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छोला छाप विद्वानों से बचने का मतलब है अपनी जिंदगी बचा लेना

31 मई 2016

मेरी कुंडली आरोहण साधना…14

छोला छाप विद्वानों से बचने का अर्थ है अपनी जिंदगी बचा लेना.

प्रणाम मै शिवांशु
कुंडली आरोहण साधना वृतांत के बीच कल की पोस्ट पर ग्रुप के एक साथी ने हमें आरोपित किया है. kundalini mantra नाम की प्रोफाइल से ग्रुप में जुड़े इस साथी का हमें नाम नही मालुम. क्योंकि उन्होंने फेसबुक की प्रोफाइल में अपना नाम छिपाया है.

आगे मै उनका कमेंट उन्हीं के शब्दों में लिख रहा हूं.- * kyo logo ko bna rhe ho.*

इस बारे में आप सबकी राय आमंत्रित है.

मैने जब kundalini mantra नाम की फेसबुक प्रोफाइल को चेक किया तो वहां से संकेत मिला कि ये साथी कुंडली जागरण की क्लासेज या कोर्स या साधना कराते हैं. शायद उन्हें ये बुरा लगा कि कल की पोस्ट में एेसी क्लासेज, साधनाओं में शामिल होने से पहले साधकों को सावधान करने वाला संदेश था. या शायद उन्हें भय हो कि इससे उनकी क्लासेज/ साधना पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ेगा. या शायद उन्होंने विषय, व्याख्या में कोई कमी पाई है, मगर अपने कमेंट में उन्होंने किसी कमी का कोई प्रमाण नही दिया है. वैसे इनकी जगह मै होता तो इस बात से सीख लेता और अपने पास आने वाले साधकों को सावधानी में रखता.

इस बारे में आज हमने पता किया तो मालुम हुआ कि कई लोग पात्रता की जांच किये बिना ही कुंडली जागरण की क्लास या साधना अर्गनाइज करते हैं. उनकी क्लास या साधना में शामिल होने की पात्रता सिर्फ फीस होती है. जो भी फीस दे दे वे उसी की कुंडली जाग्रत कराने निकल पड़ते हैं. ये गलत है, यही पाखंड है. हर व्यक्ति की कुंडली साधना या क्लास में बैठाकर नही जगाई जा सकती. उसके लिये पात्रता अनिवार्य है. 

मेरा एेसे सभी मास्टर व गुरुओं से आग्रह है कि आप फीस जितनी चाहो ले लो, जो देने लायक होगा वो आपके पास आएगा जो नही देने लायक होगा वो नही आएगा. मगर कमाई की हड़बड़ी में किसी की जिंदगी से मत खेलो. लोग आप पर बहुत विश्वास करके आते हैं. उन्हें मुसीबत में मत डालो.

आज मैने इस बारे में गुरुदेव से भी बात की. वे दो दिन पहले मुम्बई में थे. उन्होंने बताया कि बीते संडे को उनके पास एक एेसा व्यक्ति आया जिसकी कुंडली बिगड़ी थी. वो पेशे से इंजीनियर रहा है. उस व्यक्ति ने गुरुवर को अपनी समस्या के रूप में जो बताया वो सबके लिये सतर्कता का विषय है. पीड़ित के मुताबिक वे प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी पर थे. 12 साल पहले उन्होंने एक कुंडली अवैकनिंग शिविर अटेंड किया. शिविर देश की एक बहुत ही नामचीन महिला गुरु के शिष्यों द्वारा अर्गनाइज किया गया था. वे महिला गुरु अब शरीर में नही हैं. हम उनकी आत्मा के लिये प्रार्थना करते हैं. कुंडली अवेकनिंग के नाम से कराई कई ध्यान-साधना के दौरान इंजीनियर साधक की कुंडली बिगड़ गई. जिससे उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हुआ.

शिविर के दौरान उन्हें उर्जा का पुंज तेज गति से जम्प करके सिर की तरफ जाता महसूस हुआ. जिससे उनके सिर में तेज पीड़ा हुई. जैसे किसी ने सिर को बीच से फाड़ दिया हो. शिविर के बाद वे असहनीय पीड़ा लेकर घर लौटे. उसके बाद देश विदेश के अनगिनत डाक्टरों को दिखाया. तकलीफ का कारण किसी की समझ में नही आया. तमाम जगह तंत्र का सहारा लिया. कोई लाभ न हुआ. कई गुरुओं से मिले. कोई लाभ न हुआ. कई एनर्जी हीलरों, मास्टरों से मिले. कोई लाभ नही हुआ.

उनसे भी जाकर मिले जिनके द्वारा कुंडली अवेकनिंग ध्यान साधना का आयोजन कराया गया था. उन्होंने तो विचित्र ही जवाब दे दिया. कहा तुम्हारे बुरे कर्म हैं जो कुंडली के साथ ऊपर उठ गये हैं. तकलीफ तो होगी मगर इसे बर्दास्त करो. तकलीफ के रूप में बुरे कर्मा कट जाएंगे. अब वे 12 सालों से तकलीफ बर्दास्त कर रहे हैं. इस बीच कुंडली जागरण साधना का आयोजन कराने वाले विद्वानों ने मदद करना तो दूर उनसे मिलना भी बंद कर दिया है.

उन्होंने गुरुदेव को बताया कि कुंडली बिगड़ने के चलते कई बार लोग उन्हें पागल समझने लगते हैं. इसी के कारण उनकी प्रतिष्ठा खत्म हो गई. नौकरी चली गई. कई बिजनेस किये. सबमें घाटा हुआ. क्योंकि जब सिर की परेशानी शुरू होती है तो उनकी हालत पागलों वाली हो जाती है. सारी कमाई पूजी खत्म हो गई. पहले लोग उनके प्रभाव में रहते थे. तब वे दूसरों के विवाद हल करा दिया करते थे. लोगों की हड़पी प्रापर्टियां छुड़वा दिया करते थे. कुंडली बिगड़ने के बाद उनकी ही कई प्रापर्टियां हड़प ली गईं. घर का माहौल नर्क जैसा हो गया है. जिस घर में समृद्धि और प्रेम-प्यार का वास था वहीं अब पत्नी, बच्चे सब उनके व्यवहार से परेशान रहते हैं. बात बात में उत्तेजना फैल जाती है. और एेसा लगता है कि घर के लोग एक दूसरे को मार ही डालेंगे.

उनके अपने शब्दों में कुंडली जागरण शिविर की ध्यान साधना के बाद हुई उनकी हालत के कारण उनका परिवार पूरी तरह बरबाद हो गया है. जिसके कारण वे कई बार आत्महत्या अपनाने के बैरे में सोचने लगते हैं. सिर के भीतर कुछ चलता सा लगता है. जिसकी पीड़ा मृत्यु से भी भयानक लगती है.

गुरुदेव ने उन्हें इस पीड़ा से मुक्ति का वादा किया है. इस साधक द्वारा बताये गए सभी लक्षण अपर्याप्त पात्रता के कारण कुंडली बिगड़ने के लक्षणों से मिलते हैं. ध्यान साधना कराने वालों के द्वारा उन्हें जिस हाल में छोड़ दिया गया, वो सबसे ज्यादा चिंता का विषय है.

हमें पता है कि इस ग्रुप में कई एेसे विद्वान जुड़े हैं जो तंत्र, ज्योतिष, वास्तु, एनर्जी, ध्यान-साधना, योग व कर्मकांड के अच्छे जानकार हैं. उनमें से कुछ लोग निश्चित रूप से जनमानस को अपनी सेवाओं से लाभ पहुंचा रहे हैं. वे साधनायों, क्लासेज, शिविरों के जरिये लोगों को काफी कुछ उपयोगी चीजें सिखा, बता भी रहे हैं. हमें उनके जनहितकारी कार्यों पर गर्व है.

मगर चंद लोग एेसे भी हैं, जो सिर्फ और सिर्फ दुकानें चलाने जैसा काम करते हैं. उन्हें न लोगों की भलाई से सरोकार है और न ही विषय की गम्भीरता से. बिना गहराई को समझे कुछ भी बताना, सिखाना शुरू कर देते हैं. जो कि श्रद्धालुओं के लिये खतरनाक है. ठीक वैसे ही जैसे *नीम हकीम खतरे जान.* एेसे छोला छाप विद्वानों से बचने का मतलब है अपनी जिंदगी बचा लेना. इनसे न बच पायें तो जिंदगी नर्क बन जाती है.

कल की पोस्ट में हमने यही बताने की कोशिश की थी. जिसके जवाब में kundalini mantra नाम की प्रोफाइल वाले साथी ने अपने कमेंट में लिखा- * kyo logo ko bna rhe ho.*

मै चाहता हूं कि इस कमेंट पर आपकी राय जरूर आनी चाहिये. साथ ही आप बतायें कि वाकई *लोगों को कौन बना रहा है.*

सत्यम् शिवम् सुंदरम्

शिव गुरु को प्रणाम
गुरुवर को नमन.