सूर्य ग्रहण, 21 अगस्त 2017

दुनिया हिलाने वाले फैसलों का खतरा, मगर आप इसका फायदा उठा सकते हैं

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सभी अपनों को राम राम
इस ग्रहण के प्रभाव से कुछ एेसे फैसले लिये जाएंगे, जिससे पूरी दुनिया हिल जाये.
मगर आप ग्रहण का फायदा उठाकर सम्मोहन सिद्धी कर सकते हैं. जिससे प्रतिष्ठा और समृद्धी में भी बृद्धि होगी.
साल 2017 का दूसरा सूर्य ग्रहण 21 अगस्त को लग रहा है। यह ग्रहण प्रशांत महासागर, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्से, यूरोप के पश्चिमी-उत्तरी हिस्से, पूर्वी एशिया, उत्तर पश्चिमी अफ्रीका आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारतीय समय के मुताबिक सोमवार को रात में 9.15 बजे से सूर्य ग्रहण शुरु होगा और 22 अगस्त सुबह 2.34 बजे खत्म होगा। 11.51 मिनट पर इसका मध्यकाल होगा। मध्यकाल से 12 घंटे पहले सूतक लग जाते हैं।
21 अगस्त को दिन में करीब 12 बजे से सूतक लग जाएंगे।
ब्रह्मांड के सापेक्ष सीमित दायरे में काम करने वाले वैज्ञानिक ग्रहण किसी को प्रभावित न करने वाली सामान्य घटना बताते हैं. मगर सच्चाई यही है कि ये बहुत खास घटना होती है. प्रकृति और जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है. जिस तरह भूकम्प की आहट से तमाम जीवों में पहले ही हलचल मच जाती है. उसी तरह ग्रहण का अहसास भी कई जीवों में बेचैनी पैदा करता है. इंशानी मन पर भी हर तरह के ग्रहण का गहरा असर पड़ता है. ये अलग बात है कि उसका प्रभाव कुछ घंटों या कुछ दिनों के बाद नजर आये. 
मन की तरंगों को पढ़ पाने में अब तक नाकाम आधुनिक विज्ञान एेसे प्रभावों को इत्तिफाक कहता है. मगर अध्यात्म इसके प्रति सतर्क है और इसके अचूक समाधान देता है.
सूर्य ग्रहण कहीं भी हो लोगों के मणिपुर चक्र पर उसका सीधा असर पड़ता ही है. मणिपुर चक्र भावनाओं का केन्द्र है. उसके विगड़ने से भावनायें बिगड़ती हैं. बिगड़ी भावनायें व्यक्ति और समाज के लिये परेशानियों का कारण बनती हैं.
भावनायें बिगड़ने पर कई बार समझदार लोग भी ईगो या इमोशन में गलत फैसले ले ले बैठते हैं.
इस बार के सूर्य ग्रहण का ब्रह्मांड की पीली उर्जाओं पर बहुत अधिक विपरीत प्रभाव पड़ने वाला है. जिसके कारण कालांतर में विश्व स्तर पर कुछ एेसे फैसले लिये जाएंगे, जिससे पूरी दुनिया हिल जाये.
खासतौर से अमेरिका के सत्ताधारियों पर ग्रहण का काफी असर होगा. जिसके कारण भय या ईगो या भावुकता में लिये गये उनके फैसले दुनिया को प्रभावित करेंगे. भय, ईगो, भावुकता, मनमानी, अनियंत्रण आदि बिगड़े मणिपुर चक्र के गुण हैं.
ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि जहां ग्रहण नही दिखता वहां उसका दुष्प्रभाव नही पड़ता.
ग्रहण के समय भारत में रात होगी। इसलिये भारत में ये सूर्य ग्रहण नही दिखेगा.
उर्जा विज्ञान के मुताबिक इसके बावजूद यहां के लोगों पर भी ग्रहण का असर जरूर पड़ेगा. निकट भविष्य में लोग आर्थिक दबाव और बिना गलती की सजा का सामना करते नजर आएंगे. 
मगर डरे बिल्कुल नही. ग्रहण के दौरान रात 11 से 1 बजे के बीच एक मंत्र की साधना करके न सिर्फ ग्रहण की नकारात्मक उर्जाओं से बच सकेंगे बल्कि साकारात्मकता भी प्राप्त कर लेंगे. जिससे प्रतिष्ठा और समृद्धि में बढ़ोत्तरी होगी. साथ ही व्यक्तित्व में सम्मोहन पैदा होगा. ग्रहण के दौरान अंतरीक्ष में वायवीय गुरुत्वाकर्षण कमजोर होता है. इस कारण उस वक्त मंत्रों की तरंगे अपेक्षाकृत कई गुना अधिक दूरी तय कर लेती हैं. जिससे मंत्र सिद्धी आसान हो जाती है. इसे महिला, पुरुष, बच्चे सभी कर सकते हैं. 
*मंत्र….*
ऊं. ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
*जप का समय….*
कम से कम 2 घंटे. रात 11 से 1 के बीच.
जो उच्च साधक हैं, वे पूरे ग्रहण के दौरान ( रात 9 से 3 बजे तक) मंत्र जाप करके सम्मोहन सिद्धी पा सकते हैं. 
*साधना की विधि….*
किसी साफ आसन पर पूर्व मुख होकर बैठें. आंखें बंद करके जप करें. जाप के दौरान मंत्रों की गिनती नही करनी है, इसलिये माला का उपयोग न करें.
साधना के लिये 2 किलो गेहूं का आटा, एक नया लाल कपड़ा, 27 रुपये के सिक्के, 200 ग्राम गुड़, ताबें का एक सिक्का इकट्ठा कर लें. जप के दौरान ये सामान अपने दाहिनी तरफ रखें. जप के बाद सामान उठाकर कहीं सुरक्षित रख दें. दूसरे दिन उसमें से तांबे का सिक्का निकाल कर बाकी सामान दान कर दें. तांबे का सिक्का हमेशा अपने पास रखें. 
आपका जीवन सुखी हो, यही हमारी कामना है.
हर हर महादेव.     

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