जन्माष्टमी पर समृद्धि-सौभाग्य पोटली के साथ करें राजसुख से मोक्ष तक की साधना

जन्माष्टमी में सिद्ध की गई सौभाग्य- समृद्धि पोटली कलह, विवादों, अदालती झंझटों, व्यवसायिक उलझनों की उर्जाओं को भी समाप्त करने में सक्षम होती है। जिससे आपस में प्रेम बढ़ता है। बंधन टूटते हैं। सम्मान बढ़ता है। राजसुख का आकर्षण होता है। जीवन उत्थान होता है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में सिद्ध हुई समृद्धि-सौभाग्य पोटली से प्राप्त होने वाली दैवीय उर्जायें लोगों के जीवन में कर्म और भाग्य की परिस्थितियां उत्पन्न करने में सक्षम होती हैं। जिसके मुख्य लाभ आगे दिये परिणामों के रूप में प्रदर्शित होते हैं।
-सौभाग्य का जागरण
-समृद्धि की स्थापना
-राजसुख का आकर्षण
-मान सम्मान में बढ़ोत्तरी
-प्रेम – प्यार का सुख
-विवाह और संतान का सुख
-कलह/विवादों से मुक्ति
-बंधन योग से मुक्ति


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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात ब्रह्मांड में सकारात्मक उर्जाओं का शानदार बदलाव दिखता है। ब्रह्मांड से आकर अलौकिक उर्जाएं धरती के वातावरण में फैल जाती हैं। इनको ग्रहण करके जीवन में सफलता, समृद्धी, सुरक्षा ही नही राजसुख भी स्थापित कर सकते हैं। जीवन के सभी सुखों को भोगते हुए मोक्ष तक पहुंचा जा सकता है।
इन दैवीय ऊर्जाओं का लाभ उठाने के लिये विद्वान अलग अलग विधान अपनाते हैं।
वे ब्रह्मांड की अलौकिक ऊर्जाओं को ग्रहण करके जीवन में फलित करने के लिए उर्जा उपकरण के रूप विभिन्न तरह की मालाओं, दिव्य वस्तुओं, यंत्रों, वनष्पतियों आदि का उपयोग करते हैं।
जन्माष्टमी की रात सिद्ध सौभाग्य पोटली भी ऐसा ही एक उर्जा उपकरण है। जो दुनिया का भरण पोषण करने वाले और मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण स्वरूप की उर्जाओं को संकलित करती है। फलित करती है।
जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर पोटली सिद्ध कर लें। उसके बाद कभी भी उसका उपयोग करके सुख, समृद्धि भोग-मोक्ष की कामना सिद्ध कर सकते हैं।
सिद्ध पोटली जन्माष्टमी के बाद भी अनेकों साधनाओं में उपयोग की जाती है।
इस पोटली को साथ रखकर की जाने वाली साधनाओं, कामनाओं में बड़े ही उत्साहजनक परिणाम मिलते हैं।

सिद्ध समृद्धि-सौभाग्य पोटली…
इसमें सूखी धनिया, अक्षत चावल, दूब घास के तिनके, पीली हल्दी की 2 अक्षत गांढ़ें, काली हल्दी की 2 अक्षत गांढ़ें,  शुद्ध कपूर ( जिसमें मोम न मिला हो), 58 रुपये के सिक्के, 4 लौंग, 4  हरी इलायची, 2 गोमती चक्र और 2 माला शंख रखे जाते हैं.
पोटली के लिये कपड़े की आकर्षक थैली का उपयोग करें।
देखने में तो ये वस्तुवें साधारण हैं। किंतु जन्माष्टमी पर सिद्ध होने के बाद इनके परिणाम बड़े उत्साहजनक और अलौकिक होते हैं।
जन्माष्टमी में सिद्ध की गई सौभाग्य- समृद्धि पोटली कलह, विवादों, अदालती झंझटों, व्यवसायिक उलझनों की उर्जाओं को भी समाप्त करने में सक्षम होती है। जिससे आपस में प्रेम बढ़ता है। बंधन टूटते हैं। सम्मान बढ़ता है। राजसुख का आकर्षण होता है।
जीवन उत्थान होता है।
इसे घर के साथ ही कार्य स्थल और प्रतिष्ठानों में भी स्थापित किया जा सकता है.
आप इसे खुद भी सिद्ध कर सकते हैं.
ऊपर बताई सभी वस्तुओं को जन्माष्टमी से पहले ही लाकर रख लें।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के समय उनकी उर्जाओं को भगवान श्रीकृष्ण की उर्जाओं के साथ जोड़ दें।
ब्रह्मांड में उतरीं उस दिन की दैवीय उर्जाओं के साथ जोड़ दें।
मां लक्ष्मी और कुबेर जी की उर्जाओॆं के साथ जोड़ दें।
अपने आभामंडल के साथ जोड़ दें। 
उसके बाद श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के समय
श्री कृष्णः शरणं मम्
मंत्र की 1 घंटे जप साधना करें। दशांश हवन कर दें।
अब जीवन उत्थान के लिये सौभाग्य पोटली सिद्ध होकर तैयार है।
यदि आप इसे खुद न कर सकें तो किसी जानकार और सक्षम विद्वान से सिद्ध करा सकते हैं.
मृत्युंजय योग संस्थान से भी करा सकते हैं।
सौभाग्य पोटली जन्माष्टमी उत्सव के समय सिद्ध किया जाता है। सिद्ध होने के बाद कभी भी स्थापित कर सकते हैं।
जिन्होंने बीते साल पोटली घर में स्थापित की थी वे षष्टी या सप्तमी के दिन उसे जल प्रवाह कर दें। जहां नदी, नहर, तालाब, झील नही हैं वहां के लोग पुराने साल की पोटली को बरगद या पीपल के किसी पुराने पेड़ के नीचे रख दें।
उसके बाद नई पोटली की स्थापना जन्माष्टमी या उसके बाद कभी भी कर लें।
जन्माष्टमीः परमावतार भगवान कृष्ण के अवतरण का उत्सव है
उस रात धरती पर अलौकिक दैवीय उर्जायें उतरीं। ऐसी उर्जाओं में जन्में श्रीकृष्ण के कार्य उन्हें भगवान बना गये। वे प्रेमियों के भी भगवान बनें और योद्धाओं के भी।
अध्यात्मिक शोध में पता चलता है कि समय चक्र (एनर्जी टाइम मशीन) के तहत जन्माअष्टमी के दिन धरती की उर्जायें पुनः अलौकिक उर्जाओं से जुड़ जाती हैं। ऐसे में जो लोग कृष्ण जन्मोत्सव को मना रहे होते हैं वे सीधे उस वक्त की उर्जाओं को ग्रहण करने की स्थिति में होते हैं। मन में उत्साह के साथ बनाया गया कृष्णोत्सव उनके जीवन में उस समय की विशाल उर्जाओं को भर देता है। जो आगे चलकर उन्हें कृष्ण सी सफलतायें और उत्साह दिलाती हैं।
बस मन में विश्वास बना रहे।
समय चक्र ( एनर्जी टाइम मशीन) कैसे काम करता है इस पर हम फिर कभी बात करेंगे. अभी तो विलक्षण उर्जाओं को जीवन में स्थापित करने का समय है।
सब ध्यान रखें श्रीकृष्णोत्सव मनाने के उत्साह में फिजूलखर्ची बिल्कुल न करें। इसके लिये एक रूपये भी उधार न लें। अन्यथा वहां की प्राप्त उर्जाओं में उधार और फिजूलखर्ची की उर्जाओं की मिलावट हो जाती है। जिससे दूषित होकर सक्षम उर्जायें भी नकारात्मक परिणाम देती है.
श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिये उत्साह और उमंग मन में होनी चाहिये, सजावट न भी हो तो कोई बात नही।
उनकी उर्जायें तो सिर्फ एक खीरे से भी प्राप्त की जा सकती हैं।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की विधि से तो आप लोग पहले ही परिचित हैं.
सबका जीवन सुखी हो,
यही हमारी कामना है
जय श्रीकृष्ण.
साधना हेल्पलाइनः 9999945010

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