
सभी अपनों को राम राम।
बहुत खुशी की बात है कि इस बार नवरात में अधिकांश साधकों ने सौभाग्य साधना बहुत अच्छे से सम्पन्न की। वे अपने अखंड सौभाग्य के लिये दैवीय ऊर्जाएं प्राप्त करने में सफल रहे।
शिव गुरु की कृपा से यह साधना उनके जीवन को बदलने वाली सिद्ध होगी।
इस बीच कुछ साधकों ने सौभाग्य यन्त्र को लेकर कुछ सवाल पूछे हैं। जिनमें से हम एक मनदीप कोली के सवाल के जरिये सौभाग्य यन्त्र की अनिवतयता समझाने की कोशिश कर रहे हैं।
Mandeep Koli: का सवाल…
यन्त्र न होने से सिद्धि में कोई फरक?
गुरूजी आपने आखरी पोस्ट में लिखा है की
“सौभाग्य हवन सम्पन्न करते ही साधना पूर्ण होगी। उसके बाद सौभाग्य यन्त्र के घर पहुंचने का इंतजार करें। यन्त्र के संपर्क में आते ही सौभाग्य सिद्धि प्राप्त होने लगेगी। ”
१) यन्त्र न लिए जाने से …. क्या मेरी की गयी साधना की सिद्धि बरक़रार रहेगी ? …
जवाब……
सौभाग्य यन्त्र सिद्धि के लिये ही यह साधना की जाती है। इसे अखंड सौभाग्य यन्त्र कहा जाता है। सौभाग्य एक दिन के लिये नही होता। बल्कि निरन्तर काम करना चाहिये। तभी इसका पर्याप्त सुख मिल पाता है।
सिद्ध हुआ यन्त्र साधना की ऊर्जाओं को अपने भीतर संचित कर लेता हैं। फिर उन ऊर्जाओं को लंबे समय तक साधक के जीवन में संचारित करता रहता हैं।
अन्यथा साधना के पश्चात साधक द्वारा जानबूझ कर या अनजाने में किया गया गुस्सा या आलोचनाएं सौभाग्य की ऊर्जाओं को तोड़ देती हैं।
सिद्ध सौभाग्य यन्त्र साधक को पुनः उन ऊर्जाओं के साथ जोड़ लेता है। जिससे वे साधना का लाभ लंबे समय तक उठा सकते हैं।
इसलिये कुछ साधनाओं में यन्त्र की अनिवार्यता होती है। खासतौर से राज साधना और सौभाग्य साधना में यन्त्र अनिवार्य होते हैं। इन्हें सिद्ध करने में वूद चंदन की लकड़ी सहित कई तरह की मंहगी सामग्री से यज्ञ का विधान है। उक्त लकड़ी 60 से 70 हजार रुपये किलो तक उपलब्ध हो पाती है। इसी तरह कई अन्य महंगी सामग्री का उपयोग होता है। यदि सिर्फ एक सौभाग्य यन्त्र या राज यन्त्र सिद्ध किया जाए तो उस पर तकरीबन डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्च संभावित होता है।
सबका जीवन सुखी हो,
यही हमारी कामना है।