गुप्त साधनायें और हमारी उर्जा

मृतात्मा से मेरा पहला सम्पर्क…..


राम राम मै शिवांशु…
जो लोग संजीवनी शक्ति उपचार सीख रहे हैं. वे इस पोस्ट को बहुत ध्यान से पढ़ें. यह आपके आने वाले कोर्स का एक हिस्सा है. आगे आपको भी इसे सीखना और करना है.
बात फरवरी 2007 की है.
गुरुदेव के साथ मै उनके एक अाध्यात्मिक मित्र से मिलने मेरठ गया था. वहां एक तांत्रिक से मुलाकात हुई. जो उन दिनों आत्महत्या करने के बारे में सोच रहे थे. नाम सुभाष त्यागी था. देवी साधक थे.
उन्होंने बताया लोगों में एक समय उनका बड़ा नाम था. उनके पास जो भी आता, वह खाली नहीं जाता था. जिसने भी उनके दरबार में अर्जी लगाई. उसे मिला. उनके मुंह से जो निकला पूरा हुआ. जिसे आशीर्वाद दिया वह गुलजार हुआ. जिसे श्राप दिया वह तबाह हुआ. भक्त उनकी इज्जत करते थे. दुश्मन खौफ खाते थे.
वे देवी को शराब की भेंट देते तो लगता वहां देवी साक्षात् प्रकट हो गईं. एेसा उन्होंने बताया.
तकरीबन डेढ़ साल पहले उनके गुरु ने शरीर छोड़ा. उसके कुछ महीने बाद से उनकी शक्तियां विलुप्त हो गईं. उल्टे उनके ही सारे काम फंस गये. वे सरकारी विभागों के ठेके लेते थे. अधिकारियों ने उनके खिलाफ जांचें बैठा दीं. करोड़ों रुपये की पेमेंट फंस गयी. बेटे की संगत बिगड़ गई. वह लड़कियों के साथ पकड़ा गया. जेल गया. उनकी साख चली गई. बेटी और पत्नी गम्भीर बीमारी का शिकार हो गईं.
अब उन्हें आत्महत्या की राह भली सी लग रही थी.
उस समय वे गुरुदेव के मित्र से मदद मांगने आये थे. गुरुवर के मित्र ने उनकी विवेचना की और असमर्थता व्यक्त कर दी. गुरुदेव से मदद का अाग्रह किया.
गुरुवर ने मेरी तरफ देखा. मै इशारा समझ गया. और सुभाष की समस्या का कारण ढूंढ़ने लगा. मैने उनके आज्ञा चक्र से सम्पर्क किया. मगर वहां से कोई जवाब नहीं मिला.
मैने भी गुरुदेव के मित्र की तरह असमर्थता प्रकट कर दी.
गुरुवर ने मुझे बहुत ही सर्द निगाहों से देखा. मतलब था मेरी असफलता ने उन्हें नाखुश किया. मैने एक और कोशिश की. मगर नाकाम.
गुरुदेव ने कहा इनके अवचेतन मन से सम्पर्क करो. मैने किया. मगर सुभाष के अवचेतन ने कोई भी सूचना देने से इंकार कर दिया. उसने जड़ता प्रकट की.
मै लाचार दिखने लगा.
मेरा हौसला बढ़ाने के लिये गुरुदेव मुस्कराये. कहा अपनी कुण्डली को अपनी थर्ड आई से कनेक्ट करो. फिर इनके अवचेतन को स्कैन करो.
मैने एेसा ही किया. 5 मिनट लगे.
जवाब आ गया.
दरअसल कुण्डली की अतिरिक्त उर्जा के कारण इस बार मै बल पूर्वक सुभाष के अवचेतन में प्रवेश कर गया था.
जवाब मिला सुभाष ने अपने गुरु और उनके परिवार के प्रति कई तरह के अनुचित कार्य किये हैं. जिससे उसकी उर्जायें निरंकुश हो गईं. उसके अवचेतन ने जड़ता अपना ली. इस कारण न सिर्फ सिद्धियां नष्ट हो गईं बल्कि भारी रिसाव से सुभाष की उर्जायें बह गईं. जो उसकी बेकाबू समस्याओं का कारण बनीं.
सुभाष ने अपनी गलती स्वीकारी. मगर आरोप लगाया कि गुरु के बेटे और बहनोई ने ही गद्दी छिन जाने के डर से तंत्र करके उसे बरबाद किया है.
मैने कहा ये सच नहीं है. अपनी स्थितियों के लिये सिर्फ आप और आपके कर्म ही जिम्मेदार हैं.
वह चुप रहा.
अब समाधान निकालो. गुरुदेव ने मुझे निर्देश दिया.
सुभाष के अवचेतन से मैने समाधान पूछा तो वह फिर से जड़ हो गया.
मेरे चेहरे पर फिर उलझन झलकने लगी.
गुरुदेव ने कहा इनके पीनियल ग्लांट के चक्र को उत्तेजित करो. उसकी उर्जाओं का प्रवाह सिल्वर काड (सहस्रार को ब्रह्म से जोड़ने वाली आध्यात्मिक नाड़ी) की तरफ ले जाओं और जवाब का इंतजार करो.
मैने एेसा ही किया. 10 मिनट लगे. जवाब आ गया.
मगर विचित्र और परालौकिक.
जवाब मिला सुभाष के गुरु से सम्पर्क करें.
मैने हैरानी से गुरुवर की तरफ देखा.
वे मुस्कराये और बोले इसकेे अलावा कोई रास्ता नहीं. सम्पर्क के लिये तैयार हो जाओ.
किसी मरे हुए व्यक्ति के आभामंडल (साधारण लोगों की भाषा में आत्मा) से सम्पर्क का यह मेरा पहला मौका था. इससे पहले गुरुवर ने संजीवनी उपचार की इस क्रिया में मुझे आजमाया ही नहीं था.
मै अनजानें भय के साथ खुद को तैयार करने लगा.
आगे बताउंगा, सुभाष के गुरु को बुलाया तो उन्होंने कैसा बर्ताव किया और कैसे मिली मुक्ति सुभाष को दुर्भाग्य से.

सत्यम् शिवम् सुंदरम्
शिव गुरु को प्रणाम
गुरुवर को नमन.

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