्धी प्राप्त है.
उन्होंने जो जो बताया वो सब सच था.
मगर मैने उसे मानने से इंकार कर दिया. मैने कहा नही आपने जो कुछ बताया उनमें से ज्यादातर बातें सही नही हैं.
मेरी बात पर श्यामल जी चौंककर मेरी तरफ देखने लगे. जैसे कहना चाह रहे हों कि कल से आज तक की जो बातें माई ने बताईं वे सब उनके सामने ही हुईं. फिर मै उन्हें झुठला क्यों रहा हूं.
मैने श्यामल जी से इशारे में आग्रह किया कि वे कुछ देर के लिये खुद को शांत कर लें.
वे शांत हो गये. मगर असंतुष्ट दिख रहे थे.
माई की आंखों में जैसे अंगारे भर गये थे. मुझे एेसे देखे जा रही थीं, जैसे मै उनका सबसे बड़ा दुश्मन हूं.
वे फिर से झूमने लगीं. इस बार तो लगा जैसे प्रेतों का पूरा समूह उन पर नाच गया हो. एेसा लगा जैसे प्रेतों का तांडव हो रहा हो.
मै शांत था, मुस्कराता हुआ माई के पास जाकर बैठ गया.
क्रमशः

माई के पास सबके बारे में जान लेने की कौन सी सिद्धी थी. मैने उनकी बातों को क्यों झुठलाया. उनके बदले माई ने मेरे साथ क्या किया. इसकी जानकारी आगे दूंगा.
तब तक की राम राम
शिव गुरु को प्रणाम

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