Category Archives: shiv sadhak

पर्मावतार श्री कृष्ण ….1

krishan 1.png

भगवान ने देवकी के गर्भ से तीसरी बार जन्म लिया

राम राम मैं शिवप्रिया।

आगे की कथा सुनाते हुए सुकदेव जी ने मुनियों को बताया -“ जब देवकी ने अपने पुत्र को अपने पति वासुदेव के हाथों में देखा तब पुत्र रूपी भगवान के तेज़ से उनकी आँखे चौंधिया गयी। वह तुरंत समझ गयी की यह पुत्र और कोई नही बल्कि भगवान विष्णु स्वयं हैं। देवकी के चेहरे पर एक संतुष्टि और शांति छा गयी और फिर उन्होंने भगवान की स्तुति की और उन्हें प्रणाम किया। भगवान को देख कर देवकी भावुक हो गयी और भगवान का धन्यवाद किया उनकी इतनी अलौकिक लीला के लिए।

फिर भगवान कृष्ण ने देवकी से कहा- ‘देवी! स्वयंभुव मन्वन्तर में जब आपका पहला जन्म हुआ था, उस समय आपका नाम था पृश्नि और वासुदेव जी सुतपा नाम के प्रजापति थे।

आप दोनो हृदय के बहुत पवित्र थे। जब ब्रह्माजी ने आप लोगों को संतान उत्पन्न करने की आज्ञा दी, तब आप दोनो ने इंद्रियों का दमन करके तपस्या की।

आप दोनो ने देवताओं के 12 हज़ार वर्षों तक कड़ी तपस्या की, ना ही मौसम का कोई असर हुआ और ना ही भूख प्यास आपकी तपस्या में विघ्न डाल पायी। जो भी सूखी पत्तियाँ मिल जाती थी, उन्हें खा कर गुज़ारा कर लेते थे। आप दोनो ने शांत मन के साथ पवित्र चित्त के साथ मेरी तपस्या की।

कठिन तपस्या देख कर मैंने आपको इसी रूप में दर्शन दिए थे और मनवांचित वर माँगने को बोला था। तब आपने मुझे अपनी संतान के रूप में माँगा था। उस समय मै आप दोनो के पुत्र पृश्निगर्भ के नाम से विख्यात हुआ।

उसके अगले जन्म में देवकी आप अदिति और वासुदेव कश्यप हुए। मैंने आपके पुत्र उपेन्द्र के नाम से जन्म लिया। अब मै तीसरी बार आपके गर्भ से जन्मा हूं। इस जन्म में मैंने आप दोनो के पुत्र कृष्ण के रूप में जन्म लिया है। मैं चाहता हूँ आप मुझे पूर्णतः रूप से पुत्र वाला प्रेम और स्नेह दें। आप दोनो को इस प्रकार परम धाम प्राप्त होगा।’

इतना बताकर भगवान ने एक साधारण शिशु का रूप ले लिया।

क्रमशः!