यक्षिणी साधनाः धन, यौवन, प्रतिष्ठा की देवी को जीवन में उतारने की सिद्धि

yakshini1आभामण्डल को यक्षिणी के आभामण्डल से कनेक्ट करके साधना करने वालों की यक्षिणी सिद्धि आसान हो जाती है।
धन ,यौवन,प्रतिष्ठा देने में सक्षम यक्षिणी को साधक प्रेमिका, पत्नी,  बहन या मां के रूप में अपनाते हैं।
उच्च साधक इन्हें अपनी अध्यात्मिक सहायक बनाते हैं।
ब्रह्मांड के तमाम दैवीय रहस्यों से परिचित यक्षिणी साधक को अलौकिक शक्तियों और ज्ञान का मालिक बना देती है। साथ ही धन, यौवन, प्रतिष्ठा का स्वामी बनाती है।
महान विद्वान कालीदास इसके प्रबल उदाहरण रहे हैं।
एनर्जी गुरु जी राकेश आचार्या जी ने भी यक्षिणी को अध्यात्मिक मित्र के रूप में अपनाने की सलाह दी है।
इस रूप में सिद्ध यक्षिणी भौतिक सुखों के साथ ही दैवीय लोक की रहस्यमयी जानकारियां देकर उच्च सिद्धियों के सफर में सहयोग करती है। इस रूप में यक्षिणी को पुरुषों के अतिरिक्त उच्च महिला साधक भी सिद्ध कर सकती हैं।

यक्षिणी साधना: अपना साधना स्तर तय कर लें।
इस बार हम धैर्य और लगन के साथ यक्षिणी साधना के वास्तविक स्वरूप को अपनाएंगे।
इन्हें जान लें और बताएं कि किस स्तर की साधना करना चाहते हैं।
1. जीवन उत्थान के लिये साधना।
यह सबसे सरल और ज्यादातर साधकों द्वारा अपनाया जाने वाला विधान है।
इसमें देवी का साक्षात्कार नही होता। किंतु वे साधक के जीवन में आकर सुख, समृद्धि, प्रतिष्ठा और आत्म उन्नति प्रदान करती हैं।
इस स्वरूप में प्रायः 3 से 9 दिन के बीच की साधना सम्पन्न की जाती है।

2. साक्षात्कार अर्थात प्रगटीकरण की साधना।
यह सरल बिल्कुल नही होती। इसे उच्च साधना क्षमता वाले साधक ही कर सकते हैं।
इस साधना से प्रशन्न देवी साधक के समक्ष आ जाती हैं।
उन्हें मान, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, समृद्धि, यौवन, शक्ति और संपदा देती हैं।
यह प्रायः 1 माह से 6 माह के बीच चलती है।
इसमें मानसिक और शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य होता है। इसे विशेष समय और स्थान के अनुसार करना होता है।

3. देवी को आजीवन साथ रखने की साधना।
इसमें देवी सिद्ध होकर मां, प्रेमिका या बहन के रूप में साधक के साथ रहती रहती हैं।
उन्हें सबके बारे में ज्ञात अज्ञात की जानकारी देती हैं।
साधक को राजाओं की तरह राज कराती हैं।
यह दूसरे स्तर की साधना से भी कठिन है।
किंतु सक्षम साधकों की रुचि इसे करने में अधिक रहती हैं।
इस स्तर की साधना 1 माह से 1 साल तक चलती है। साधना की अवधि साधक की क्षमता और देवी के साथ कनेक्टिविटी पर निर्भर होती है।आप इनमें से जिस स्तर की साधना करने के इच्छुक हैं। उसे बताएं। उसी के मुताबिक आपको साधना विधान भेजा जाएगा।

साधना की तिथिः 2 april 2021 से आरम्भ
साधना की अवधिः 7 दिन
साधना स्थलः गुरूजी के साथ हरिद्वार में। या साधक इसे अपने घर से भी कर सकते हैं।
साधना की सामग्रीः कोई नही। क्योंकि गुरूजी साधकों की उर्जाओं को यक्षिणी उर्जाओं से सीधे कनेक्ट करने का विधान अपनाएंगे।
साधना का यंत्रः कोई नही। क्योंकि गुरूजी साधक की उर्जाओं को यक्षिणी उर्जाओं से सीधे कनेक्ट करने का विधान अपनाएंगे।
साधना का विधानः रजिस्ट्रेशन के बाद
रजिस्ट्रेशन की तिथिः आरम्भ
Registration link…

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