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लक्ष्मी-कुबेर साधना का विधान

My Post (1).jpg17 अक्टूबर 2018
सभी अपनों को राम राम
पीढ़ियों से चले आ रहे आर्थिक संकट को दूर करने के लिये लक्ष्मी-कुबेर साधना का विधान शास्त्रकाल कारगर होता आया है. श्रद्धा-विश्वास से अपनाया गया विधान कभी विफल नही जाता. दरिद्र योग लेकर जन्में लोग भी इसे अपनाकर जीवन में समृद्धि प्राप्त कर ही लेते हैं.

ये साधना मानव जीवन की उच्च साधनाओं में आती है. इसे अपनाते समय प्रपंच और पाखंड से बचना चाहिये. बेवजह की आलोचनाओं से दूर रहना चाहिये.
इस साधना के लिये धनतेरस और दीपावली का मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ होता है. लेकिन साधक इनके अलावा किसी भी शुभ मुहूर्त में ये साधना सम्पन्न कर सकते हैं.
यहां मै आगामी धनतेरस और दीपावली पर इस साधना का विधान बता रहा हूं. ध्यान से समझें और श्रद्धा पूर्वक अपनायें.

साधना विधान….
दशहरा से करवा चौथ के मध्य लक्षमी-कुबेर यंत्र को सिद्ध कर लें. यंत्र सिद्धी का विधान मैने कल बताया था. यदि किसी कारण वश खुद यंत्र सिद्ध नही कर पा रहे हैं तो किसी सक्षम विद्वान से सिद्ध करा लें.


धनतेरस के दिन कुबेर की साधना का विधान….
मंत्र-
ऊं. यक्षाय कुबेराय वैष्णवाय धन धन्याधदि पतयै धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा
1. स्नान करके साफ सुथरे स्थान पर उत्तर मुख होकर आराम से बैठ जायें. भगवान गणेश का स्मरण करें. सामने पीला वस्त्र बिछा लें. उस पर सिद्ध लक्ष्मी-कुबेर यंत्र स्थापित करें. सरसों के तेल का दीपक जला लें. उसमें थोड़ा कपूर चूरा करके डाल लें. धूप आदि की सुगंध कर लें. फूल चढ़ायें. भोग अर्पित करें. पश्चात इलाइची अर्पित करें.

2. अपने आभामंडल और उर्जा चक्रों को साधना सिद्धी के लिये तैयार करें. कहें- मेरे दिव्य आभामंडल, उर्जा चक्रों और कुंडलिनी आप सब ब्रह्मांड में संजीवनी शक्ति के स्रोत के साथ जुड़ जायें. वहां से दैवीय उर्जाओं को ग्रहण करके खुद को उपचारित करें. स्वस्थ होकर साधना सिद्धी हेतु सक्षम बनें. मुझे सिद्ध साधक की क्षमतायें प्रदान करें. आपका धन्यवाद.
उसके बाद 5 बार गायत्री मंत्र का जप करते हुए 10 बार प्राणायाम करें.

3. दिव्य संजीवनी शक्ति से शक्तिपात का आग्रह करें. कहें- हे दिव्य संजीवनी शक्ति मुझ पर दैवीय उर्जाओं का शक्तिपात करके मेरे तन मन मस्तिष्क आभामंडल उर्जा चक्र और कुंडलिनी का जागरण करें. मुझे साधना सिद्धी हेतु सक्षम बनायें. आपका धन्यवाद.
उसके बाद 5 मिनट ऊं. ह्रौं.जूं. सः मंत्र का जप करते हुए प्राणायाम करें.

4. शिवगुरू से साक्षी बनने का आग्रह करें. कहें- देवों के देव महादेव मेरे मन कोे सुखमय शिवाश्रम बनाकर इसमें सपरिवार विराजमान हों. आपको साक्षी बनाकर मै कुबेर साधना सिद्ध कर रहा हूं. साधना सिद्धी हेतु मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें.
फिर 3 बार कहें- हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं मुझ शिष्य पर दया करें. आपको साक्षी बनाकर कुबेर साधना कर रहा हूं. मेरे द्वारा किये जा रहे मंत्र जाप को कुबेरस्वरूप में स्वीकार करें, साकार करें. आपका धन्यवाद.

5. भगवान कुबेर ये समृद्धि का आग्रह करें. कहें- हे भगवान कुबेर मेरे मन मंदिर में विराजमान होकर मेरे द्वारा किये जा रहे साधना मंत्र जप को स्वीकार करें साकार करें. आपका धन्यवाद.

6. यंत्र से सिद्धी का आग्रह करें. कहें- हे दिव्य लक्ष्मी-कुबेर यंत्र आपको मेरे लिये सिद्ध किया गया है. आप मेरी भावनाओं से जुड़कर मुझे भगवान कुबेर की समृद्धिदायी उर्जाओं के साथ जोड़ें रखें. कुबेर सिद्धी प्राप्त करने में मेरी सहायता करें.

7. मंत्र से आग्रह करें. कहें- हे दिव्य कुबेर मंत्र आप मेरी भावनाओं से जुड़कर अपने बीज मंत्रों को मेरे रोम रोम में स्थापित करें और मेरे लिये सिद्ध हो जायें. ब्रह्मांड से भगवान कुबेर की समृद्धिदायी उर्जाओं से मुझे अच्छादित करें. और कुबेर सिद्धी प्रदान करें. आपका धन्यवाद.

8. उसके पश्चात् मंत्र का 1 घंटे जप करें. इस तरह धनतेरस के दिन 3 बार साधना सम्पन्न करें.
श्रद्धा विश्वास को बनायें रखें. जीवन में समृद्धि व्याप्त होने का प्रशन्नता पूर्वक इंतजार करें.

आगे मै दीपावली की रात लक्ष्मी-कुबेर यंत्र के द्वारा लक्ष्मी सिद्धी का विधान बताउंगा.
सबका जीवन सुखी हो यही हमारी कामना है.
शिव शरणं
जय माता दी

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