प्रणाम मै शिवांशु
आज की दिव्य साधना में शामिल सभी साधकों को शुभकामनायें.
अवचेतन जाग गया.
शिवतत्व जाग गया.
जीवन जाग गया.
अवचेतन शक्ति साधना का दिन अद्भुत रहा. साधना में गुरुवर ने ग्रहों की दूषित ऊर्जाओं को हथेली और उँगलियों से झाड़कर निकाल देनी की विधि सिखाई. उँगलियों के जरिये तन्त्र की खतरनाक ऊर्जाओं को निकालकर फेंक देना सिखाया. पितरो को मोक्ष की ऊर्जाएं देना सिखाया. आभामण्डल व् मणिपुर चक्र को लॉक करना सिखाया. ऊर्जा चक्रों को विस्तारित करके शक्तिशाली करना सिखाया.
शिव को गुरु बनवाया. हृदय में शिवलिंग स्थापित कराया. शक्तिपात से संजीवनी शक्ति का आकर्षण कराया. साधकों के भीतर शिवतत्व को जाग्रत कराया. उनके ऊर्जा चक्रों और कुंडली में शिवत्व मन्त्र स्थापित कराया.
अवचेतन शक्ति जगाकर साधकों को उसका सुरक्षित उपयोग करना सिखाया.
हर साधको को खुद का भगवान बनना सिखाया. साधकों ने खुद के भगवान को शिव नाम दिया.
साधकों के लिये आज का दिन भाग्य बदलने वाला साबित होगा.
उन्हें किसी की आलोचना न करने और किसी से तर्क न करने की हिदायत है.
गुरुदक्षिणा के रूप में गुरुदेव ने सभी साधकों से उनकी समस्याएं लिखकर मांग लीं. दूसरी गुरुदक्षिणा के रूप में साधक किसी एक गरीब परिवार को हर माह राशन देंगे. जिन साधकों के पास राशन दान के लिये पैसे नही हैं वे राशन दान के लिये गुरुदेव की संस्था से धन ले सकते हैं.
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्
शिव गुरु को प्रणाम
गुरुवर को नमन.
