साधना रहस्य-6

प्रेत को तांत्रिक ने भेजा था


राम राम मै शिवांशु
रितु सामान्य हो गई. प्रेत ने उसका शरीर छोड़ दिया था. मगर मेरे बनाये इलेक्ट्रिक वायलेट उर्जा के कैप्सूल में अभी भी फंसा था. मैने कैप्सूल कोे रितु से अलग कर दिया.
अब रितु प्रेत से मुक्त थी. 6 साल से प्रेत प्रताड़ना झेल रही युवती के चेहरे पर आजादी के भाव साफ दिख रहे थे. वह अपने साथ आई महिलाओं से लिपटकर रो पड़ी.
जाते जाते उसका पति जितिन आभार व्यक्त करते हुए गिरिजा शरण जी के चरणों में नोटों की दो गड्डियां रख गया.शायद वह अपने पास मौजूद सारे रुपए उनके पास रख गया था. जो हजारों में थे. साथ ही सेवा के लिए दोबारा आने का संकल्प करके गया.
गिरिजा शरण जी रुपये पैसे को हाथ से नहीं छू रहे थे सो उन्होंने जितिन के जाने के बाद चिमटे से पकड़कर सारे रुपए धूनी की आग में डाल दिये. सब जल गए. ये देखकर मै बरबस ही मुस्करा दिया. और फिर सोचने लगा कि गुरुवर से पूछुंगा जरूर कि उन्होंने गिरिजा शरण जी को धन को हाथ लगाने से क्यों मना किया ?
मैने गिरिजा शरण जी से कहा अब हमें ये जगह छोड़नी होगी. अन्यथा ये लोग दोबारा आएंगे और यहां आपका मंदिर बनवाने में जुट जाएंगे.
सही कहा आपने. गिरिजा शरण जी बोले मगर इसका क्या करेंगें. उनका इशारा प्रेत की तरफ था.
पहले इसका इतिहास जान लेते हैं, फिर तय करते हैं कि इसका क्या करना है. मैने गिरिजा शरण जी से कहा कि वे प्रेत से उसके बारे में जानकारी लें.
उन्होंने जानकारी लेकर बताया कि मरने से पहले उसका नाम लाल चंद था. उसकी मृत्यु एक दुर्घटना में हुई. 6 साल पहले एक तांत्रिक ने अपने वश में कर लिया. फिर उसने बदनीयती से उसे रितु के शरीर में प्रवेश करा दिया.रितु के पिता उस तांत्रिक के अनुयायी थे. रितु की सुंदरता को लेकर तांत्रिक की नीयत खराब थी. वह चाहता था कि रितु जीवन भर उसके पास आती रहे और वह उसके शरीर का भोग करता रहे. कई सालों तक रितु प्रेत बाधा से मुक्ति के लिए उसके पास गई भी.
शिव की महिमा तो देखिये. गिरिजा शरण जी ने कहा जब रितु के परिवार वाले सब कुछ छोड़कर भोलेनाथ के सहारे बैठ गए तो उन्होंने उसे हमारे पास पहुंचा दिया.
हां सही है. मैने कहा शिव गुरु अपने भक्तों को बेसहारा नहीं छोड़ते. बस उन पर समर्पित हो जाने भर की देर है.
अब आप बतायें इसका क्या किया जाये. गिरिजा शरण जी ने अपना सवाल दोहराया.
इसे भरपूर सजा मिलनी चाहिये. मैने कहा ताकि ये दोबारा किसी को परेशान करनी की हिम्मत न करे.
ये तो बेचारा आपसे पहले ही बहुत डरा हुआ है मित्र. गिरिजा शरण जी के संत व सरल मन को प्रेत पर दया आ गई. वे बोले इस मामले में अधिक गलती तो तांत्रिक की थी. ये तो बेबस रहा होगा. क्या हम इसे प्रेत योनि से मुक्ति नहीं दिला सकते ?
नहीं मुझे इसका तरीका नहीं मालुम. गुरुवर ने तो मुझे सिर्फ पितृों को मोक्ष दिलाने का ही तरीका सिखाया है. मैने कहा. आपको कोई विधि पता हो तो बतायें.
मुझे भी नहीं पता. गिरिजा शरण जी थोड़ा उदास से हो गए.
कोई बात नहीं आप इसे अपने साथ ले जाइये. मैने सुझाव दिया, स्वामी जी को प्रेतों को मोक्ष दिलाना आता है. उन्होंने मुझे बताया था. जब कभी आप उनसे मिलने जाएंगे तो वे इसे मुक्त करा देंगे.
हां गुुरु भगवान तो एेसा कर ही देंगे. गिरिजा शरण जी ने अपने गुरु पर दृढ़ विश्वास व्यक्त करते हुए कहा. मगर मै इसे कैसे ले जा सकता हूं. मुझे तो इसकी विधि भी नहीं आती.

विधि मै बता देता हूं, आप बस इससे पूछिये कि ये आपकी सेवा करने को तैयार है क्या?
हां तैयार तो है. मगर मै इससे क्या सेवा कराउंगा. गिरिजा शरण जी थोड़ा उलझन में दिखे.
अरे आप परेशान न हों. मैने कहा. आप इसे देख लेते ही हैं. मै आपको उर्जा चक्रों से पंचतत्वों के अस्त्र निर्मित करके उनका उपयोग करना सिखा दे रहा हूं. जिनसे ये कोई शरारत करें या हमलावर हो तो आप इसे या किसी भी प्रेत को सजा दे सकेंगे, खत्म भी कर सकते हैं. साथ ही मै इसकी उर्जाओं (शक्तियों) की प्रोग्रामिंग कर दे रहा हूं. जिससे यह आपकी इच्छा के विपरीत न तो कहीं जा सकेगा और न ही किसी को परेशान कर सकेगा. हिमालय की गुफाओं में साधना के दौरान ये आपके बहुत काम आएगा. कुछ नहीं तो आपके संदेश तो मुझ तक पहुंचायेगा ही.
ये सुनकर गिरिजा शरण जी हंस पड़े, बोले मित्र आपने समाचार का बढ़िया रास्ता निकाला. मगर आपके हमले से यह टूट फूट सा गया है. क्या अब दोबारा कुछ करने लायक बन पायेगा.
हां मै इसे आपसे ही ठीक कराउंगा. मैने कहा पहले आपको पंचतत्वों का उपयोग सिखाता हूं.
हम तीनों की इस पर सहमति हो गई. तीनों मतलब मै, गिरिजा शरण जी और प्रेत.
इलेक्ट्रिक वायलेट एनर्जी के जिस कैप्सूल में प्रेत घिरा था, उसे मैने हटा दिया. और गिरिजा शरण जी से कहा कि वे प्रेत को अपने कमंडल में आने को कहें.
उनके कहने पर वह कमंडल में आ गया. मैने कमंडल को इलेक्ट्रिक वायलेस उर्जा के सुरक्षा कवच में डाल दिया. ताकि वह कहीं भाग न सके.
फिर हमने जगह बदली.
शिव गुरु और गुरुवर को प्रणाम करके मैने गिरिजाशरण जी को उर्जा सिखानी शुरू की. चक्रों की जानकारी देकर उनके जरिये पंचतत्वों की शक्तियों का उपयोग सिखाया. गिरिजा शरण जी का आभामंडल और उर्जा चक्र पहले ही जाग्रत थे. उनकी कुंडली भी जाग्रत थी. इससे बड़ी बात कि वे पंचतत्वों की उर्जा को देखने में सक्षम थे, इसलिए उनके चक्रों ने उनके निर्देशों को बहुत तेजी से ग्रहण करना शुरू कर दिया.
यहां मै आप सबको बताता चलूं कि अब ये कोई दुर्लभ विज्ञान नहीं है. गुरुवर ने लम्बे अनुसंधान के बाद इस विद्या को सरल करके फिर से जनमानस के बीच ला दिया है. आप में से जो लोग संजीवनी शक्ति उपचार सीख रहे हैं, उन्हें आने वाले कोर्स में जो मैने ऊपर किया वह सब सिखाया जाएगा. आप सब मन लगाकर सीखना.
उर्जा विज्ञान के मुताबिक ब्लैक मैजिक और भूत-प्रेत की सच्चाई क्या है? साइंस ने इस दिशा में अब तक क्या काम किये हैं?
आगे मै आपको इस बारे में बताउंगा.
क्रमशः
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
शिव गुरु को प्रणाम.
गुरुवर को नमन.

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