ध्यान का विज्ञान अध्यात्म की जान है। इससे फास्ट लाभ या हानि किसी अन्य विद्या में नही। ऊपर दिये लिंक से ब्रह्मनाद सुनकर चक्रों को जाग्रत करना सरल और सुरक्षित है। इसे घर बैठे कर सकते हैं। एनर्जी गुरू श्री राकेश आचार्या जी ने इस ध्यान विधि का निर्माण किया है। उनसे किसी भी मार्गदर्शन के लिये हमारी हेल्पलाइन 9210500800 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
ध्यान की सावधानियां
मेडिटेशन हमेशा सक्षम एवं समक्ष गुरू के मार्गदर्शन में ही करना चाहिये। किताबों, सोसल मीडिया या अनरीचेबल गुरू के प्रभाव में किया गया मेडिटेशन बड़ी समस्या का कारण भी बन सकता है। दरअसल मेडिटेशन में असीमित उर्जायें प्राप्त होती हैं। उन्हें संतुलित न किया जाये तो अतिरिक्त उर्जायें आभामंडल, उर्जा चक्रों और सूक्ष्म शरीर को बेडौल कर देती हैं। जिससे जीवन भटक कर बिगड़ सकता है।
सामान्य चीजों की तरह प्रत्येक उर्जा का भी साइड इफेक्ट होता है। अति मनमानी हमेशा नुकसान का कारण बनती है। अति हर चीज की हानि ही सामने लाती है। मेडिटेशन की भी। अधिक मात्रा में पहुंची मेडिटेशन की नीली उर्जा मूलाधार चक्र और उसकी पंखुड़ियों को संकुचित कर देती है। जिससे मूलाधार चक्र सिकुड़कर छोटा हो जाता है। शिथिल हो जाता है। उसकी कार्यर क्षमता कमजोर हो जाती है। सूक्ष्म शरीर में पृत्वी तत्व असंतुलित हो जाता है। मूलाधार चक्र का शिथिल हो जाना भाग्य को सुला देने जैसा है। कमर तोड़ देने जैसा है। कमजोर मूलाधार चक्र निर्बलता, निर्धनता, कर्महीनता की तरफ ले जाता है। कांफिडेंस कमजोर करता है। कई तरह की बीमारियों का कारण बनता है। सही कहा जाए तो मूलाधार चक्र की शिथिलता बर्बादी का कारण बन सकती है।