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मन्त्र संजीवनी: दूसरों की भी समस्याओं को तिनके की तरह उड़ा देने की पावर।

मन्त्र संजीवनी युगों से अचूक है। इसके प्रभाव अचूक हैं। सही तकनीक अपनायें तो मन्त्र संजीवनी उपचारक दूसरों के भी जीवन से समस्याओं को तिनके की तरह उड़ा देने में सक्षम होते हैं। मन्त्र संजीवनी उपचार शास्त्र काल से होता आया है। दैत्यगुरु शुक्राचार्य तो मृत संजीवनी से मरे हुए लोगों को जिंदा कर दिया करते थे। सतयुग, त्रेता, द्वापर की तरह कलियुग में भी मन्त्र संजीवनी लोगों का  जीवन बदलने में सक्षम है। लोग इसके उपयोग से सांसारिक सुखों का भोग करते हुए मोक्ष तक कि राह सुनिश्चित कर सकते हैं।
प्रस्तावना…
सफल मन्त्र संजीवनी उपचारक अपनी ही नही दूसरों की भी समस्यायों को तिनके की तरह उड़ा सकते हैं। सतयुग, त्रेता, द्वापर की तरह कलियुग में भी मन्त्र संजीवनी लोगों का जीवन बदलने में सक्षम है। लोग इसके उपयोग से सांसारिक सुखों का भोग करते हुए मोक्ष तक की राह सुनिश्चित कर सकते हैं। अमीर, गरीब, रोगी, निरोगी, बच्चे, बूढ़े सभी इसे अपना सकते हैं। जिन्हें जहां कहीं भी इस देव विद्या को सीखने का अवसर मिले, वे सीखकर अपना और दूसरों का जीवन जरुर संवारें।
देव विद्या मन्त्र संजीवनी के लाभ…

  • षट्चक्रों , कुण्डलिनी, अवचेतन शक्ति का जागरण।
  • बीमार अंगों का पुनर्जनन।
  • सम्मोहन शक्ति का जागरण।
  • मानवीय शक्तियों का जागरण।
  • उत्साह और पराक्रम का जागरण।
  • आत्मबल और आत्मशक्ति का जागरण।
  • सिद्धि, प्रसिद्धि, समृद्धि हेतु देव शक्तियों का जागरण।
  • ग्रह दोष, वास्तु दोष, देव दोष, पितृ दोष, प्रारब्ध दोष, बाधा दोष, धन दोष सहित सभी नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति।
  • मन्त्र संजीवनी के उचित उपयोग से सांसारिक भोगों का लाभ उठाते हुए मोक्ष की मंजिल।
  • मन्त्र संजीवनी विद्या का उपयोग युगों से होता आया है। शुक्राचार्य जी ने इसे भगवान शिव से प्राप्त किया। वे मन्त्र संजीवनी का उपयोग करके मरे हुए लोगों को जिंदा कर दिया करते थे। ऋषि दधीचि इसके बड़े ज्ञाता थे। उन्होंने इसका उपयोग करके माता पार्वती की ऊर्जाओं को संतुलित किया। तब उनकी आदि शक्तियों का जागरण हुआ और वे भगवान शिव को प्राप्त कर सकीं। इस तरह मन्त्र संजीवनी न सिर्फ समस्याओं को दूर करने में सक्षम है बल्कि साधना सिद्धि में भी कारगर होती है।वेद-पुराणों में इसका विभिन्न रूपों में वर्णन है।कालांतर में इसे भुला दिया गया।कलियुग के इस काल में ऊर्जा गुरुओं द्वारा पुनः इस विज्ञान का उपयोग आरम्भ हुआ है। रेकी, प्राणिक हीलिंग और ऐसे ही तमाम बदले हुए स्वरूपों में लोग विश्व स्तर पर इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

    संजीवनी उपचार के मूल स्वरूप से अलग होने के कारण उन विधाओं में एनर्जी की जानकारी तो है। परन्तु वहां विद्वानों द्वारा कल्पना शक्ति (इमेजिनेशन) का सहारा अधिक लिया गया है।

    कल्पना शक्ति हमेशा फलित हो ऐसा जरूरी नही। क्योंकि कल्पना आसानी से मिलावट का शिकार हो जाती है। पल पल विचार बदलते हैं और एक विचार के बीच दूसरा विचार घुस जाता है। यही कारण है कि इन दिनों ऊर्जा उपचार की प्रचलित विधाओं में वह लाभ नही मिल पा रहा, जिसके लिये लोग हीलिंग उपचार का सहारा लेते हैं।

    मन्त्र संजीवनी उपचार में कल्पना शक्ति की बजाय मन्त्र शक्ति का उपयोग किया जाता है। शुक्राचार्य भी मृत संजीवनी में मन्त्र शक्ति का उपयोग करते थे।

    मन्त्र शक्ति का परिचय देने की आवश्यकता नही। इसका कब, कहाँ और कितना उपयोग किया जाए, यह मालूम हो तो चमत्कार रचा जा सकता है।

    शिवप्रिया जी ने 40 दिन की शिव सिद्धि के समय मंत्र संजीवनी विद्या की ऋषि तकनीक अर्जित की। जिसमें अथर्व वेद संहिता के सूत्रों की विशेषता प्रमुख है। ब्रह्मापुत्र ऋषि अथर्वा द्वारा रचित अथर्व वेद के सूत्रों को अपनाकर उनके पुत्र ऋषि ददीचि ने महान संजीवनी विज्ञान को डिकोड किया। उनके द्वारा सिखाई संजीवनी उपचार की तकनीक से देव चिकित्सक अश्वनी कुमार देवी देवताओं का उपचार करते हैं। मंत्र संजीवनी में शिवप्रिया जी अथर्व वेद संहिता के सूत्रों को अपना रही हैं। लम्बे इंतजार के बाद उन्होंने अनुशासित साधकों को मंत्र संजीवनी सिखाने की सहमति दे दी है। अब साधक उनसे यह देव विद्या सीख सकेंगे।

    शिवप्रिया जी ने अपनी उच्चतर अकेडमिक शिक्षा में लोगों के मन-मस्तिष्क का इलाज करने के लिये साइकोलॉजिस्ट की शिक्षा हाशिल की है। भारत सरकार की प्रतिष्ठित Rehablitation Council Of India ने उनको मनोरोग विशेषज्ञ के तौर पर देश में मनोरोगियों की जांच और उपचार के लिये प्रमाणित किया है। विश्व की प्रसिद्ध संस्था लंदन स्थित British Psychological Society ने अपना सदस्य नियुक्त करके उन्हें दुनिया भर में मनोरोगियों के उपचार के लिये विश्व स्तर पर अधिकृत किया है। वेदांता, फोर्टिस सहित विभिन्न प्रतिष्ठित अस्पतालों में उन्होंने तमाम गम्भीर मनोरोगियों के उपचार में सहयोग किया है।

    अपनी शिक्षा के दौरान उन्होंने मन्त्र संजीवनी पर भी व्यापक अनुसंधान किये है। किस तरह की समस्या पर मन्त्र शक्ति का कैसा उपयोग हो, यह उनके अनुसंधान का विषय रहा है।

    सतयुग, त्रेता, द्वापर की तरह कलियुग में भी मन्त्र संजीवनी लोगों का जीवन बदलने में सक्षम है। लोग इसके उपयोग से सांसारिक सुखों का भोग करते हुए मोक्ष तक कि राह सुनिश्चित कर सकते हैं।

मन्त्र संजीवनी किसके लिये है?
मन्त्र संजीवनी पर सबका अधिकार है। इसे अमीर-गरीब, स्वस्थ-बीमार, सुखी-दुखी सभी अपना सकते हैं। जिनके पूजा-पाठ, उपाय, कामकाज फलित नही होते उन्हें इसे जरूर अपनाना चाहिये। ताकि अपनी योग्यताओं, क्षमताओं और भाग्य का पूरा फल पा सकें। साथ ही दूसरों के जीवन में भी सुख स्थापित कर सकें।

मन्त्र संजीवनी क्या है?

यह आभामंडल और ऊर्जा चक्रों को उपचारित करके अपनी व दूसरों की शक्तियों को जगाने की ऋषि विद्या है।  जिसमें लोक परलोक सुधारने की क्षमता है।

मन्त्र संजीवनी में क्या किया जाता है?

इसमें दो कार्य किये जाते हैं।

1- इसके द्वारा समस्याओं के लिए जिम्मेदार आभामंडल और ऊर्जा चक्रों की औरिक सफाई की जाती है। जिससे ग्रह, वास्तु, गुस्सा, तंत्र, बाधा, धनाभाव, बीमारियों, विघटन, विवाद, घाटा, नुकसान, असफलता, अपयश, बंधन, बेरोजगारी, बेचैनी उत्पन्न करने वाली दूषित ऊर्जाएं निकल जाती हैं।

2- इस विद्या में मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष के माध्यम से उर्जा चक्रों और कुंडलिनी पर मंत्रों की शक्ति का सिंचन किया जाता है। जिससे वे सक्रिय होकर जाग्रत होते हैं। सक्रिय उर्जा चक्र तन, मन, धन की सफलताएं सुनिश्चित करते हैं। जाग्रत उर्जा चक्र सिद्धियां के लिये सक्षम होते हैं। जाग्रत कुंडलिनी सौभाग्य का जागरण करती है।

मन्त्र शक्ति के सिंचन को ऐसे समझें जैसे पौधों में पानी डालना।


मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष की जरूरत क्यों?

जब किसी समस्याग्रस्त व्यक्ति की ऊर्जाओं की सफाई की जाती है तो उसके भीतर मौजूद परेशानियों वाली नकारात्मक ऊर्जाएं उपचार करने वाले पर हमला करती हैं। खासतौर से बीमारियों और बाधाओं की ऊर्जाएं अधिक हमलावर होती हैं। यही कारण है कि जब किसी बीमार या परेशान व्यक्ति के पास रुको तो कुछ देर बाद असुविधा या अनमनापन उत्पन्न होने लगता है।

कई तरह की विधियों से हीलिंग करने वाले हीलर, झाड़ फूँक करने वाले तांत्रिक, पूजा पाठ कराने वाले कर्मकांडी पंडित और उनके परिवारजन अक्सर परेशानियों में घिर जाते हैं। क्योंकि उन पर नकारात्मक ऊर्जाओं के हमले होते रहते हैं। वे उनसे बचना नही जानते। ऐसे में वे दूसरों को तो लाभ पहुंचा देते हैं, किंतु खुद अक्सर परेशान रहते हैं।

मन्त्र संजीवनी उपचारकों पर भी ऐसे हमले होते हैं। किंतु उन पर इन हमलों का असर नही होता। इस विद्या में मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष का उपयोग किया जाता है। यह रुद्राक्ष ऐसे सभी घातक हमलों को अपने ऊपर लेकर उन्हें निष्क्रिय कर देता है।

साथ ही यह रुद्राक्ष ब्रह्मांड में मंत्रों के सोर्स के साथ जुड़ जाता है। वहां से मंत्रों की शक्ति को लेकर वांछित उर्जा चक्रों पर डालता है। इसे ऐसे समझें जैसे किसी नल से पाइप जोड़कर उसके जरिये पौधों में पानी डालना।

मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष कैसे काम करता है?

सिद्ध करके मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष को उपचारक की एनर्जी से कनेक्ट किया जाता है।

1-यह जिनके साथ कनेक्ट होता है उनका औरिक सुरक्षा कवच स्वतः निर्मित करता रहता है। उन्हें सभी तरह के औरिक और साइकिक हमलों से बचाता है।

2- प्रोग्रामिंग करके उपचारक के साथ रुद्राक्ष की टेलीपैथी सम्पन्न होती है। तब रुद्राक्ष उपचारक के हर कमांड को स्वीकार करता है। उपचारक के निर्देश पर यह रुद्राक्ष आभामंडल और ऊर्जा चक्रों की औरिक सफाई सम्पन्न करता है।

3- उपचारक के कमांड पर मन्त्र की शक्ति को ब्रह्मांड से ग्रहण करके इच्छित उर्जा चक्रों को उससे सिंचित करता है।

मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष सिद्धि की विधि क्या है?

विधि…

कोई भी स्वस्थ नेचुरल रुद्राक्ष लें।

टेलीपैथी करके उसे अपनी ऊर्जाओं से कनेक्ट करें।

रुद्राक्ष पर उन सभी मंत्रों को 10-10 हजार जप अलग अलग करें। जिनकी मन्त्र शक्ति का भविष्य में सिंचन हेतु उपयोग करना चाहते हैं।

जप पूरे होने के बाद रुद्राक्ष को मन्त्र सम्बद्ध करके सभी जपे गए मंत्रों का दशांश यज्ञ करें।

जब मन्त्र शक्ति ग्रहण करने में सक्षम हो जाये तब रुद्राक्ष का परीक्षण करें। परीक्षण सफल होने पर उसे अपनी सुरक्षा का दायित्व सौंपें। जिसके मुताबिक रुद्राक्ष हर 6 घण्टे में स्वतः आपका सुरक्षा कवच निर्मित करता रहे। सुरक्षा सुनिश्चित होने पर रुद्राक्ष को अपने कमांड स्वीकारने के लिये प्रोग्राम करें।

यह रुद्राक्ष बहुत ही संवेदनशील जिम्मेदारियों वाला होता है। इसलिये इसकी सिद्धि में अत्यधिक सावधानी की जरूरत होती है। जरा सी भी चूक इसकी सिद्धि को विफल कर देती है। ऐसे में वह साधारण रुद्राक्ष की तरह काम करेगा। जो उपचारक की सुरक्षा, औरिक सफाई और मन्त्र शक्ति सिंचन नही कर सकता। इसलिये इसकी सिद्धि में सभी नियमों का अक्षरशः पालन करें।

क्या दूसरों के लिये रुद्राक्ष सिद्ध कर सकते हैं?

ऐसा न करें। क्योंकि इसके लिये बहुत संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसा करना लंबे खर्च का कारण बन सकता है। जरूरत हो तो सिर्फ अपना रुद्राक्ष हो सिद्ध करें।

रुद्राक्ष सिद्ध करने पर कितना खर्च आता है?

इसके लिये सिंचित किये जाने वाले सभी मंत्रों का जप व यज्ञ अलग अलग करना होता है। यज्ञ सामग्री में उपयोग होने वाली कुछ संविधा बहुत मंहगी होती हैं। इस कारण सिद्धि अनुष्ठान पर 40 से 50 हजार का खर्च अनुमानित होता है।

किंतु यदि किसी के पास वांछित यज्ञ सामग्री उपलब्ध हो तो कोई खास खर्च नही आता।

मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष का उपयोग कैसे करें?

इसके उपयोग की विधि मन्त्र संजीवनी उपचार की ऑनलाइन या ऑफलाइन क्लास में सिखाया जाएगा।

क्या मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य में कर सकते हैं?

नही। इसका उपयोग सिर्फ अपनी सुरक्षा और अपना व दूसरों का मन्त्र संजीवनी उपचार करने में ही किया जा सकता है।

क्या मन्त्र संजीवनी में कोई अन्य रुद्राक्ष यूज कर सकते हैं?

नही। यह सुरक्षित नही होगा। यहां तक कि महासंजीवनी रुद्राक्ष या संजीवनी रुद्राक्ष भी इसके लिये यूज न करें। उनकी सिद्धि व प्रोग्रामिंग अलग तरीके की है।

जिनके पास मन्त्र संजीवनी रुद्राक्ष नही है, वे क्या करें?

खुद सिद्ध करें या किसी विश्वसनीय जगह से सिद्ध करा लें। उसके बाद ही मन्त्र संजीवनी अपनाएं।

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मन्त्र संजीवनी उपचार

1-

भगवान शिव को साक्षी बनाएं-

हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूं मुझ शिष्य पर दया करें, आपको साक्षी बनाकर मैं आपकी दिव्य शक्तियों का उपयोग करके मन्त्र संजीवनी उपचार संपन्न कर रहा हूं, इसकी सफलता हेतु मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें। मेरे द्वारा इच्छित सभी लोगों के जीवन में तन से, मन से, धन से सुख स्थापित हो इस हेतु मुझे अपनी ऊर्जाओं का सर्वश्रेष्ठ माध्यम बनाएं।

2-

धरती मां से पाताली सुरंग का आग्रह-

हे धरती मां, मै अपने दैविक गुरु भगवान शिव को साक्षी बनाकर मन्त्र संजीवनी उपचार कर रहा हूं।  इस हेतु मेरे समक्ष 2 फ़ीट के दायरे में पाताली सुरंग का निर्माण कर दीजिए।

जैसे ही मै किसी के आभामंडल को पाताली सुरंग के ऊपर आमंत्रित करूँ, पाताली सुरंग द्वारा तत्काल स्वतः उनकी सफाई आरम्भ कर दी जाए। और पूर्ण सफाई होने तक ऊर्जा शोधन जारी रहे। उनके सूक्ष्म शरीर से ग्रह नक्षत्रों के दुष्प्रभाव, वास्तु दोष के दुष्प्रभाव, तंत्र के दुष्प्रभाव, बाधाओं के दुष्प्रभाव, बीमारियों के दुष्प्रभाव, गुस्से-तनाव के दुष्प्रभाव, धनाभाव के दुष्प्रभाव सहित समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं को पाताली सुरंग के द्वारा खींचकर पाताल अग्नि में जलाकर भस्म कर दिया जाए।

3-

संजीवनी मंत्र से प्रार्थना-

हे दिव्य मृत्युंजय संजीवनी मंत्र “ॐ ह्रौं जूं सः” आप को मेरा प्रणाम है। आप मेरे तन, मन, मस्तिष्क, आभामंडल, ऊर्जा चक्र, कुंडलिनी और मेरे हृदय सहित सभी अंगों में व्याप्त हो जाएं। मेरी भावनाओं से जुड़कर मेरे लिए सिद्ध हो जाएं। मेरे भीतर शिव संजीवनी तत्व का जागरण करके मुझे शिव समान बना दीजिए।

4-

संजीवनी शक्ति से प्रार्थना करें-

दिव्य मृत्युंजय संजीवनी शक्ति, मैं भगवान शिव को साक्षी बनाकर मन्त्र संजीवनी उपचार संपन्न कर रहा हूं, इसकी सफलता हेतु मुझे अपना सर्वोत्तम माध्यम बनाएं।

इस हेतु आप मेरे समक्ष 10 फ़ीट की ऊंचाई पर मृत्युंजय संजीवनी शक्ति के पिरामिड का निर्माण करें।

उपचार हेतु मेरे द्वारा आमंत्रित आभामंडल के पाताली सुरंग के ऊपर आते ही आप स्वतः उन पर दैवीय ऊर्जाओं का शक्तिपात आरम्भ कर दें। और  उपचार पूरा होने तक उन पर शक्तिपात जारी रखें।

जब मेरा प्रतिबिंब आभामंडल उनका ऊर्जा स्नान कराएं तब आप उनके रोम-रोम की सफाई करें।  और जब उनका ऊर्जन करें तब उनके आभामंडल, ऊर्जा चक्र और 33 लाख से अधिक रोम चक्रों को ऊर्जित करके स्वस्थ करें, सुडौल करें, शक्तिशाली करें, सर्वोत्तम करें।

5-

सूक्ष्म शरीर से आग्रह-

अपने प्रतिबिंब आभामंडल बनाने हेतु प्रार्थना- मेरे सूक्ष्म शरीर, आप मेरे द्वारा सफल और सुरक्षित संजीवनी उपचार हेतु मेरे समक्ष मेरा प्रतिबिंब आभामंडल उत्पन्न करें जो मेरे मानसिक निर्देशों के अनुसार मेरे द्वारा इच्छित लोगों को उपचारित करके, उनकी कामनाओं को पूरा कर सके।

6-

प्रभावित व्यक्ति का आभामंडल-

….(अमुक जिसका संजीवनी उपचार करना है उसका नाम लें) के आभामंडल संजीवनी उपचार हेतु छोटे बच्चे के आकार में होकर आप मेरे समक्ष पाताली सुरंग के ऊपर आकर स्थिर हो जाएं। और मेरे द्वारा की जा रही मन्त्र संजीवनी उपचार की शक्तियों को स्वीकार करके अपने शरीर धारी को तन से मन से धन से स्वस्थ, सुखी व सुरक्षित बनाएं।

7-

सफाई के लिये ऊर्जा स्नान-

आभामंडल को सामने बुलाते ही ऊपर से ऊर्जा पिरामिड द्वारा उस पर दैवीय ऊर्जा का शक्तिपात आरम्भ हो जाएगा। जैसे कोई व्यक्ति नहाने के लिये झरने के नीचे बैठा हो।

उसी समय नीचे से पाताली सुरंग द्वारा आभामंडल से नकारात्मक ऊर्जाओं को अपने भीतर खींचा जाना शुरू कर दिया जाएगा। जैसे वैक्यूम क्लीनर द्वारा उसके भीतर की गंदगी निकाली जा रही हो।

इस बीच ऊर्जा चक्रों की भीतर तक सफाई हो जाये इसके लिये सभी चक्रों को ऊपर से नीचे जाते हुए बारी बारी से एंटी क्लॉक वाइस घुमाना होगा। यह काम अपने प्रतिबिम्ब आभामंडल से कराना है। ताकि सफाई प्रभावशाली और सुरक्षित रहे।

इस तरह प्रभावित व्यक्ति के आभामंडल को ऊर्जा  स्नान कराये।

सभी चक्रों को 3- 3 बार एंटी क्लॉक वाइस घुमाएं। जिस चक्र में नकारात्मकता या गन्दगी अधिक होगी, उसे घुमाते समय अटकाव महसूस होगा। ऐसे में उसे 3 बार और एंटी क्लॉक वाइस घुमा दें।

8-

ऊर्जन-

ऊर्जा पिरामिड से हो रहा शक्तिपात आमंत्रित आभामंडल की सफाई होने के बाद स्वतः अर्जन आरम्भ कर देगा।

उस बीच ऊर्जा चक्र ठीक से उर्जित होकर सक्रिय हो जाएं, इसके लिये उन्हें मन्त्र संजीवनी की अतिरिक्त शक्ति प्रदान करें।

इसके लिए चक्रों को 7-7 बार क्लॉक वाइस घुमाएं। इस काम के लिये अपने प्रतिबिम्ब आभामंडल का उपयोग करें। ताकि उर्जन अधिक प्रभावशाली और सुरक्षित रहे।

चक्र को घुमाते समय संजीवनी मन्त्र

*ॐ ह्रौं जूं सः …….(अमुक) पालय पालय सः जूं ह्रौं ॐ*

का जप करते रहें। यहां अमुक की जगह उस व्यक्ति का नाम लें जिसको उपचारित कर रहे हैं।

हर चक्र पर 7 बार मन्त्र जपें।

मन्त्र को जल्दी जल्दी न जपें। सामान्य तरीके से ऐसे जपें कि उसके सभी बीज मन्त्रों का उच्चारण अलग अलग व स्पष्ट हो।

चक्रों को ऊपर से नीचे के क्रम में उर्जित करें।

9-

सुरक्षा कवच का निर्माण करें-

सफाई और उर्जन पूरा होने के बाद प्रभावित व्यक्ति के आभामंडल के सुरक्षा कवच का निर्माण करें। ताकि विभिन्न तरह के नकारात्मक हमलों से उसकी रक्षा हो सके।

इसके लिये संजीवनी शक्ति के पिरामिड से कहें हे मृत्युंजय शक्ति से युक्त पिरामिड आप ….(अमुक) को 15 दिन के लिये अभेद सुरक्षा कवच प्रदान करें। ग्रह नक्षत्र, वास्तु, तंत्र, बाधाओं, बीमारियों, अभाव, क्रोध, तनाव के दुष्प्रभाव सहित कोई भी नकारात्मक ऊर्जा इस सुरक्षा कवच को भेद न सकें, और इन पर उनका कोई दुष्प्रभाव न पड़े। समस्त प्रकार की सफलता दायी सकारात्मक ऊर्जाएं इन तक आती रहें इस हेतु सुरक्षा कवच में प्रेम और प्रकाश के आने जाने का उचित मार्ग दें।

इस सुरक्षा कवच में….(अमुक) तन से, मन से, धन से स्वस्थ, सुखी, सुरक्षित रहे।

एक बार में सुरक्षा कवच 15 दिन से अधिक समय का न बनाएं। आवश्यकता हो तो 15 दिन बाद दोबारा बना दें।

10-

आभामंडल को वापस भेजें-

जिसका मन्त्र संजीवनी उपचार पूरा हो जाये, सुरक्षा कवच बनाकर उनका आभामंडल तुरन्त  वापस भेज दें। उसके बाद ही किसी अन्य का आभामंडल आमंत्रित करें। यह बिंदु विशेष रूप से याद रखें।

आभामंडल वापस भेजने के लिये कहें-

….(अमुक) के आभामंडल आप अपने शरीर धारी के पास वापस जाएं। उन्हें तन से, मन से, धन से, स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित बनाएं।

11-

पाताली सुरंग, ऊर्जा पिरामिड की वापसी-

सभी लोगों का संजीवनी उपचार पूरा होने के बाद पाताली सुरन और ऊर्जा पिरामिड को तत्काल वापस भेज दें।

इसके लिये धरती माँ से कहें-  हे धरती माँ मेरा उद्देश्य पूर्ण हुआ अब आप पाताली सुरंग को वापस पाताल अग्नि में भेज दें।

आपका धन्यवाद।

ऊर्जा पिरामिड से कहें- हे दिव्य ऊर्जा पिरामिड मेरा उद्देश्य पूरा करने के लिये आपका धन्यवाद। अब आप ब्रह्मांड अग्नि में खाकर मिल जाएं और ईश्वर के अन्य उद्देश्यों की पूर्ति करें।

12- चक्र परिचय और उपचार क्रम-

सौभाग्य चक्र

थर्ड आई चक्र

आज्ञा चक्र

विशुद्धि चक्र

अनाहत चक्र

मणिपुर चक्र

नाभि चक्र

स्वाधिष्ठान चक्र

मूलाधार चक्र

कुण्डलिनी चक्र

विशेष:

आवश्यकता हो तो प्रारब्ध चक्र और कटि चक्र को भी उपचारित करें।

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*मन्त्र संजीवनी के लाभ…*

1-

मन्त्र संजीवनी का सुचारू उपयोग किया जाए तो  षट्चक्रों का जागरण, कुण्डलिनी का जागरण, अवचेतन शक्ति का जागरण, बीमार हो रहे अंगों का पुनर्जनन, मानवीय शक्तियों का पुनर्जनन सुनिश्चित हो सकता है।

2-

मन्त्र संजीवनी का उपयोग करके मन की बीमारियों को प्रबलता से खत्म किया जा सकता है। क्योंकि इससे आत्मबल और आत्मशक्ति का जागरण आसान है।

3-

मन्त्र संजीवनी लोगों में उत्साह और पराक्रम जगाने में सक्षम है। इसका समुचित उपयोग करके लोगों का जीवन खुशहाल बन जाता है। इससे लोग अपनी शक्तियों, ऊर्जाओं का भरपूर उपयोग करने में सक्षम बनते हैं। जिससे तन, मन, धन की समस्याएं खत्म होती हैं।

4-

मन्त्र संजीवनी का सक्षम उपयोग करके ग्रहदोष, वास्तुदोष, देवदोष, पितृदोष, प्रारब्धदोष, तन्त्रदोष, धनदोष सहित सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जाओं से सुनिश्चित मुक्ति पाई जा सकती है।

5-

मन्त्र संजीवनी के उचित उपयोग से सांसारिक भोगों का लाभ उठाते हुए मोक्ष की मंजिल सुनिश्चित की जा सकती है।

मुम्बई आश्रम में शिवप्रिया जी प्रत्येक माह के पहले और तीसरे संडे को *मुम्बई में मन्त्र संजीवनी

*मन्त्र संजीवनी के लाभ…*

1-

मन्त्र संजीवनी का सुचारू उपयोग किया जाए तो  षट्चक्रों का जागरण, कुण्डलिनी का जागरण, अवचेतन शक्ति का जागरण, बीमार हो रहे अंगों का पुनर्जनन, मानवीय शक्तियों का पुनर्जनन सुनिश्चित हो सकता है।

2-

मन्त्र संजीवनी का उपयोग करके मन की बीमारियों को प्रबलता से खत्म किया जा सकता है। क्योंकि इससे आत्मबल और आत्मशक्ति का जागरण आसान है।

3-

मन्त्र संजीवनी लोगों में उत्साह और पराक्रम जगाने में सक्षम है। इसका समुचित उपयोग करके लोगों का जीवन खुशहाल बन जाता है। इससे लोग अपनी शक्तियों, ऊर्जाओं का भरपूर उपयोग करने में सक्षम बनते हैं। जिससे तन, मन, धन की समस्याएं खत्म होती हैं।

4-

मन्त्र संजीवनी का सक्षम उपयोग करके ग्रहदोष, वास्तुदोष, देवदोष, पितृदोष, प्रारब्धदोष, तन्त्रदोष, धनदोष सहित सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जाओं से सुनिश्चित मुक्ति पाई जा सकती है।

5-

मन्त्र संजीवनी के उचित उपयोग से सांसारिक भोगों का लाभ उठाते हुए मोक्ष की मंजिल सुनिश्चित की जा सकती है।

शिवप्रिया दीदी मुम्बई आश्रम में मन्त्र संजीवनी की दीक्षा देंगी। वे मन्त्र संजीवनी का उपयोग करके

समस्याओं से मुक्ति,

रोगों से मुक्ति,

रुकावटों से मुक्ति,

दोषों से मुक्ति

अभाव से मुक्ति

बिखराव से मुक्ति

दुर्भाग्य से मुक्ति

और संजीवनी उपचार की अन्य तकनीक सिखाएंगी। जिनका उपयोग करके संजीवनी उपचारक खुद को और दूसरों को दुखों से मुक्त करके सफल जीवन की स्थापना करने में सक्षम बन सकेंगे।


आभामंडल प्रखंड।

बीमारियों से मुक्ति के लिये मन्त्र संजीवनी से आभामंडल को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि आभामंडल में एनर्जी की कमी बीमारियों का कारण बनती है। कई बार तो लोग उम्र से पहले बूढ़े दिखने लगते हैं।

इससे निपटने के लिये आभामंडल और सभी अंगों पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ ह्रौं जूं सः माम पालय पालय सः जूं ह्रौं ॐ*

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मन्त्र संजीवनी विद्या… कुण्डलिनी चक्र प्रखंड।

सिद्धि-प्रशिद्धि के लिये मन्त्र संजीवनी से कुण्डलिनी चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि कुण्डलिनी चक्र में एनर्जी की कमी जीवन को गुमनामी की तरफ ले जाती है। पर्याप्त योग्यता और मेहनत के बावजूद ऐसे में लोग अपने काम का क्रेडिट हाशिल नही कर पाते।

इससे निपटने के लिये कुण्डलिनी चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ कुण्डलिनी अरोहणं लं लं लं ॐ*

मन्त्र संजीवनी विद्या…मूलाधार चक्र प्रखंड।

धन के लिये मन्त्र संजीवनी से मूलाधार चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि मूलाधार चक्र में एनर्जी की कमी जीवन में कर्म की विफलता और धन की कमी पैदा करती है। पीढ़ियों तक धनाभाव सताता रहता है।

इससे निपटने के लिये मूलाधार चक्र की चारों पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *लं लं लं धन सुख मे देहि दापय स्वाहा*

मन्त्र संजीवनी विद्या…स्वाधिष्ठान प्रखंड।

संतान सुख के लिये मन्त्र संजीवनी से स्वाधिष्ठान चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि स्वतिष्ठान चक्र में एनर्जी की कमी वैवाहिक जीवन के सुखों में कमी  पैदा करती है। साथ ही क्रिएटिविटी में रुकावट पैदा करती है।

इससे निपटने के लिये स्वाधिष्ठान चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ ब्रम्हस्वरूपाय वं वं वं*

मन्त्र संजीवनी विद्या…नाभि चक्र प्रखंड।

मनोकामना पूर्ति के लिये मन्त्र संजीवनी से नाभि  चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि नाभि चक्र में एनर्जी की कमी मनोकामनाएं पूरी नही होने देती। लोग चाहते कुछ और हैं, मिलता कुछ और है।

इससे निपटने के लिये नाभि चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ शक्ति पालय पालय ॐ*

मन्त्र संजीवनी विद्या…मणिपुर प्रखंड।

सम्मान और सफलता के लिये मन्त्र संजीवनी से मणिपुर चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि मणिपुर चक्र में एनर्जी की कमी असफलता और अपमान की स्थिति पैदा करती है।

काम होते होते रह जाते हैं।

इससे निपटने के लिये मणिपुर चक्र की दसों   पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ तेजस स्वरूपाय रं रं रं*

मन्त्र संजीवनी विद्या… अनाहत चक्र प्रखंड।

रिश्ते बचाने के लिये मन्त्र संजीवनी से अनाहत चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि अनाहत चक्र में एनर्जी की कमी रिश्तों और खुशियों में टूटन पैदा करती है। अपने भी परायों की तरह व्यवहार करते हैं।

इससे निपटने के लिये अनाहत चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ सम्मोहन शिवाय यं यं यं*

मन्त्र संजीवनी विद्या…विशुद्धि चक्र प्रखंड।

कला के क्षेत्र में सफलता के लिये मन्त्र संजीवनी से विशुद्धि चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि विशुद्धि चक्र में एनर्जी की कमी कलाकारों की असफलता का कारण बनती है। ज्यादातर तो उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका ही नही मिल पाता।

इससे निपटने के लिये विशुद्धि चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ आत्मने हं हं हं*

मन्त्र संजीवनी विद्या…आज्ञा चक्र प्रखंड।

विफलताओं से बचने के लिये मन्त्र संजीवनी से आज्ञा चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि आज्ञा चक्र में एनर्जी की कमी कन्फ्यूजन और विफलताएं पैदा करती है। अपने ही फैसले नुकसान का कारण बन जाते हैं।

इससे निपटने के लिये आज्ञा चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ गुरु तत्वाय नमः ॐ*

मन्त्र संजीवनी विद्या… थर्ड आई चक्र प्रखंड।

पढ़ाई में सफलता के लिये मन्त्र संजीवनी से थर्ड आई चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि थर्ड आई चक्र में एनर्जी की कमी याददाश्त और आंखों को कमजोर करके पढ़ाई से भटकन पैदा करती है। मोबाइल व  टी वी पर अधिक समय बिताना इसका मुख्य कारण है।

इससे निपटने के लिये थर्ड आई चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ ऐं ऐं ऐं ॐ*

 

मन्त्र संजीवनी विद्या… सौभाग्य चक्र प्रखंड।

भाग्य जगाने के लिये मन्त्र संजीवनी से सौभाग्य  चक्र को सिंचित करें… शिवप्रिया।

अक्सर देखने में आता है कि सौभाग्य के कारक सहस्रार चक्र में एनर्जी की कमी दुर्भाग्य और दैवीय विपत्तियां पैदा करती है। कई बार तो सारा जीवन संघर्ष में बीत जाता है।

इससे निपटने के लिये सौभाग्य चक्र अर्थात  सहस्रार चक्र की सभी  पंखुड़ियों और सुरक्षा पटल पर मन्त्र शक्ति का सिंचन किया जाए तो बड़े उत्साह जनक नतीजे देखने में आते हैं। इसके लिये मन्त्र संजीवनी की तकनीक का सहारा लिया जाना आसान उपाय है।

मन्त्र- *ॐ ॐ ॐ ब्रह्मांड नमः*