नीलमणि अपना पालतू प्रेत लेकर साधना करने पहुंच गए

​17 अगस्त 2016

गुरु जी की हिमालय साधना…9

राम राम, मै शिवप्रिया

गुरु जी पिछले दिनों अपनी गहन साधना के लिये देव भूमि हिमालय की शिव स्थली केदार घाटी में रहे। 12 अगस्त को साधना पूरी करके हरिद्वार लौटे। लंबे समय बाद हरिद्वार में हम उनसे मिले। 13 को दिल्ली आश्रम से उच्च साधकों का एक दल हिमालयन साधना के लिये हरिद्वार गया। मै भी उनमें थी। वहीं गुरु जी से मिलना हुआ। मृत्युंजय योग से जुड़े साधक प्रेरणा ले सकें। इसके लिये मैंने गुरु जी से उनका साधना वृतांत विस्तार से बताने का अनुरोध किया। यहां मै उन्हीं के शब्दों में उनका साधना वृतांत लिख रही हूँ। 
|| गुरु जी ने बताया…||

4 अगस्त को मै केदार घाटी के लिये निकल पड़ा। तब तक मेरे साथ हिमालय साधना करने आ रहे mp के अध्यात्मिक सहयोगी नीलमणि नही आ पाये। वे मुझे सीधे गुप्त काशी में मिले। नीलमणि पहले इंजीनियर थे। वे  mp के टीकमगढ़ क्षेत्र के रहने वाले हैं। प्रेत सिद्धी सहित उन्होंने कई सिद्धियां की हैं। उनमें से कुछ के लिये मुझसे सहयोग लिया। 

मगर मेरे साथ साधना करने का अवसर अभी तक नही आया था। इसके लिये उन्होंने कई बार मुझसे आग्रह किया। इस बार हिमालय साधना में वे मेरे साथ बैठकर साधना करना चाहते थे। मैंने उन्हें सहमति दे दी। इसीलिए mp से केदार घाटी पहुंचे।

नीलमणि रात लगभग साढ़े नौ  बजे मेरे पास आये। 

पहाड़ों की जिंदगी रात में जल्दी सो जाती है। अधिकांश लोग रात 8 बजते बजते घरों को लौट जाते हैं। क्योंकि पहाड़ों और जंगलों में दिन के उजाले में ही चला जा सकता है। साँझ ढलते ही हर तरफ जंगली जानवरों का खतरा मंडराने लगता है। 

नीलमणि मेरे पास पहुंचे तब तक हर तरफ सन्नाटा छा चुका था। गुप्त काशी की मार्केट कभी की बंद हो गयी थी। मेरा लॉज भी बंद हो गया। लॉज मालिक को पता ही नही था कि मै बाहर हूँ। लौटने पर कॉल करके गेट खुलवाना पड़ा। मगर मै नीलमणि को अपने साथ नही रख सका। क्योंकि मै लॉज मालिक को किसी तरह के खतरे में नहीं डालना चाहता था। जो परिवार के साथ लॉज के ऊपरी तल पर रहते हैं।

दरअसल नीलमणि के साथ उनका सिद्ध किया एक प्रेत भी था। पता नही क्यों नीलमणि को प्रेतों से बड़ा लगाव हैं। पहले भी मै उनके दो ‘पालतू’ प्रेतों को आजाद करा चुका हूँ। अबकी मिले तो फिर प्रेत की ऊर्जा उनके साथ थी। वे जानते थे छिपा नही पाएंगे। इसलिये मिलते ही मुझे उसके बारे में बता दिया। लगभग साल भर पहले उसे सिद्ध करके अपना साथी बनाया। तब से साथ रखे थे। उन्होंने प्रेत का नाम जेम्स रखा था। जेम्स उनके लिये तमाम काम करता था। 

नीलमणि के मुताबिक जेम्स ज़रा भी उद्दंद नही है। वो अपनी मर्जी से कुछ नही करता। जितना वे कहते हैं उतना ही करता है। वो किसी को परेशान नही करता। उन्हें साधनाओं में सहयोग करता है। वो उनके साथ बहुत खुश रहता है।

नीलमणि को डर था कि पहले की तरफ मै उनके प्रेत को आजाद न करा दूँ। इसलिये वे उसकी तारीफ किये जा रहे थे। 

ये समझकर मै मुस्कराया। और कहा फिर भी किसी को बंधक बनाकर रखना ठीक नहीं। 

नही नही मैंने इसे बंधक की तरह नही बल्कि दोस्त की तरह रखा है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कई बार मैंने इससे जाने के लिए कहा मगर ये जाना ही नही चाहता। कहता है हमेशा मेरे साथ ही रहेगा। मुझे साधनाएं करते देखना इसे बहुत अच्छा लगता है। 

नीलमणि की सफाई सुनकर मै मुस्करा पड़ा। मन ही मन जेम्स से कहा अपनी आजादी के लिये समय का इंतजार करो। जेम्स ने मेरे मन की बात पढ़ ली और नीलमणि को बता दी। या तो वो  वाकई नीलमणि का वफादार था या उसे आजादी के स्वाद की जानकारी नही थी। जेम्स से मेरे मन की बात जानकर नीलमणि कुछ परेशान नजर आने लगे। ऐसी दशा में वे मेरे साथ साधना में बेचैनी का शिकार हो जाते। इसलिये मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि फिलहाल मै जेम्स के साथ कोई छेड़छाड़ नही करने जा रहा। मेरी बात सुनकर वे निश्चिन्त हो पाये। 

जो लोग अध्यात्म में नए हैं उनके लिये प्रेत को साथ रखने का विषय नया और रहस्यमयी हो सकता है। प्रेत वास्तव में होते क्या हैं? उनका वैज्ञानिक अस्तित्व क्या है? उनकी सिद्धी क्यों और कैसे की जाती है? सिद्ध होने के बाद प्रेत साधक के साथ कैसे पेश आते हैं? उनके साथ कैसे रहते हैं? सिद्धों द्वारा बोलचाल की भाषा में सिद्ध किये गए प्रेत को पालतू क्यों बोला जाता है? ये वे सवाल हैं जिनके जवाब पाने के लिये मैंने लम्बा इंतजार किया था। समय आने पर इसकी जानकारी दूंगा। 

अभी तो आगे की साधना में जेम्स हमारे साथ रहने वाला था। इससे पहले मैंने किसी साधना में अपने किसी साथी को पालतू प्रेत रखने की इजाजत नही दी थी। क्योंकि उनसे छोटे बच्चों की तरह नादानी करके साधना में डिस्टर्बेंस पैदा करने की आशंका रहती है। 

जेम्स की आदतों से परिचित न होने के कारण मैंने नीलमणि को साथ नही रखा। उन्हें दूसरे होटल में कमरा दिलाया। हलांकि नीलमणि होटल में कमरा लेकर नही रहना चाहते थे। उनका कहना था कि जेम्स उनके रहने का कोई अच्छा इंतजाम कर लेगा। बारिश लगातार हो रही थी। इसलिये मैंने उन्हें होटल में ही रुकने को कहा। वे वहीँ रुक गए।

मै अपने लॉज में लौट आया।

क्रमशः…।
… अब मै शिवप्रिया। 

आपके लिये गुरु जी द्वारा बताया आगे का वृतांत जल्दी ही लिखुंगी।

तब तक की राम राम।

शिव गुरु जी को प्रणाम।

गुरु जी को प्रणाम।

2 responses

  1. राम राम
    प्रेत के बारे मे बहुत ही दिव्य जानकारी | प्रेतो से काम लिया जा सकता है यह बिलकुल नया है | शिव प्रिया जी धन्यवाद | गुरूजी प्रणाम ! प्रेत के बारे मे पूरी जानाकारी के लिए हमे इतंजार रहैगा |

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  2. Laxmi Marian garg | Reply

    I want join shivsadhak.com so please can I and how

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