टेली पैथी साधना का दूसरा चरण….3

राम राम मै शिवांशु

उन सिद्ध संत के इशारे पर मैने आंखें बंद की तो गुरुदेव के साथ साक्षात मीटिंग हो गई। गुरुवर ने एेसी टेलीपैथी की चर्चा मुझसे पहले कभी नहीं की थी. मै मन में सोच रहा था कितने रहस्य छिपा रखे हैं उन्होंने अपने भीतर.

पिछले 14 सालों में मैने उनसे कम से कम 14 हजार सवालों के जवाब लिये होंगे. मगर हर बार कुछ एेसा खुल कर सामने आ जाता है जिससे लगता है कि अब तक मै उन्हें बिल्कुल भी नहीं जान पाया. कई बार तो उनकी गहराई की थाह ले पाना नामुमकिन सा प्रतीत होने लगता है.

मनोविज्ञान में टेलीपैथी के जरिए लोगों के मन की बात जान लेना प्रमाणित है. मै उसी उम्मीद में टेलीपैथी साधना कर रहा था. लेकिन यहां तो नजारा ही कुछ और था. टेलीपैथी के जरिए मीटिंग? वह भी लाइव टेलीकास्ट की तरह! मै हैरान था.

उस समय कुटी में गुरुवर और सिद्ध संत थोड़ा उंचे आसन पर बैठे थे, मै नीचे बैठा था. लगा कि गुरुवर मेरी मनोदशा समझ गए. हमेशा की तरह मन मोह लेने वाली मुस्कान उनके चेहरे पर दिखी. मै समझ गया अब मेरी टांग खिचाई होने वाली है. वे कह रहे थे कभी कभी अपने दिमाग को आराम भी दे दिया करो. भगवान ने हमेशा चौकते रहने के लिए नहीं बनाया इसे.

सिद्ध संत भी उनकी चुटकी पर मुस्करा रहे थे. वे बोले शायद इन्हें मेरे परिचय की जरूरत है.

मेरे मुंह से निकला * जी*.

गुरुदेव ने संत का परिचय दिया ये स्वामी जी हैं. तुम्हारी उम्र से 5 गुना अधिक सालों से साधनायें कर रहे हैं.

जी! मै फिर चौंक पड़ा, मै तो 40 साल का हूं, तो क्या ये 200 साल?

बिल्कुल, गुरुवर मेरी बात काटकर कह रहे थे इन्होंने साधनाओं के बल पर अपनी उम्र रोक रखी है। अब मेरी बात ध्यान से सुनो. बाहर जो इनके शिष्य हैं वे ये नहीं जानते, उनकी नजरों में ये 70 साल के ही हैं. उनसे इस बात पर कोई चर्चा नहीं करनी. ये तुम्हें टेलीपैथी के उच्च आयामों से परिचित करायेंगे. बदले में तुम हीलिंग करके इनके तीन शिष्यों के उर्जा चक्रों का जागरण करोगे. क्योंकि उर्जा चक्र फंसे होने के कारण लम्बी साधनाओं के बाद भी उन्हें सिद्धियां नहीं मिल पा रहीं.

स्वामी जी तुम्हें उनसे मिलवायेंगे. उनकी कुण्डली और उर्जा चक्रों को स्कैन करके उनकी रिपोर्ट मुझे देना. तब मै तुम्हें बताउंगा कि उनकी एनर्जी सिद्धी प्राप्त करने लायक कैसे बनेगी. उसी तरह तुम उन्हें ठीक कर देना. और हां जब तक मै न चाहूं तब तक मुझसे सम्पर्क की कोशिश मत करना. बिना सवाल स्वामी जी में विश्वास करना तुम्हारी साधना का प्रमुख अंग है.

मीटिंग खत्म।

आंख खुली तो खुद को मैने हरी घास पर लेटा हुआ पाया. स्वामी जी पास ही में एक पौधे को पानी दे रहे थे. उनके चेहरे पर अर्थपूर्ण मुस्कान थी. गुरुदेव का आदेश था कि बिना सवाल स्वामी जी पर विश्वास करूं, वर्ना चेतना में लौटने के बाद मेरे दिमाग में इतने सवाल घूम रहे थे कि स्वामी जी को कम से कम एक घंटे उनका जवाब देना पड़ता. मै शांत रह गया.

मै अपने आप को फिर से स्पेशल समझने लगा था. कि मै साधुओं को सिद्धी प्राप्त करने में मदद करने वाला हूं. इससे पहले कि इस अहम से मै मन ही मन गदगद हो पाता, मुझे धरातल पर ला दिया गया. कुछ देर बाद एक साधू ने मेरे पास आकर बताया कि खाना बनाने के लिए मुझे लकड़ियां काटनी हैं. मै जान गया कि खुद को स्पेशल समझना मेरी गलतफहमी थी.

मुझे जलाने लायक लकड़ी काटने का कोई अनुभव नहीं. सो कुछ देर बाद मै लकड़ियों पर आड़ी तिरछी कुल्हाड़ी पटकता दिखा. कुछ साधु मेरी हरकत देखकर हंस रहे थे, कुछ को मुझ पर तरस आ रहा था. वहां कुल 14 साधु थे.

जल्दी ही एक साधु ने मुझसे कुल्हाड़ी ले ली. उसने मुझे जूंठे बर्तन धोने का काम दे दिया. मै गंगा किनारे बैठकर बर्तन धोने लगा. दोपहर के भंडारे में पुंगल (खिचड़ी) और आलू की सूखी सब्जी बनी थी. मुझसे कहा गया प्रसाद पाकर दोबारा सारे बर्तन धो देना. सच बताऊं तो मुझे बर्तन धोने भी नहीं आते. मैने अपने घर में राशन या रसोई से जुड़ा कभी कोई काम नहीं किया.

सबके खाने के बाद मैने दोबारा सारे बर्तन धोये. 2 घंटे लगे. गर्मी के मारे मेरा बुरा हाल हुआ जा रहा था. थोड़ी देर आराम करने को एक पेड़ के नीचे लेटा. तो एक साधु ने मेरे हाथ में झाड़ू पकड़ा दिया. और आश्रम की सफाई में अपने साथ लगाये रखा. अब तक मै भली भांति जान चुका था, कि यहां मै कितना स्पेशल हूं.

शाम को स्वामी जी ने अपनी कुटी में बुलवाया. वहां उनका एक शिष्य पहले ही से मौजूद था. स्वामी जी ने उसका परिचय देते हुए कहा कि ये शंकर शरण दास हैं. पिछले 12 सालों से कुण्डली जागरण की साधना कर रहे हैं. मैने बहुत कोशिश कर ली, इनकी कुण्डली जाग्रत नहीं हो पा रही. आप इनकी उर्जाओं का परीक्षण कर लें. मैने शंकर शरण दास के आभामंडल और उर्जा चक्रों को स्कैन करके उनकी स्थिति दर्ज कर ली.

उसके बाद स्वमी जी ने दूसरे शिष्य को बुलाया. जिनका नाम उमा शरण दास है. स्वामी जी ने बताया कि वे पिछले 42 साल से अदृष्य को देखने की साधना कर रहे हैं. सफलता नहीं मिल पा रही. मैने उनके आभामंडल और उर्जा चक्रों को स्कैन करके स्थिति दर्ज कर ली.

उसके बाद स्वामी जी ने तीसरे शिष्य को बुलवाया.

उनकी उम्र काफी कम थी. लेकिन औरा बहुत विशाल था. स्वमी जी ने उनका नाम गिरिजा शरण दास बताया। उनकी साधना की जानकारी सुनकर मै दंग रह गया. स्वामी जी के मुताबिक वे पिछले दो जन्मों से अदृश्य होने की साधना कर रहे थे. मगर उर्जा चक्रों में उलझाव के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही. मैने उनकी एनर्जी स्कैन करके दर्ज कर ली.

मेरी साधना की उम्र सिर्फ 10 साल है. तो क्या मै 12 साल से कुण्डली जागरण नहीं कर पा रहे साधक की कुण्डली जगा सकता हूं? क्या मै 42 साल से साधना कर रहे व्यक्ति को अदृश्य देखने की सिद्धी दिला सकता हूं? जबकि मेरे पास खुद एेसी कोई सिद्धी नहीं. क्या मै दो जन्मों से अदृश्य होने की साधना कर रहे विशाल आभामंडल वाले साधु की सिद्धी सुनिश्चित कर सकता हूं? जबकि मै इससाधना के बारे में कुछ नहीं जानता.

यदि हां तो कैसे? मै ही क्यों? क्या मै इनसे श्रेष्ठ हूं? आखिर मै हूं क्या ?

मैने तय कर लिया सम्पर्क होते ही मै गुरुवर से ये सारे सवाल पूछुंगा जरूर.

और मै गुरुदेव से सम्पर्क का इंतजार करने लगा.

…… क्रमशः

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