मानस शिर्वाचन का विधान….

सूक्ष्म शरीर से केदारनाथ भगवान का शिवार्चन आप भी घर बैठे करें ब्रह्मकमल से शिवार्चन

Kedarnath shivarchan

सभी अपनों को राम राम।
इन दिनों हिमालय साधना करने वाले उच्च साधक घर बैठे भगवान केदारनाथ का मानस शिवार्चन कर रहे हैं। इसके लिये बताए गए विधान को अपनाकर उनके सूक्ष्म शरीर केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। वहां गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग पर ब्रह्मकमल से मानस शिवार्चन सम्पन्न करते हैं।

बताते चलें कि केदारनाथ धाम का गर्भग्रह जहां स्थापित है उसके नीचे अति संवेदनशील पर्वत श्रंखला है। जो उच्च आयाम की विद्धुत धारा जैसी है। यह श्रंखला भूलोक से होती हुई कैलाश पर्वत तक जाती है। इस तरह से कैलाश धाम का उच्च आयाम केदारनाथ धाम के उच्च आयाम से सीधे कनेक्ट है। धरती पर एेसे स्थान गिने चुने ही हैं।

यह पर्वत श्रंखला दैवीय उर्जाओं की अति सुचालक है। इसके जरिये केदारधाम में की गई पूजा अर्चना की उर्जायें कैलाश धाम तक तुरंत पहुंच जाती हैं। वहां से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की दैवीय उर्जाओं की बड़ी तादाद अपने साथ लेकर वापस आती हैं। सभी उर्जायें अपने स्रोत को पहचानती हैं। कैलाश से सकारात्मक उर्जाओं को लेकर लौटी पूजा अर्चना की उर्जायें अपने स्रोत (पूजा अर्चना करने वाले भक्त) के पास ही आती हैं। उनके आभामंडल, उर्जा चक्रों को कैलाश की दैवीय उर्जाओं से भर देती हैं। जिससे पूजा अर्चना करने वाले भक्तों के जीवन की रुकावटें खत्म होती हैं, दुख खत्म होते हैं। तन मन धन की उन्नति प्रशस्त हो जाती है।

आप सब भी इसका लाभ उठाएं। किस साधक को इस साधना से कितना लाभ हुआ यह जानने के लिये सभी साधक अपने रोज के अनुभव नियमित लिखकर पोस्ट करेंगे। जो न लिख पायें वे अपने आडियो रिकार्ड करके पोस्ट करें। साधना से बड़ी तादाद में उर्जा प्राप्त होगी। उसे संतुलित न किया जाये तो आभामंडल में उर्जाओं के असंतुलन का खतरा रहेगा। इसलिये मै पोस्ट हुए अनुभवों के आधार पर हर दिन साधकों की एनर्जी को बैलेंस करता चलुंगा।

मानस साधना के लिये मै सुबह 7 बजे अपने सूक्ष्म शरीर के माध्यम से केदारनाथ धाम पहुंचुंगा। वहां से ग्रुप में शामिल साधकों के सूक्ष्म शरीर आमंत्रित करुंगा। उनके साथ मानस शिर्वाचन करुंगा। इसके लिये आप सभी नीचे दिया विधान अपनायें।

मानस शिर्वाचन का विधान…. साधना का समय- 11 मई 2020 दिन सोमवार से प्रतिदिन सुबह 7.20 से 8 बजे तक। अमृत संजीवनी साधना के तुरन्त बाद। यह साधना एक सप्ताह तक चलेगी।

साधना स्थल पर सुगंध कर लें। स्नान आदि करके आराम से बैठ जायें। आंखे बंद कर लें। भगवान शिव से कहें- हे शिव आप मेरे गुरी हैं मै आपका शिष्य हूं मेरा नमन स्वीकारें। मुझे अपनी शरण में लें। आपको साक्षी बनाकर मै एनर्जी गुरू श्री राकेश आचार्या द्वारा बताये विधान के अनुसार भगवान केदारनाथ का मानस शिर्वाचन सम्पन्न कर रहा हूं। इसे स्वीकार करें, साकार करें। मेरा, मेरे परिवार का और धरती पर रह रहे सभी जीवों की रक्षा करें। सभी को महामारी और दुखों से मुक्त करें। आपका धन्यवाद।

अपने सूक्ष्म शरीर से कहें- मेरे दिव्य सूक्ष्म शरीर आप इसी क्षण केदारधाम पहुंचे वहां एनर्जी गुरू जी के साथ शिर्वाचन सम्पन्न करें। भगवान केदारनाथ के द्वारा कैलाश की दैवीय उर्जाओं को ग्रहण करके अपने भीतर स्थापित करें। मेरे सभी आभामंडल, उर्जा चक्रों, कुंडलिनी सहित रोम रोम का जागरण करें। मेरे सौभाग्य का जागरण करें। मुझे हजारों लोगों की तन मन धन से सेवा सहायता करने योग्य सक्षम बनायें। शिर्वाचन सम्पन्न होने के बाद आप स्वयं वहां से वापस मेरे स्थुल शरीर में आ जायें। आपका धन्यवाद।

उसके बाद तम्बी और गहरी सांसे लें। सांसों के जरिये आपका सूक्ष्म शरीर यात्रा करके केदारधाम पहुंचेगा। वहां मंदिर के बाहर स्थापित नंदी जी को प्रणाम करके मंदिर के गर्भग्रह में प्रवेश करें। बायीं तरफ की दीवार पर एक बड़े आले में अखंड दीप जलता दिखेगा। उसे प्रणाम करें।

पूरी मानस पूजा के दौरान ऊं नमः शिवाय शुभम कुरू शिवाय नमः ऊं मंत्र का मानसिक जप करते रहें।

अंदर जाकर गर्भ ग्रह में शिवलिंग के समक्ष बैठ जायें। आप पाएंगे कि वहां पूजा की सारी सामग्री पहले से ही रखी है। पानी का पात्र उठाकर जल अर्पित करें। उसके बाद बारी बारी से दूध, फिर दही, घी, शहद, चीनी, चंदन का पानी अर्जित करें। उसके बाद दोनो हाथों से शिवलिंग पर घी का खूब अच्छी तरह से लेप करें। माना जाता है कि भीम के गदा प्रहार से भगगवान को चोट गली थी। घी के लेपन से उन्हें चोट की तकलीफ से राहत मिलती है।

ऊं नमः शिवाय शुभम कुरू शिवाय नमः ऊं मंत्र का जप करते रहें।

घी लेपन के बाद पास रखे पुष्प अर्पित करें। बेलपत्र, भांग धतुरा अर्पित करें। पास रखे मिष्ठान, फलों का भोग लगायें। पान खिलायें। सुपारी से दक्षिणा अर्पित करें।

पास में ही एक सुंदर टोकरी में 1001 ब्रह्म कमल पुष्प रखे मिलेंगे। उनसे शिवार्चन आरम्भ करें। ब्रह्म कमल में अमृत की सूक्ष्म उर्जा होती है। जो अपरिपक्व होने पर फूल तोड़ने वालों को बेहोश कर देती है। केदारनाथ क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों पर चंट्टानों के बीच अटकी बर्फ में उगे इस फूल को अनाड़ीपन से तोड़ने वाले कुछ के प्राण चले जाते हैं। ऊं नमः शिवाय शुभम कुरू शिवाय नमः ऊं मंत्र के साथ एक एक पुष्प अर्पित करें। उस बीच मै शिव सहस्त्र नाम जप करूंगा। मेरा जप पूरा होते होते आप द्वारा 1001 ब्रह्म कमल अर्पित किये जा चुके होंगे। साधकों को इसका अनुमान अपने आप हो जाएगा। शिवार्चन पूरा होने के बाद भगवान को धन्यवाद देकर वहां माथा टेकें।

उसके बाद सूक्ष्म शरीर की स्थुल शरीर में वापसी होंगी। आप पाएंगे कि तब तक 8 बज चुके होंगे।

।। शिव शरण ।।