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कोरोना बचावः कपूर से सुरक्षा कवच बनायें

corona

सभी अपनों को राम राम
कोरोना से डरे नहीं, सावधानी बरतें.
कोरोना विषाणुओं से बचने के लिये अपने साथ कपूर रखें. बीच बीच में थोड़ा कपूर हाथ में लेकर उसे हथेलियों में रगड़ें. कपूर लगी हथेलियों से शरीर में पहने कपड़ों को सिर से पैर तक एेसे झाड़ें जैसे धूल झाड़ रहे हों. इससे कपूर का सुरक्षा कवच बनेगा. विषाणु समाप्त होंगे. बीच बीच में कपूर को गहरी सांस लेकर सूंघते रहें. इससे शरीर के भीतर के भी विषाणु खत्म होंगे.
नमक पानी का स्नान रोज करें. इससे आभामंडल की सफाई होती है. हर तरह की नकारात्मकता खत्म होती है. नमक में नकारात्मक उर्जाओं को छिन्न भिन्न करने का प्राकृतिक गुण होता है. पानी नकारात्मक उर्जाओं को डिस्पोजय यूनिट सीवर में बहाकर खत्म कर देता है. नमक पानी स्नान से गुस्सा, तनाव, बीमारी, ग्रह-नक्षत्र सहित सभी तरह की नकारात्मक उर्जायें आभामंडल से निकल जाती हैं.
नमक स्नान के लिये पूरे पानी में नमक न मिलायें. किसी बर्तन में आधा- एक लीटर पानी लें. उसमें दो चम्मच नमक मिलायें. पहले उससे नहायें. फिर सामान्य स्नान करें. जो लोग सिर से नहा रहे हैं वे नमक पानी सिर से डालें. जो कंधे से नहा रहे हैं वे कंधे से डालें.
नमक पानी से स्नान के बाद एक बाल्टी पानी में थोड़ा कपूर मिला लें. उससे नहा लें. इससे शरीर को कोरोना सहित सभी तरह के विषाणुओं से बचाने वाले सुरक्षा कवच का निर्माण होगा.
जो लोग संजीवनी उपचारक हैं वे दुनिया से कोरोना को खत्म करने के लिये प्रतिदिन प्रतिरक्षा उर्जाओं का ब्रह्मांड में प्रक्षेपण करें.
इसके लिये…
दोनों हाथों को आपस में रगड़ें. उन्हें दुआ मांगने वाली मुद्रा में सामने फैलायें. फिर भगवान शिव से नारंगी रंग की रोग नाशक उर्जाओं की मांग करें. कहें- हे मृत्युंजय महादेव मेरे हाथों में महामारी को नष्ट करने में सक्षम नारंगी उर्जायें प्रदान करें. आपका धन्यवाद. उसके बाद *ऊं ह्रौं जूं, सः सर्व जनम् पालय पालय सः जूं ह्रौं ऊं मंत्र का जप करें. जब हथेलियों पर उर्जाओं का भारीपन महसूस होने लगे तब उर्जाओं से महामारी नष्ट करने का आग्रह करें. कहें- मृत्युंजय महादेव द्वारा प्राप्त दिव्य उर्जाओं मै आपको अंतरीक्ष में प्रक्षेपित कर रहा हूं. वहां से अनंत गुना विस्तारित होकर धरती पर फैल जायें. और सब जगह से कोरोना नामक विषाणुओं का नाश करें. आपका धन्यवाद.*
निश्चित ही आप द्वारा संप्रेषित अदृश्य उर्जायें धरती पर फैले कोरोना के अदृश्य विशाणुओं को नष्ट करने में प्रभावी साबित होंगी. एेसा रोज करें.
कोरोना विषाणु बहुत ही कमजोर होते हैं. किंतु बचाव की दवा न मिल पाने के कारण यह लोगों में भय का कारण बना है. कोरोना के सम्पंर्क में आने वाले हर व्यक्ति को खतरा नही होता. जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर है सिर्फ उन्हीं पर कोरोना हावी होता है. जिनका प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) मजबूत होता है उन्हें कोरोना से कोई खतरा नही.
जो संजीवनी उपचारक हैं या किसी भी विधा के हीलर हैं वे अपना और अपनों का प्रतिरक्षा तंत्र नियमित मजबूत करें.
इसके लिये आभामंडल की सफाई करें. फिर नीचे के स्टेप पूरे करें.
1. अनाहत चक्र के द्वारा छाती,पसलियों और थाइमस को साफ करके उपचारित करें. उन्हें हरी और बैंगनी उर्जा से उर्जित करें. उर्जाओं को प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करने का निर्देश दें.
2. विशुद्धि चक्र की सफाई करके उसे हरी और बैंगनी उर्जा से उर्जित करें. उर्जाओं को प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करने का निर्देश दें.
3. विशुद्ध चक्र के नीचे लघु विशुद्धि चक्र होता है. उसके जरिये थाइमस की सफाई करें. फिर हरी व बैंगनी उर्जा से उर्जित करें. उर्जाओं को प्रतिरक्षा तंत्र का पुनर्जनन करने का निर्देश दें.
4. दोनो प्लीहा चक्रों को साफ करके हरी, बैंगनी उर्जा से उर्जित करें.
5. आज्ञा चक्र को साफ करके उर्जित करें.
6. अनाहत चक्र के जरिये हरी नारंगी उर्जाओं से फेफड़ों की सफाई करें. फिर उन्हें हरी, नारंगी, बैंगनी, नीली उर्जा से उर्जित करके खून की सफाई हेतु डायलिसिस करें.
7. नाभि और मूलाधार चक्रों को भी उपचारित करें.
उर्जा का यह उपचार न सिर्फ कोरोना की गरफ्त में आने से बचाने वाला है बल्कि कोरोना मरीज को ठीक करने वाला भी है. सभी संजीवनी उपचारक सतर्क रहें. उन्हें कहीं भी किसी कोरोना पीड़त का पता चला तो उसके ठीक होने तक इस विधि से संजीवनी उपचार करें. बहुत ही उत्साह जनक नतीजे मिलेंगे.
इसे हफ्ते में कम स कम दो बार दोहरायें.
उर्जा का यह उपचार दूसरे रोंगों से भी बचाएगा. इसे करते रहना चाहिये.
कोरोना संक्रमण से बचने के लिये स्वच्छता सम्बंधी निर्देशों का पालन करते रहें.
हाथ मिलाने की बजाय नमस्कार करें.
सबका जीवन सुरक्षित हो
यही हमारी कामना है.