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टोटके और उर्जा विज्ञान- 6

कैसे पहचानें काम काज के बंधन को

राम राम मै शिवप्रिया.04_2928554_280x183-m.png

एनर्जी गुरु राकेश आचार्याजी ने टोने टोटकों पर 9 साल से अधिक रिसर्च की. उन्होंने पाया कि हजारों साल से दैनिक जीवन का हिस्सा बने टोने टोटके रूढ़िवादिता नहीं बल्कि हमारी एनर्जी को साफ व संतुलित करने का सटीक विज्ञान हैं. घरेलू होने के कारण इनका उपयोग सरल और खर्च न के बराबर होता है. यदि इन्हें तय मानकों के अनुसार अपनाया जाये तो नतीजे बहुत ही सकारात्क निकलते हैं.

गड़बड़ तब हुई जब ये विज्ञान के विषय से अंजान लोगों के हाथों में चले गये. उन्होंने टोटकों की विधियों में तोड़ मरोड़ करके उन्हें पाखंड की भेट चढ़ा दिया. और टोने टोटके बदनाम हो गये. हम वैज्ञानिक विवेचना के साथ लाभकारी टोटकों को ग्रुप में पेस कर रहे हैं. ताकि हमारे साथी उनका लाभ उठा सकें. ध्यान रखें टोटकों का उपयोग सिर्फ उर्जा शोधन के लिये करेंगे. ध्यान रखें कि करने की विधि में मिलावट न करें. तोड़ मरोड़ कर किये जाने वाले टोटके नुकसान भी करते हैं. ध्यान रखें टोटकों के उपाय करने के साथ अपने कामकाज पर फोकस बनाये रखें.  

सभी को शिवप्रिया का राम राम,
टोने टोटके का नाम सुनकर मन में तरह की फीलिंग पैदा होती हैं. नं एक ब्लैक मैजिक का डर. नं दो रूढ़िवादिता या पाखंड की आशंका. इसके बावजूद हमारे देश में टोने टोटकों का उपयोग डाक्टरों की दवा से अधिक होता है. यही नही इससे तमाम लोगों को फायदा भी होता है. ये फायदा सदियों से होता आ रहा है. जो विधा सदियों से जिंदा हों वे कोरी रूढ़िया नही हो सकतीं.
 
इस बारे में मैने गुरु जी से कारण पूछा तो उन्होंने इसके विज्ञान की जानकारी दी. दरअसल टोने टोटके हमारी उर्जाओं की सफाई का सरल और आसानी से उपलब्ध विज्ञान हैं. इधर लम्बे समय से इनका उपयोग तोड़ मरोड़ कर किया जा रहा है. जिसके कारण अब ये पाखंड या रूढ़ियां लगने लगे हैं.
पहले टोने टोटकों का उपयोग सिद्ध ओझा, तांत्रिक आदि ही करते थे. वे गुरु शिष्य परम्परा के तहत सालों तक इन्हें सीखते थे. इस कारण बिना बदलाव के टोने टोटकों का इश्तेमाल करते थे. जिनका 90 प्रतिशत से अधिक लाभ मिलता था.
अब एेसा नही है. जब से इनका इश्तेमाल पुजारियों, ज्योतिषियों या किताबों में पढ़कर उपयोग करने वाले लोगों ने शुरू किया तब से इस विज्ञान की दुर्दशा शुरू हो गई.
अब इनके प्रयोग के 90 प्रतिशत मामलों में वैसा लाभ नही मिलता जैसा मिलना चाहिये. क्योंकि ये लोग उपयोग से पहले उसका सिद्धहस्त अभ्यास नही करते। इस कारण उनको इसकी मर्यादायें भी नही पता. सो वे टोने टोटकों के उपयोग में अपनी सुविधा के लिये मिलावट करने से बाज नही आते.  

उदाहरण के लिये किसी के काम में बार बार रुकावटें आ रही हों. तो वो एक नीबू ले उसमें चार लौंग चुभो दे. फिर उसे दो घंटे अपने पास रखे. उसके बाद नीबू और लौंगों को बहते पानी में फेंक दे. नीबूं  में चक्रों के भीतर फंसी नकारात्मक उर्जाओं को अपने भीतर खींच लेने की प्राकृतिक क्षमता होती है. लौंग उन खराब उर्जाओं को छिन्न भिन्न करती है. बहता पानी उनके भीतर ले ली गई खराब उर्जाओं को दूर तक बहा ले जाता है. इस तरह से प्रयोग करने वाले व्यक्ति की उर्जाओं की सफाई हो जाती है. जिससे बाधायें हटती हैं.  
मान लीजिये इसी प्रयोग को कोई ज्योतिषी या पुजारी किसी महिला को उसके बेटे के लिये बताये. और वो महिला कहे कि बेटा ये सब नही मानता, क्या इसे मै कर सकती हूं. तो प्रायः पुजारी या ज्योतिषी टोटके के नियम को दर किनार करके तुरंत कह देते हैं कि हां, मां हो इसलिये कर सकती हो. लेकिन जब प्रयोग महिला करेगी तो एनर्जी उसकी साफ होगी न कि उसके बेटे की. इस तरह प्रयोग किये जाने के बाद भी बेटे की समस्या वैसी ही बनी रहेती है, जैसी पहले थी.

इसलिये टोटके अपनाते समय ध्यान रखें कि उनके नियमों का पूरी तरह पालन करें. ध्यान रखें किताबों में लिखे टोटकों के साथ उनके पूरे नियम नही लिखे होते हैं. अक्सर किताबों में अधूरे नियम ही लिखे होते हैं. क्योंकि पूरे नियम और सावधानी लिखे जाये तो एक टोटके को लिखने व समझाने में 20 पेज तक खर्च होंगे.
कई बार लोगों के काम काज की एनर्जी फंस जाती है. जिससे उन्हें लगातार  नुकसान हो रहा होता है. एनर्जी फंसने का एक मतलब ये भी होता है कि काम काज का बंधन कर दिया गया हो. अगर एेसा लगे तो निम्न टोटका करके जान लें कि बंधन है भी या नहीं.  
मंगलवार को 3 किलो पालक, सूर्यास्त से पहले, ला कर घर में किसी परात आदि में रख दें। बुधवार के दिन प्रातः, पालक किसी थैले में रख कर, घर से बाहर जा कर, किसी गाय को खिला दें। यदि गाय पालक सूंघ कर छोड़ दे, या थोड़ा खा कर छोड़ दे, तो समझें कि बंधन दोष है।

एेसे बंधन से मुक्त होने के टोटके का विज्ञान मै अगले अंक में बताउंगी.

हर हर महादेव

शिव गुरु को प्रणाम

गुरुदेव को प्रणाम