अबकी नवरात्र सिद्धिदायी योगों की सौगातः राज सुख साधना करें

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राज-सुख का मतलब है जहां जिस स्थिति में हैं वहां का सर्वोच्च सुख प्राप्त होना. लोगों के बीच साधक की मान्यता बढ़ना. लोगों के मन में साधक के प्रति मान-सम्मान की स्थापना होना. क्षमताओं का क्रेडिट मिलना. लोगों के बीच प्रसिद्धि बढ़ना. एेसे अवसर और सफलता मिलना जिससे साधक की चमक हजारों लाखों में एक सितारे की तरह फैल जाये.
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राज-सुख साधना की तिथियां

  • पहला दिन: 02 अप्रैल 2021, मां शैलपुत्री को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • दूसरा दिन: 03 अप्रैल 2021, मां ब्रह्मचारिणी को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • तीसरा दिन: 04 अप्रैल 2021, मां चंद्रघंटा को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • चौथा दिन: 05 अप्रैल 2021, मां कूष्मांडा को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • पांचवां दिन: 06 अप्रैल 2021, मां स्कंदमाता को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • छठा दिन: 07 अप्रैल 2021, मां कात्यायनी को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • सातवां दिन: 08 अप्रैल 2021, मां कालरात्रि को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • आठवां दिन: 09 अप्रैल 2021, मां महागौरी को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • नौवां दिन: 10 अप्रैल 2021, मां सिद्धिदात्री को प्रणाम करके साधना शुरू करें.
  • दसवां दिन: 11 अप्रैल 2021, व्रत पारण/समापन अनुष्ठान और शक्ति केंद्रों में दैवीय ऊर्जा स्थापना
राज सुख साधना विधान-
अबकी चैत्र नवरात्र में विशेष योगों के कारण गुरुजी राज-सुख साधना सम्पन्न कराएंगे। साधना का अधिकांश हिस्सा साधक आनलाइन घर से ही सम्पन्न करेंगे। समापन पर गुरु जी हरिद्वार में उनकी साधना ऊर्जाओं की स्थापना कुंडलिनी पर करेंगे। जिससे राज सुख की प्राप्ति का विधान वर्णित है। साधना नि-शुल्क होगी. किंतु आने वाले साधक अपना रजिस्ट्रेशन जरूर करा लें.
इस नवरात्रि में बन रहे हैं बार बार शुभ योग- अबकी साल चैत्र नवरात्री शनिवार से शुरू हो रही है तो माता घोड़े पर सवार होकर आएंगी। घोड़े के वाहन को शुभ माना जाता है।
इसके साथ ही
इस बार की चैत्र नवरात्र में शुभ योगों की श्रृंखला बनी है। एेसा कभी कभी ही होता है। इन योगों का लाभ उठाकर जीवन में राज सुख स्थापित करने के लिए ही गुरूजी ने इस बार राज सुख साधना सम्पन्न कराने का निर्णय लिया है। शास्त्र बताते हैं कि इन शुभ योगों में हुई साधनायें अचूक होती हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग को बेहद शुभ माना गया है. इस साल नवरात्रि के 9 दिनों में से 6 दिन यह शुभ योग बन रहा है. नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि के अलावा 3, 5, 6, 9 और 10 अप्रैल को भी सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. ऐसा माना जाता है कि ये योग भक्तों के सभी काम बनाने वाला योग माना जाता है. वहीं, इस योग में व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

अमृतसिद्धि योग- 2 अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्रि के पहले दिन अमृत सिद्धि योग लग रहा है. इस योग में सभी प्रकार के कार्य को शुभ माना जाता है. इस योग को अमृत फल देने वाला माना जाता है. बता दें कि नवरात्रि शनिवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में शुरू हो रहे हैं, जिसके कारण इसे अमृत सिद्धि योग कहा जाता है.

रवि पुष्य योग- रवि पुष्य योग रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र होने से लगता है. इस योग को भी काफी शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस योग में ग्रह प्रवेश, ग्रह शांति, शिक्षा, संबंधी मामलों के लिए अच्छा माना जाता है. कोई भी नया बिजनेस शुरू करने के लिए ये समय उत्तम है. नवरात्रि में ये योग 10 अप्रैल को बन रहा है. इन दिन नवरात्रि की नवमी तिथि है. इसलिए इस दिन मां दुर्गा की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

कलश स्थापनाः 
राज सुख साधना के लिये कलश स्थापना करें। जिनके पास कुम्भ कलश है उन्हें अलग से कलश स्थापना की आवश्यकता नहीं। उसी के समक्ष बैठकर साधना सम्पन्न करें। जिनके पास कुम्भ कलश नही है वे निम्न प्रकार घर में या प्रतिष्ठान में कलश स्थापित करके साधना सम्पन्न करें.
कलश स्थापना मुहूर्त –
चैत्र कलश स्थापना शनिवार, अप्रैल 2, 2022
06:10 सुबह से 08:31 सुबह तक

कलश स्थापना विधि-
कलश स्थापना के लिए मिट्टी के बर्तन (कलश), पवित्र स्थान से लाई गई मिट्टी या बालू, गंगाजल, सुपारी, चावल, नारियल, लाल धागा, लाल कपड़ा, आम या अशोक के पत्ते की जरूर होती है.

  • कलश स्थापना नवरात्रि के पहले दिन की जाती है.कलश स्थापना से पहले अपने घर के मंदिर को अच्छी तरह साफ कर लें.
  • सबसे पहले भगवान शिव को साक्षी बनायें. कहें- हे देवाधिदेव महादेव आपको साक्षी बनाकर चैत्र नवरात्रि देवी सिद्धि हेतु कलश स्थापित कर रहा हूं. देवी कृपा हेतु मुझे दैवीय सहाय़ता और सुरक्षा प्रदान करें। आपका धन्यवाद.
  • कलश पात्र में में गंगाजल भरकर रख लें। गंगाजल न हो तो मिनिरल वाटर भर लें.
  • मंदिर बड़ा है तो उसके अंदर या पास में मिट्टी का छोटा चबूतरा सा बना दें। इसे मिट्टी के एक चौड़े पात्र में भी बना सकते हैं.
  • जौ को मिट्टी के चबूतरे में बो दें.
  • अब इस पर जल से भरा कलश रखें.
  • कलश के गर्दन जैसे बने भाग पर कलावा बांधें.
  • साथ ही कलश में सुपारी, एक सिक्का और थोड़े अक्षत (चावल) डाल दें.
  • कलश पर रोली से स्वास्तिक बना दें.
  • कलश के मुंह पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें.
  • उसके ऊपर लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल रखें.
    वरुण देव से सफल पूजा हेतु आग्रह करें. कहें- हे वरूण देव इस कलश में अपनी शक्तियां स्थापित करके मेरे द्वारा सम्पन्न की जाने वाली देवी साधना की सफलता सुनिश्चित करें। साथ ही मेरे घर में देव शक्तियां स्थापित करके इस स्थान को मेरे और मेरे परिवार जनों के लिये स्वर्ग सा सुखदायी बना दें।

देवी साधना विधि-
देवी साधना के लिये कलश के समक्ष आसान लगाकर आराम से बैठ जायें। सरसों तेल का दीपक जला लें। इससे घर की नकारात्मक समाप्त होती है और सम्पन्नता आती है। पूर्वाग्रह वश सरसों तेल के दीपक को लेकर मन में कोई भ्रांति हो तो अपनी इच्छानुसार कोई भी दीपक जला सकते हैं। पूजा कक्ष में सुगंध कर लें।
हर दिन सबसे पहले भगवान शिव को साक्षी बनायें. कहें- हे देवाधिदेव महादेव आपको साक्षी बनाकर चैत्र नवरात्रि में राज सुख सिद्धि हेतु देवी साधना सम्पन्न कर रहा हूं. सफलता हेतु मुझे दैवीय सहाय़ता और सुरक्षा प्रदान करें। आपका धन्यवाद.

देवी मां से सिद्धि का आग्रह करें. कहें- हे जगत जननी मां भगवती मेरे मन मंदिर में विराजमान होकर मेरी साधना आराधना को स्वीकार करें, साकार करें. मुझे राज सुख प्रदान करें। आपका धनायवाद।
फिर देवी मां को पुष्प अर्पित करें। फिर भोग अर्पित करें।

देवी स्तुति करें. कहें-
देवी पूजि पद कमल तुम्हारे।
सुर नर मुनि सब होहि सुखारे।।

उसके बाद आगे दिया मंत्र 5 बार बोलें-
आयुर्देहि धनम् देहि विद्या देहि महेश्वरी।
समस्तम अखिलाम देहि देहि मे परमेश्वरी।।
उसके बाद राज सुख मंत्र का जप 40 मिनट करें।
मंत्र- ऊं. क्लीं क्लीं नमः
इसी तरह नवरात भर प्रतिदिन देवी साधना सम्पन्न करें।

साधना से अर्जित दैवीय ऊर्जाओं को भौतिक जीवन में मनोकामना पूर्ति के लिये अपनी कुंडलिनी सहित सभी शक्ति केंद्रों में स्थापित करना अनिवार्य होता हैै। अन्यथा साधना ठीक से सम्पन्न होने के बाद भी जीवन में उसके परिणाम नही दिखते। गुरूजी साधना की ऊर्जा स्थापना नवरात्र के अंतिम दिन 11 अप्रैल को करेंगे। उसके लिये साधक हरिद्वार आएंगे। वहां गुरूजी सामने बैठकर उनकी कुंंडलिनी व अन्य शक्ति केंद्रों में ऊर्जाओं की स्थापना करेंगे।
अन्य विधानों में साधना ऊर्जाओं की स्थापना के लिये साधकोॆं के नाम से विशेष अनुष्ठान सम्पन्न किये जाते हैं। जो साधक किसी कारण वश हरिद्वार नही आ सकेंगे उनके लिये संस्थान की तरफ से विशेष अनुष्ठान सम्पन्न कराया जाएगा।
जिस पर आने वाला खर्च दक्षिणा स्वरूप साधकों से लिया जाना जरूरी होगा। अन्यथा साधना अनुष्ठान का फल प्राप्त नहीं होता। 
हर साधक पर दक्षिणा राशि 5100 संभावित है.
जो लोग हरिद्वार आ रहे हैं. उन्हें इस अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है. उन्हें दक्षिणा देने की भी जरूरत नही.

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