जब मैने गुरुदेव से प्रेत देखने की इच्छा जताई…..3

प्रणाम मै शिवांशु

सपना सामान्य हो गई.

जीन्स और टी शर्ट में होने के बावजूद गांव वालों ने गुरुवर के भीतर के सिद्ध पुरुष को पहचान लिया. अब गांव वाले, यहां तक कि पुजारी भी गुरुदेव के पैर छूकर आशीर्वाद लेने को आतुर था.

उन दिनों गुरुदेव किसी को अपने पैर छूने की इजाजत नही देते थे. हाँ कोई चाहे तो उनसे गले मिल सकता था, हाथ मिला सकता था. कार में जाकर बैठ गए. मुझसे तुरन्त वहां से निकलने का इशारा किया. मैंने कार स्टार्ट कर दी.

गुरुदेव ने सपना को इशारे से पास बुलाया, उसके कान में कुछ कहा. फिर उसके जीजा को पास बुलाकर उसके भी कान में कुछ कहा. फिर हम वहां से चल दिये.

गुरुवर की चाय की तलब ठीक से पूरी न हो पाई थी. सो अगले गांव में रुककर हमने फिर चाय पी.

इस बीच मैंने कई सवाल कर दिये. जैसे ब्रम्ह राक्षस क्या होता है? आपने उस पर कण्ट्रोल कैसे किया? संजीवनी उपचार में अभी तक आपने मुझे ये क्यों नही सिखाया? और भी कई सवाल.

तांत्रिकों ओझाओं ने ऐसे प्रेत को ब्रम्ह राक्षस के नाम दिया है, जिस पर कंट्रोल बहुत मुश्किल होता है. गुरुदेव ने बताया. मग़र सपना पर कोई ब्रम्ह राक्षस नही था.

वह डिप्रेशन में है.

सपना रिक्सा चलाने वाले अपने गांव के कल्लू से प्यार करती है. उससे शादी करना चाहती है. कल्लू जाति से चमार है. सपना गुप्ता परिवार से है. इसलिये उसके घर वाले दोनों की शादी किसी भी हालात में नही होने देना चाहते. सपना और कल्लू की मुलाकातों के कारण गांव में घर वालों की बदनामी हो रही थी. इसलिये सपना के घर वालों ने उसे उसके जीजा के घर भेज दिया. उसके जीजा का नाम रमेश अग्रवाल था.

सपना खूबसूरत थी. रमेश का मन उसको लेकर बेईमान हो चला. उसे लगा कि सपना का चाल चलन बिगड़ गया है. इसलिये वो आसानी से उससे सम्बन्ध स्थापित कर लेगी.

मगर ऐसा न हुआ. सपना कल्लू के अलावा किसी और को देखना भी नही चाहती थे. रमेश जीजा साली के मजाक के रिश्ते की लिमिट पार करके सपना का शोषण करने की कोशिश करने लगा. इसके लिये दबाव बनाने के लिये वह उसे धमकाता भी था.

जब उसका वस न चला तो पुजारी के साथ मिलकर सपना का रिश्ता नीरज से तय कराने की कोशिश करने लगा.

कुछ समय तक तो सपना बर्दास्त करती रही. मगर जब उसका रिश्ता नीरज से तय किया जाने लगा तो वः उग्र हो गयी.

सपना को पता था कि उसके घरवाले ब्रम्ह राक्षस से बहुत डरते हैं. रमेश भी ब्रम्ह राक्षस के नाम से डरता है. सो उसने एक ड्रामा रचा. एक दिन हल्ला मचाकर घर में तोड़ फोड़ कर दी. घर के लोगों को जाहिर किया कि उस पर ब्रम्ह राक्षस स्वर हो गया है. ब्रह्म राक्षस की आवाज बनाकर घर वालों को बताया कि सपना ने एक दिन पीपल के एक पेड़ के नीचे पेशाब कर दिया. उस पेड़ पर ही वो रहता था. तभी से उसके ऊपर सवार हो गया. जो कोई भी सपना से शादी करेगा वो उसे मार डालेगा.

घर वाले डर गए.

तब से जब भी कोई सपना की शादी की बात करता या उसे डांटता या कल्लू की बुराई करता या सपना की मर्जी के खिलाफ बोलता तभी वो झूमने और चिल्लाए लग जाती. हंगामा करती. उसके भीतर से डरावनी आवाजें निकलतीं. कई बार मर्दानी आवाज निकलती. वो कहता कि वो ब्रह्म राक्षस है, सबको मार डालेगा.

ये ड्रामा एक महीने पहले शुरू हुआ था. इस बीच सपना ब्रम्ह राक्षस के करेक्टर में इतनी बुरी तरह घुस गई कि उसने अपना निजी ब्रम्ह राक्षस क्रिएट कर डाला.

निजी प्रेत बहुत खतरनाक होता है. उसे तंत्र मन्त्र, झाड़ फूंक. टोने टोटके से कन्ट्रोल नही किया जा सकता. जिस समय व्यक्ति ऐसे प्रेत के करेक्टर में घुसता है उस समय उसकी आंतरिक शक्तियां एक ही बिंदु पर केंद्रित हो जाती हैं.

तब वह व्यक्ति भारी से भारी चीजों को उलट पलट कर देता है. उसके मुह से मनचाही आवाजें निकलती हैं. वह कई लोगों को झिटक कर दूर फेंक सकता है.

ऐसे व्यक्ति को ठीक करने में कई बार झाड़ फूंक करने वालों को जान गवानी पडती है. क्योंकि उन्माद में ऐसा व्यक्ति मरने मारने पर उतारू हो सकता है.

गुरुदेव ने कहा अब तुम सोच रहे होंगे कि मैंने किसी चमत्कार के तहत सपना की स्टोरी जान ली.

तो, कैसे जानी?

जब तुम हंगामे में खोये थे तभी मैंने कुछ गांव वालों से बात करके ये सब पता लगाया. ये सुनकर वो दिन याद आ गए जब गुरुवर खोजी पत्रकारिता किया करते थे. जब तक दूसरे लोग भूमिका बनाते तब तक वे खबर को तह तक खोज लाया करते थे.

आपने रिपोर्टिंग की. मैंने पूछा.

मान सकते हो. गुरुदेव ने कहा और बताने लगे कि ऐसे लोगों पर नियंत्रण कैसे किया जाता है.

ये मै आपको आगे बताऊंगा.

तब तक की राम राम. …. क्रमशः.

आज मै काफी समय बाद गुरुदेव के साथ रहुंगा. हम दोनों की फ़्लाइट एक ही है. इसलिये बहुत दिनों बाद मै बहुत खुश हूँ.

अगर कल भी उनके साथ रहने का मौका मिला तो अगली पोस्ट लेट हो जायेगी.

सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

शिव गुरु को प्रणाम

गुरुवर को नमन.

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