मैंने महसूस किया है उस जलते हुए रावण का दुःख

आज गुरुदेव whatsapp के शिव साधक ग्रुप में कुछ देर के लिये online आये और एक मैसेज का जवाब लिखा। हम उसे आप के साथ शेयर कर रहे हैं. इसमें जीवन की बड़ी सीख निहित है। गौर से पढ़ें….

” मैंने महसूस किया है
उस जलते हुए रावण का दुःख
जो सामने खड़ी भीड़ से
बार बार पूछ रहा था…..
“तुम में से कोई राम है क्या?”

ऊपर लिखी लाइनें शिव साधिका ग्रुप में दुबई से पूनम जी ने भेजी पोस्ट की थीं। उन पर गुरुदेव ने जो लिखा वह हम नीचे पोस्ट कर रहे हैं…..

” पूनम हर इन्शान के भीतर राम हैं और रावण भी। देखना ये होता है कि उसने किसे जगाया और किसे जलाया।
जलते रावण के दुःख को महत्व देने का मतलब है अपने भीतर के राम की दिव्यता को कमजोर करना।

कुछ बातें पढ़ने या सुनने में तो अच्छी लगती हैं मगर वे हमारे अवचेतन को मिसगाइड करती हैं। सो ऐसी बातों से सावधान रहना भी जरूरी है।
जीवन में क्या करना है इसकी जानकारी जितनी जरूरी होती है उससे कहीं अधिक जरूरी ये जानना होता है कि क्या नही करना है।

एक और सवाल के जवाब में गुरुदेव ने लिखा…
जब जो करना है हम उसे करते हैं तो हमारे भीतर के राम जागते हैं. और जिसे नही करना है उसे करते हैं तो हमारे भीतर का रावण जागता है.

 

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