कुंडली साधक अपना पारद शिवलिंग साथ लायें

2 जुलाई 2016chakras
आपकी कुण्डली आरोहण साधना- 5
प्रणाम मै शिवांशु,
साधकों की तरफ से आ रहे सवालों को देखते हुए जरूरी लग रहा है कि कुंडली महासाधना शिविर में आने को तैयार साधकों के लिये कुछ खास बातों पर चर्चा कर ली जाये. इस बीच आपकी कुंडली जगाने के लिये गुरुदेव की गहन साधनाओं का सिलसिला जारी रहेगा.
1- रजिस्ट्रेशन क्लोज। 19 जुलाई के कुंडली महासाधना के शिविर के रजिस्ट्रेशन बंद हो चुके हैं. उस दिन साधना में 350 साधकों के स्थान सुरक्षित हैं. जबकि रजिस्ट्रेशन का आवेदन 950 से अधिक लोगों ने किया है. जिनमें 206 लोगों की ही उर्जा तुरंत कुंडली जागरण के अनुकूल मिली है. गुरुदेव ने उनकी उर्जा का परीक्षण भेजे गये फोटो के आधार पर किया. मगर उनमें से 102 लोग ही त्वरित कुंडली जागरण के शक्तिपात को ग्रहण कर सकेंगे. क्योंकि पर्याप्त सामग्री उपलब्ध न होने के कारण 102 कुंडली यंत्रों का ही निर्माण हो पा रहा है.
बताता चलूं कि कुंडली यंत्र के निर्माण में बिल्ली की झेर की जरूरत होती है. जो मुश्किल से मिल पाती है. इस बार हम जरूरत से काफी कम हाशिल कर पाये. इसलिये 102 यंत्रों का ही निर्माण हो पा रहा है. वे उन साधकों के लिये तैयार किये जा रहे हैं. जिन्होंने पहले रजिस्ट्रेशन कराया.
जिनके यंत्र तैयार हो रहे हैं. उन्हें मैसेज भेजे जा चुके हैं. शिविर में प्रवेश का डिजिटल पास भी उसी मैसेज के साथ है. उसे दिखाकर ही साधना स्थल में प्रवेश मिल सकेगा. जिन्हें अब तक एस.एम.एस. नही मिला है, वे इस शिविर में शामिल नही किये जा रहे हैं. जिनके पास कुंडली यंत्र होगा उन्हें देवदोष, पितृदोष, तंत्र बाधा और ग्रहों की दूषित उर्जाओं से मुक्ति के लिये पारद शिवलिंग या संजीवनी उपचारक रुद्राक्ष की जरूरत नही होगी.
 
2. आने वाले अन्य साधकों की उर्जा को अगले कुंडली महासाधना शिविर के लिये तैयार किया जाएगा. जो 19 सितम्बर को गुरुदेव के जन्मोत्सव के उपलक्ष में मनाये जाने वाले संजीवनी उपचारक दिवस के अवसर पर होगा. इसके लिये गुरुदेव ने 56 साधकों को चिन्हित किया है. 19 जुलाई के शिविर में उनकी उर्जाओं को देवदोष, पितृदोष, तंत्र बाधा और ग्रहों की दूषित उर्जाओं से मुक्त किया जाएगा. फिर उन्हें आगामी शिविर में सीधा प्रवेश दिया जाएगा.
इनकी उर्जाओं को कुंडली जागरण के योग्य बनाने के लिये गुरुदेव पारद शिवलिंग सिद्ध कर रहे हैं. जो उन्हें हमारे संस्थान की तरफ से निःशुल्क दिये जाएंगे. साथ ही उन्हें संजीवनी उपचारक रुद्राक्ष भी दिया जाएगा. ताकि अगले शिविर तक वे अपना संजीवनी उपचार करके अपनी उर्जाओं को कुंडली जागरण के योग्य बनाये रखें. इन साधकों को भी प्रवेश हेतु एस.एम.एस के द्वारा डिजिटल पास भेजे जा चुके हैं.
 
3. शिविर की अन्य साधक सीटों के लिये पहले आओ पहले पाओ के आधार पर चयन किया जा रहा है. क्रमबद्ध तरीके से जिनका रजिस्ट्रेशन पहले हुआ है उनका चयन होगा. चयन होते ही उन्हें भी डिजिटल पास भेज दिये जाएंगे. मगर इन लोगोौं को यंत्र नही मिल सकेगा. देवदोष, पितृदोष, तंत्र बाधा और ग्रहों की दूषित उर्जाओं से मुक्त होने के लिये यदि वे पारद शिवलिंग और संजीवनी उपचारक रुद्राक्ष प्राप्त करना चाहेंगे. तो उन्हें उस पर आने वाले सिद्ध अनुष्ठान का खर्च शेयर ( दान) करना होगा. जो प्रति साधक 2100 आ रहा है.
जिन साधकों के पास कम से कम 100 ग्राम का शुद्ध व सिद्ध किया हुआ पारद शिवलिंग है वे उसे अपने साथ ला सकते हैं. उन्हें दूसरा पारद शिवलिंग लेने की जरूरत नही होगी. वे चाहें तो संजीवनी उपचारक रुद्राक्ष अलग से ले सकते हैं. जिसे सिद्ध करके उपचारक की क्षमता हेतु तैयार करने पर तकरीबन 1100 का खर्च आता है. जो लोग रुद्राक्ष सिद्धी में सक्षम में वे अपने लिये खुद ही संजीवनी रुद्राक्ष तैयार कर सकते हैं. जो उनकी बात माने और उनकी इच्छानुसार लोगों की समस्यायें समाप्त करने की संजीवनी में सक्षम हो.
 
4. इस बार 19 जुलाई को कुंडली महासाधना शिविर का आयोजन गुरुपूर्णिमा के अवसर पर हो रहा है. शिवगुरु को समर्पित शिविर पर गुरुदेव साधकों को उपहार स्वरूप कुंडली जागरण शक्तिपात तो करेंगे ही. साथ ही उन्होंने अपने खर्च पर साधकों को पीताम्बरी, मृत्युंजय योग पत्रिका ( कुंडली जागरण विशेषांक ), गुरु गीता वितरण कराना सुनिश्चित किया है. साधकों के भोजन और 2 बार जलपान की व्यवस्था भी गुरुदेव अपने खर्च पर ही कराएंगे. उसके लिये साधकों को कोई शुल्क नही देना होगा.
 
5. जिन साधकों को 19 जुलाई के शिविर में हिस्सा नही मिल पाया है. उनका रजिस्ट्रेशन 19 सितम्बर के शिविर के लिये किया जा रहा है. इसके लिये जल्दी ही उन्हें मैसेज भेजा जाएगा. वे अपनी सुविधानुसार 20 नवम्बर (दिल्ली, कुल साधक सिटिंग 350) या 23 जनवरी 17 (मुम्बई, कुल साधक सिटिंग 400) या 19 मार्च 17 (लखनऊ, कुल साधक सिटिंग 350) के कुंडली महासाधना शिविर में आने का आग्रह कर सकते हैं.
 
6. सभी साधकों को शक्तिपात की उर्जाओं का भरपूर लाभ मिल सके. इसलिये गुरुदेव ने कुंडली महासाधना शिविरों में अधिक प्रवेश न दिये जाने के निर्देश दिये हैं. इसी कारण हम साधना शिविर में अधिक लोगों को स्थान नही दे पा रहे हैं. प्रत्येक शिविर के बीच गुरुदेव 1 माह की गहन साधना करके प्रभावी शक्तिपात की उर्जायें प्राप्त करते हैं. इसी कारण उनके द्वारा किये गये सामूहिक शक्तिपात बहुत प्रभावशाली होते हैं. 19 जुलाई के लिये गुरुवर ने 15 मई से 15 जून तक गहन साधना की. 19 सितम्बर के लिये 14 अगस्त से 15 सितम्बर तक गहन साधना करेंगे. 20 नवम्बर के लिये वे 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक गहन साधना करेंगे. 23 जनवरी के लिये वे 13 दिसम्बर से 14 जनवरी तक गहन साधना करेंगे. 19 मार्च के कुंडली महासाधना शिविर में शक्तिपात के लिये गुरुवर 14 फरवरी से 15 मार्त तक गहन साधना करेंगे.
 
सभी जानते हैं कि सामूहिक शक्तिपात के लिये विशाल उर्जाओं की जरूरत होती है. जिन्हें गुरुदेव गहन साधनाओं के द्वारा अर्जित करते हैं. ताकि साधकों को अपनी कुंडली शक्ति का उपयोग करने लायक सक्षम बना सकें.
तो गुरुदेव आपकी साधनाओं की सफलता के लिये खुद को तैयार कर रहे हैं. आप भी तैयार हो जाइये. कुछ बड़ा करने के लिये, कुछ प्रभावशाली करने के लिये, खुद को सर्वमान्य प्रमाणित करने के लिये.
…. क्रमशः ।
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
शिव गुरु को प्रणाम
गुरुवर को नमन.

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