सभी अपनों को राम राम
हमारी कुछ छोटी क्रियायें बड़ी बेचैनी का कारण बनती हैं. क्योंकि उनसे आभामंडल में विकार उत्पन्न होता है.
टूटे बाल-
कंघी करते समय या नहाते समय टूटने वाले बालों को कई लोग इधर उधर फेंक देते हैं. इस कारण वे प्रायः बेचैन या बीमार बने रहते हैं. दरअसल बालों में एनर्जी का घनत्व बहुत अधिक होता है. टूटकर अलग हो जाने के बाद भी वे आभामंडल की उर्जा से टुड़े रहते हैं. एेसे में बाल जब इधर उधर पड़े उड़ते रहते हैं तो अपने साथ जुड़े आभामंडल की उर्जाओं को खींचते रहते हैं. जिससे आभामंडल की उर्जा बार बार असंतुलित होती है. ये बेचैनी का एक बड़ा कारण होता है.
साथ ही बालों के बिखराव से खिंचकर आभामंडल कई बार फट जाते हैं. ये असफलताओं और बीमारियों का बड़ा कारण बनता है.
बालों उर्जाओं का घनत्व अधिक होने के कारण ही ब्लैक मैजिक करने वाले उनका दुरुपयोग करते हैं. किसी के बालों के जरिये उसका आभामंडल दूर बैठकर भी नियंत्रित किया जा सकता है.
टूटे बालों को इकट्ठा करके उन्हें धो दें. धोने से आभामंडल से उनका लिंक टूट जाता है. उसके बाद उन्हें डस्टविन में फेंक दें.
जब कभी बाल कटवाने सैलून में जायें तो वहां से लौटकर नमक के पानी से तुरंत नहायें. आभामंडल को बिगड़ने से बचाने के लिये ये बहुत जरूरी है. क्योंकि सैलून में कटे बालों के जरिये तमाम लोगों के आभामंडल एक दूसरे में मिक्स हो जाते हैं. खराब आभामंडलों की दूषित उर्जायें दूसरों को भी प्रभावित कर देती हैं.
कटे या टूटे नाखून-
बालों की तरह नाखून की उर्जाों का घनत्व भी अधिक होता है. इसी कारण ये भी तेजी से बढ़ते हैं. शरीर से अलग होने के बाद भी नाखून आभामंडल की उर्जाओं से जुड़े रहते हैं. जब उन्हें इधर उधर फेंक दिया जाता है तो वे आभामंडल की उर्जाओं को उलझाते रहते हैं. जिससे आभामंडल की आकृत्ति बिगड़ती है. यह स्थिति बेचैनी और बीमारी का बड़ा कारण बनती है. नाखून के साथ उलझे आभामंडल की उर्जायें कई बार फट जाती हैं. जिसके कारण लोगों के जीवन में बार बार असफलतायें उत्पन्न होती हैं.
जब भी नाखून टूट जायें या उन्हें काटकर अलग करें तो इधर उधर न फेकें. उन्हें धोकर आभामंडल के साथ उनका लिंक खत्म करें. फिर डस्टविन में फेकें.
सबका जीवन सुखी हो, यही हमारी कामना है.
शिव शरणं