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कृष्ण अवतार…..2

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उफनती यमुना ने कृष्ण के लिये रास्ता दे दिया

राम राम मैं शिवप्रिया।
श्री सुकदेव जी आगे बोले
देवकी को बीते 3 जन्मों की बात बताकर भगवान ने पुनः साधारण शिशु का रूप ले लिया।
उसी समय नंद बाबा की पत्नी यशोदा की गर्भ से योगमाया ने जन्म लिया।यशोदा को इतना तो मालूम हुआ कि संतान हुई है परंतु वो यह नहीं जान सकीं की पुत्र हुआ है या पुत्री। क्योंकि उससे पहले ही योगमाया ने सबको अचेत कर दिया था। उधर जेल में भगवान की लीला से सभी द्वारपाल और पुरवासी अचेत होकर सो गए। बंदीग्रह के सभी दरवाज़े बंद थे। उसमें बड़ी बड़ी ज़ंजीर और ताले लगे थे। उनके बाहर जाना असम्भव सा था। परंतु वासुदेव जी भगवान कृष्ण को अपनी गोद में लेकर जैसे जैसे उन दरवाज़ों के पास पहुंचते जा रहे थे, वैसे वैसे दरवाज़े खुलते जा रहे थे। ठीक वैसे ही, जैसे सूर्योदय होते ही अंधकार दूर हो जाता है। जब वासुदेव जी बाहर निकले तब उन्होंने देखा भारी वर्षा हो रही थी।
तब शेषनाग जी अपने फ़न फैलाकर प्रभु के और वासुदेव जी के ऊपर कर दिए और उनके पीछे-पीछे चलने लगे।
उन दिनों भारी वर्षा की वजह से यमुना जी ने विराट रूप ले रखा था, परंतु भगवान को वासुदेव जी की गोद में देखकर यमुना जी ने उन्हें प्रणाम किया और उन्हें जाने के लिए मार्ग दिया। जब वासुदेव जी नन्द बाबा के घर पहुंचे, तब उन्होंने देखा वहाँ भी सब के सब गोप अचेत सो रहे हैं। उन्होंने अपने पुत्र को यशोदा के बग़ल में सुला दिया और यशोदा की पुत्री को लेकर वे बंदीग्रह में वापस आ गये।
जेल में पहुँच कर वासुदेव जी ने उस पुत्री को देवकी के साथ सुला दिया और अपने पैरों में बेड़ियाँ डाल ली।
पहले की तरह सभी दरवाज़े बंद हो गये।
क्रमशः