साधना रहस्य- 5

प्रेत से मुक्ति


राम राम मै शिवांशु
जो लोग संजीवनी उपचारक ग्रुप में संजीवनी शक्ति उपचार सीख रहे हैं वे इस वृतांत को ध्यान से पढ़ें. उन्हें आगे इसे सीखना और करना भी है.
दिन के 11 बजे थे. गंगा किनारे मै और गिरिजा शरण दास जी बैठे भगवान शिव के गुरु स्वरूप पर चर्चा कर रहे थे. पास में धूनी जल रही थी. पास के घाट पर गंगा नहाने आने वाले कई लोग गिरिजा शरण जी का साधु रूप देखकर पास आ जाते. उन्हें प्रणाम करते और चले जाते. उनमें से कुछ लोग प्रणाम करके उनके चरणोें में रुपए रख जाते थे. उन्हें देखकर मै मन में सोचता कि कमाल की संस्कृति है हमारी. जो लोग उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते वे भी इतनी श्रद्धा प्रकट कर रहे थे.
मगर उनके जाते ही गिरिजा शरण जी चिमटे से पकड़कर उनके दिए नोट व सिक्के धूनी की अग्नि में डालकर देते थे. मेरे द्वारा लाकर दिए चिमटे का ये प्रयोग मैने सोचा ही नहीं था.
मैने उनसे पूछा एेसा क्यों?
उर्जा नायक महराज ने धन को हाथ न लगाने का आदेश दिया है. तो यही करना होगा. उनका जवाब था.
तो आप लोगों को रुपये देने से मना भी कर सकते हैं. मैने कहा.
इससे उनकी भावनाएं आहत होंगी. गिरिजा शरण जी ने जवाब दिया था.
बातों के दौरान गिरिजा शरण जी ने गंगा किनारे जा रही 3 महिलाओं की तरफ इशारा करते हुए कहा मित्र बीच वाली महिला के शरीर में प्रेत है. क्या हम इसकी सहायता कर सकते हैं?
मैने उधर देखा. वह तकरीबन 30 साल की युवती थी. नाक नक्श से आकर्षक और भले परिवार की लग रही थी. उसके साथ 2 अन्य महिलाएं और एक पुरुष था. एक महिला की गोद में बच्चा था.
मैने कहा सहायता तो कर सकते हैं. मगर आप को कैसे पता चला कि उसके शरीर में प्रेत है.
मै आपको बताना भूल गया. गिरिजा शरण जी ने कहा अदृश्य होने की सिद्धी के बाद से मुझे कई तरह की अदृश्य शक्तियां दिखने लगी हैं. उनमें प्रेत भी हैं. मै उनसे बात भी कर लेता हूं. लेकिन मुझे लोगों को इनसे छुटकारा दिलाना नहीं आता. एेसे में लोगों की पीड़ा देखकर कई बार मन दुखी हो जाता है.
इनसे छुटकारा दिलाना मै आपको सिखा देता हूं. मैने कहा. पहले उस प्रेत को रोकना होगा वर्ना मेरी उर्जा के सम्पर्क में आते ही उसे पता चल जाएगा कि मै उसे खत्म कर सकता हूं. एेसे में वह कुछ देर के लिए महिला से हटकर दूर चला जाएगा. तब हमारी पहुंच से बाहर होगा.
मैने उस महिला का आभामंडल अपने पास बुलाये बिना दूर से ही उसके शरीर को 3 फुट चौड़े औरिक कैप्सूल में डाल दिया. जो लोग संजीवनी उपचार सीख रहे हैं. उन्हें आगे औरिक कैप्सूल और औरिक सुरक्षा कवच बनाना सिखाया जाएगा.
अब प्रेत कैप्सूल से बाहर नहीं निकल सकता था.
मैने उस महिला के साथ आये पुरुष को इशारे से पास बुलाया. पास आया तो गिरिजा शरण जी ने उससे कहा कि इस महिला के शरीर में प्रेत है. तुम इसके कौन हो?
वह व्यक्ति हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा सा पड़ा. बोला मै इसका पति हूं. इस बाधा से हमारा परिवार 6 सालों से जूझ रहा है. हमने अब तक लाखों रुपए खर्च कर दिये. मगर कोई भी पूजा पाठ या उपाय इस बाधा को हटा नहीं पाया. अब हम भगवान भोलेनाथ के भरोसे चल रहे हैं. बाबा आप मेरी पत्नी को इस बाधा से मुक्त करा दें. आप तो अंतर्यामी हैं.
गिरिजा शरण जी ने मेरी तरफ देखा. मैने जितिन से कहा अपनी पत्नी रितु को यहां ले आओ. यही नाम बताया था उसने, अपना और अपनी पत्नी का. जितिन रितु को लाने गया तो वह आने को तैयार नहीं हो रही थी. उसने जितिन को झटक दिया तो वह दूर जा गिरा. गिरिजा शरण जी ने बताया कि प्रेत उसे यहां आने से रोक रहा है.
बड़ी मुश्किल से जितिन उसे धूनी के पास ला पाया. पास आते ही उसकी आवाज बदल गई और वह महिला पुरुष की मिली जुली आवाज में मुझे गालियां देने लगी जैसे मै उसका जन्मजात दुश्मन हूं.
मै जानता था कि ये प्रेत की शरारत है. मैने उसे चेतावनी दी कि रितु को हमेशा हमेशा के लिये छोड़ दो, अन्यथा इलेक्ट्रिक वायलेट एनर्जी से तुम्हे जलाकर भस्म कर दिया जाएगा. वह गुर्राने लगा.
मै समझ गया युद्ध होकर रहेगा. सो मैने अपने मणिपुर चक्र से अग्नि तत्व का अस्त्र तैयार रखने का आग्रह किया. मणिपुर को निर्देश दिया कि बाहरी उर्जा का हमला होते ही आप हमलावर पर सिलसिलेवार दो दो अग्नि चक्रों का प्रहार शुरु कर दें. मेरे मणिपुर चक्र ने मुझे सहमति दे दी.
तभी गिरिजा शरण जी ने मुझे सावधान किया. मित्र सम्भलना वो हमला करने वाला है.
मै तैयार हूं. कह कर मैने अपना सुरक्षा कवच हटा दिया. सुरक्षा कवच के रहते प्रेत की उर्जाएं मुझ तक नहीं पहुंच सकती थीं. एेसे में गुस्से से वह रितु का हाल बेहाल कर देता. क्योंकि वह उसकी आसान शिकार थी.
अब मुझे अपने मनोबल से उसका मुकाबता करना था.
हमला हो गया. मेरे आभामंडल की बाहरी पर्तों पर एेसे टक्कर दी गई जैसे कोई तेज रफ्तार ट्रक टकराया हो. पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई. कुछ क्षणों के लिए गिरिजा शरण जी बहुत चिंतित नजर आये.
मेरे मणिपुर चक्र ने भी जवाबी हमला किया. वहां से दो अग्नि चक्र निकल कर अपने लक्ष्य की तरफ जा चुके थे. उन्होंने लक्ष्य भेदन कर दिया.
गिरिजाशण जी ने राहत की सांस ली. बताया कि प्रेत अंग भंग होकर छटपटा रहा है. अग्नि चक्रों ने उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचाया है. अब वह हमारी बातें मानने को तैयार है. उसने रितु का शरीर छोड़ दिया मगर मेरे द्वारा बनाये उर्जा पिंड (कैप्सूल) से बाहर नहीं जा पा रहा. तभी मेरे मणिपुर चक्र ने उस पर दोबारा हमला कर दिया. गिरिजा शरण जी ने बताया कि वह शरणागत है. अब उस पर और हमलों की जरुरत नहीं है मित्र.
ओह मै मणिपुर चक्र को हमले रोकने का आग्रह करना भूल गया. सो वह पूर्व के निर्देश का पालन करते हुए सिलसिलेवार हमले कर रहा था. मैने हमले समाप्त करने का आग्रह किया.
मन ही मन गुरुवर को धन्यवाद दिया, एेसी अमोघ उर्जा तकनीक बनाने के लिये. और शिव गुरु को धन्यवाद दिया गुरुवर को एेसे दिव्य ज्ञान से परिचित कराकर उर्जा नायक बनाने के लिये.

रितु सामान्य हो गई. मगर सहमी हुई थी.
ये संजीवनी उपचार की एक क्रिया थी. जो संजीवनी शक्ति उपचार सीख रहे सभी लोग आगे सीखेंगे.
आगे मै आपको बताऊंगा कि उस प्रेत का क्या हुआ और रितु के पास कहां से आया था.
आखिर क्या होती हैं भूत-प्रेत और काला जादू की उर्जायें. विज्ञान के इस चरम युग मे कैसे लोगों को बना लेती हैं अपना शिकार? ये आगे बताउंगा आपको. क्रमशः
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
शिव गुरु को प्रणाम
गुरुवर को नमन.

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