माहवारी के दिनों में ध्यान साधना खतरनाक भी
2 जून 2016
समस्या आपकी समाधान गुरु जी के….20
आप सबको शिवप्रिया का राम राम,
हमने कुछ लोगों की समस्याओं के समाधान गुरु जी से प्राप्त किये हैं. अगर आप में से किसी की समस्या यहां दी समस्याओं से मिलती जुलती है तो आप भी उनके उपाय अपना सकते हैं.
1. Ashwani Dwivedi, 28 May at 03:19, राम राम
मेरा एक प्रश्न है, औरतों को मासिक धर्म आने पर हनुमान चालीसा पढ़ना बंद क्यों कर देना चाहिए.
गुरु जी का समाधान…
नही करना चाहिये. बल्कि उन दिनों में किसी भी तरह की पूजा पाठ या ध्यान साधना न करें. बात सिर्फ रक्त बहाव पर कंट्रोल की नही है, बल्कि उन दिनों में महिलाओं के हारमोंस अनिश्चित व्यवहार करते हैं. जिसके कारण उर्जा का भारी उतार चढ़ाव होता है. एेसे में पूजा पाठ, ध्यान साधना से प्राप्त उर्जाओं के अव्यवस्थित होने का खतरा रहता है. जिसके दुष्परिणाम बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं.
हनुमान चालीसा से मिलने वाली उर्जा का रंग लाल होता है. जिसमें मानव सेल्स का विस्तार करने का स्वाभाविक गुण भी होता है. माहवारी के समय दूषित सेल्स का निष्कासन हो रहा होता है. एेसे में सेल्स का विस्तार विषैली कोशिकाओं को अनियंत्रित कर सकता है. जिसके आगे चल कर ट्यूमर, कैसंर, रसौली या गांठों में बदलने या गायनिक प्रोबलम की आशंका रहती है.
इसी तरह गायत्री मंत्र का जाप भी उन दिनों में बड़े नुकसान का कारण बन सकता है. गायत्री मंत्र के देवता सूर्य हैं. जिनकी पीली उर्जा प्रत्यक्ष रूप से मिलती है. गायत्री मंत्र का जाप करते ही बहुत बड़ी तादाद में ये उर्जा प्राप्त होती है. पीली उर्जा का स्वभाव भी विस्तारक होता है. इस कारण माहवारी के समय निष्कासित किये जा रहे विषैले सेल्स के विस्तारित होने का बड़ा खतरा रहा है.
2. Kumar Abhinaw, 19 May at 16:11
राम राम आचार्यजी,
मैं अभिनव।कृप्या मदद किजिये।
ये तस्वीर मेरे ससुर की है।इस वक्त ये बिमार हैं लेकिन बिमारी समझ नहीं रही।ये दिन के 24 घंटो में लगभग 19-20 घंटे केवल सोते रहतें हैं।न किसी से मिलना चाहते हैं,न किसी से बात करना हैं।इस दौरान इन्हें अपने किसी भी जिम्मेदारी की सुझ नहीं रहती।कोई कुछ भी कहे,कोई फक्र नहीं पड़ता।ऐसा लगभग 8-10 दिन रहता है।फिर कुछ दिनों के लिए सब कुछ सामान्य हो जाता है।तब ये कहीं से भी लगता ही नहीं कि ये वही व्यक्ति हैं।ये सिलसिला लगभग 2 वर्ष से चल रहा है।
इन्हें अब तक दो मनोरोग चिकित्सक से भी दिखाया जा चूका है लेकिन हालात जस का तस है। अतः आपसे निवेदन है कि कृप्या इसका कारण बतायें और उचित मार्गदर्शन करें।
आपका धन्यवाद।
गुरु जी का समाधान…
ये डिप्रेशन में हैं. इनके मूलाधार, मणिपुर, अनाहत, आज्ञा, तीसरा नेत्र, सहस्रार और हाथों पैरों के चक्रों को अच्छे से साफ करके उपचारित किया जाये तो ठीक हो जाएंगे. इसमें 6 माह से 1 साल तक का समय लगता है.
यदि इन्हें एेसी दशा से बाहर न निकाला गया तो जल्दी ही इनमें नकारात्मक तत्व हावी होने लगेंगे. तब एेसा प्रतीत होगा जैसे तंत्र, भूत प्रेत ऊपरी बाधा के शिकार हैं. जबकि वास्तव में एेसा होगा नहीं. मगर उस स्थिति में पहुंचने पर इनको ठीक कर पाना मुश्किल होगा.
सबका जीवन सुखी हो यही हमारी कामना है.