साधना रहस्य- 2

राम राम मै शिवांशु
आपमें से तमाम लोग भी मेरी ही तरह विस्मित हुये गिरिजाशरण जी की अदृश्य उपस्थिति की जानकारी से.
वे मेरे साथ गाड़ी में थे. मगर दिख नहीं रहे थे. मै उनसे बात करने में खुद को असहज महसूस कर रहा था. लग रहा था किसी बीमारी का शिकार हूं और खुद से बातें किये जा रहा हूं.
वे जल्दी ही मेरी दशा को भांप गए. बोले मेरे लिये कुछ कपड़े ला दीजिये.
मैने कपड़े की एक दुकान के पास गाड़ी रोकी. और उनके लिए दो धोती और ओढन खरीद ली. जब गाड़ी में पहुंचा तब तक वे वास्तविक रूप में आ चुके थे. मगर उनके शरीर पर कोई कपड़ा न था. मैने धोती दी तो उससे जल्दी जल्दी कमर के नीचे का भाग ढ़क लिया.

पास की दूसरी दुकान से मै गिरिजा शरण जी के लिए चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स व खाने की कुछ और चीजें लेता आया था. क्योंकि स्वामी जी के आश्रम में रहने के दौरान मैने देखा था कि उन्हें अच्छा खाने का बहुत शौक था. इसके लिए वे अक्सर देवी शरण दास जी की सिद्धी का उपयोग कराते थे. देवी शरण दास उनके गुरु भाई हैं. जिन्होंने अन्नपूर्णा सिद्धी की है. जिसके तहत देवी से मनचाहा भोजन प्राप्त किया जाता है. इसके बारे में भी मै आगे चर्चा करुंगा. अभी बात करते हैं गिरिजा शरण दास जी की.
मैने उन्हें खाने की चीजें दीं. तो उन्होंने लेने से मना कर दिया. बोले क्षमा करना मित्र अब मै इनका सेवन नहीं कर सकता.
मगर क्यों ? आपको तो स्वादिस्ट खाना बहुत पसंद है.
मैने उर्जा नायक महाराज को इसका वचन दिया है.
गुरुदेव ने आपसे एेसा वचन लिया? हैरानी से मै बुदाबुदाता हुआ सा पूछ रहा था. मुझे पूरी बात बताइये.
अदृश्य साधना पूरी होने पर मैने गुरु भगवान से गुरु दक्षिणा लेने को कहा.गिरिजा शरण जी ने बताना शुरू किया. गुरु भगवान ने कहा कि इसकी असली गुरु दक्षिणा का अधिकार एनर्जी नायक जी को है. उनके उर्जा विज्ञान का सहयोग न मिलता तो ये सम्भव न हो पाता. तुम उनके पास जाकर उन्हें गुरु दक्षिणा दो. ध्यान रखना वे जो मांगे उससे इंकार मत करना. इसी में तुम्हारा हित है. उनके मामले में वचन से कभी मत पलटना वर्ना सिद्धी अधोगति को चली जाएगी.
गुरु भगवान के आदेश पर मै कल उर्जा नायक महाराज से मिला. उनसे गुरु दक्षिणा स्वीकारने का आग्रह किया. उन्होंने मुझसे तीन चीजें मांगी. मैने दे दीं.
गुरुदेव ने मांगा? मै फिर चकित होने लगा. क्योंकि मुझे अच्छी तरह मालुम है कि वे भगवान शिव के अलावा किसी से कुछ नहीं मांगते. वे तो सिर्फ देने में ही जुटे रहते हैं. मैने गिरिजा शरण जी से पूछ दिया क्या मांगा गुरुदेव ने आपसे?
गिरिजा शरण जी ने जो जवाब दिया उससे मन बेचैन सा हो गया. उन्होंने बताया कि गुरुवर ने उनसे तीन वचन मांगे. पहला जीवन में कभी भी धन को किसी भी रूप में अपने हाथ से नहीं छुवेंगे. दूसरा आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे. तीसरा कभी स्वादिस्ट भोजन नहीं करेंगे.

एेसा क्यों किया होगा गुरुदेव ने? इस सवाल ने मुझे घेर लिया. मैने गिरिजा शरण जी की तरफ देखा और देखता ही रह गया. उनसे कहने के लिये मेरे पास कोई शब्द ही नहीं थे. बस मन उनके प्रति नतमस्तक हो गया.
मुझे पता है कि गुरुवर अकारण कुछ नहीं करते. उनके तीन वचनों के पीछे कोई बड़ा और लोकहितकारी रहस्य होगा. जिसे जानने को मन बेचैन हो उठा.
इस रहस्य से पर्दा गुरुवर ही उठा सकते थे.
मगर अगले 2 दिन मै उनसे बात नहीं कर सकता.
एक दिन पहले 22 सितम्बर को ही तो वे दिल्ली से लखनऊ आये थें. उस दिन मै लखनऊ में ही था. मैने उनसे कहा था कि एयरपोर्ट आकर आपको ले लेता हूं. मगर उन्होंने मना कर दिया कहा कि मै 2 दिन छुट्टी मनाउंगा. मै समझ गया कि वे 2 दिन किसी से नहीं मिलेंगे और न ही किसी से बात करेंगे. क्योंकि साल में एक आध बार जब वे खुद को छुट्टी पर घोषित करते हैं तो उन दिनों बस सोते ही रहते हैं. न किसी से मिलते हैं. और न किसी से बात करते हैं.
तो फिर गिरिजा शरण दास जी को वे कहां मिल गये ? मैने उनसे पूछा आप गुरुवर से किस समय और कहां मिले ?
मै उनके घर के पास रात में मिला. वे मुझसे मिलने खुद साइकिल चलाते हुए आये थे. मै बहुत खुश हूं कि मुझे लगभग 15 मिनट उनके साथ रहने का अवसर मिला.
साइकिल चलाते हुए आये थे ? मैने तो पिछले 18 सालों में उन्हें साइकिल चलाते कभी नहीं देखा. ये कैसी लीला है गुरुदेव की.
उनकी लीला वही जानें गिरुजा शरण जी ने कहा. उनका आदेश मिला कि मै आपको अपना मित्र बनाऊं. तो मै इधर चला आया. अब दो दिन यहीं रहुंगा. मेरे रहने की व्यवस्था कर दीजिये.
मै उन्हें शहरह से बाहर गंगा किनारे शमशान घाट पर ले गया. उसके पास बने एक छोटे से शिव मंदिर में उनके रहने की व्यवस्था कराई. क्योंकि शमशान ही उनकी पसंदीदा जगह है.
मै खुश था कि गुरुदेव ने गिरिजा शरण जी जैसे सिद्ध साधक को मेरा मित्र बनाया. लेकिन बेचैन भी था कि उन्होंने उन्हें इतने कठोर वचनों में क्यों बांध दिया? जवाब 2 दिन बाद ही मिलने वाला था.
क्या दिया गुरुवर ने मुझे इसका जवाब? और कैसे बिताये मैने अदृश्य की सिद्धी प्राप्त योगी के साथ शमशान में दो दिन ? ये मै आगे बताउंगा आपको.
तब तक की राम राम.
क्रमशः
सत्यम् शिवम् सुंदरम्.
शिव गुरु को प्रणाम.
गुरुवर को नमन.

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