अवचेतन साधना के लाभ
अवचेतन साधना के लाभ
1. अवचेतन शक्ति का जागरण
2. अपने भीतर के शिव का जागरण
3. ज्ञात अज्ञात जानने की क्षमताओं का जागरण
4. कामनाएं पूरी कर लेने की क्षमताओं का जागरण
5. दूसरों को भी समस्या मुक्त करने की क्षमताओं का जागरण.
08/11/2015
अवचेतन साधना को हो जायें तैयार
लाभ…
ऊर्जा की आग की दीवार बनाना, दूसरों के अवचेतन मन से सम्पर्क करना, उसे पढ़ना, उससे जानकारी लेना, उस व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात को जानना, दिमागी टाइम मशीन का उपयोग करना. अपने अवचेतन से कामना पूर्ति करना.
आज हम आपको वाकई एक बहुत बड़ी खुश खबरी दे रहे हैं. गुरु जी ने अवचेतन साधना की सहमति दे दी है.
ऊर्जा नायक की ऊर्जा यात्रा के दूसरे दिन की पोस्ट में आपके जो कमेंट आये उन्हें देखकर हमें लगा कि ग्रुप के ज्यादातर साथी अभी संजीवनी उपचार की बारीकियों से अंजान हैं. ऐसे में उपचार के चमत्कारिक नतीजे निकाल पाना कठिन होगा.
हरी ऊर्जा से आग की दीवार बनाना, किसी के अवचेतन मन से सम्पर्क करना, उसे पढ़ना, उससे जानकारी लेना, उस व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात को जानना, दिमागी टाइम मशीन का उपयोग करना एक संजीवनी उपचारक के लिये अनिवार्य होता है. मगर आप में से ज्यादातर को ये नही आता. कुछ लोग तो चक्रों को साफ व् उर्जित करना भी नही जानते.
हमने इस मामले में गुरु जी से चिंता जताई. तो वे अवचेतन साधना कराने को राजी हो गए.
लोगों द्वारा दुरूपयोग किये जाने के कारण गुरु जी ने अवचेतन साधना करानी तकरीबन बन्द कर दी थी. अभी गिने चुने लोग ही उनके साथ ये साधना कर पा रहे थे. उन्होंने 4 साल बाद इसकी व्यापक अनुमति दी है.
समयाभाव के कारण वे सभी को ये साधना अलग अलग नही करा सकते. इसलिये हमने सामूहिक साधना की तैयारी शुरू कर दी है.
अवचेतन साधना के लिये दिल्ली के हिंदी भवन को चुना गया है. अपनी अति व्यस्त दिनचर्या के बीच गुरु जी ने अवचेतन साधना के लिये 5 दिसंबर 15 की सहमति दी है.
हम खुश हैं कि आपके लिये इस दिव्यतम ज्ञान की व्यवस्था कर पा रहे हैं. आप खुश हो जाइये कि आखिर आपके जीवन में आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छु लेने का अनूठा अवसर आ ही गया. बस अफ़सोस इतना है कि साधना के लिये जो स्थान हमें मिल पा रहा है उसकी क्षमता सीमित है. इसलिये पहली बार में सबको शामिल नही कर सकेंगे. सिर्फ 300 भाग्यशाली ही गुरुदेव के साथ साधना में बैठ सकेंगे.
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13/11/2015
अवचेतन साधना के लिये ऊर्जा का परीक्षण शुरू
प्रणाम मै शिवांशु
यकीन है आप सबने दीपावली वैसे ही मनाई जैसी गुरुवर ने चाही थी. मुस्कराते हुए, महकते हुए, दमकते हुए. मेरी कामना है कि आपका हर दिन दीवाली हो, हर दिन दिल के दीप जलें.
गुरुदेव की दीपावली की साधना आज पूर्ण हुई. अब वे फ्री हो सके. इस बार की दीपावली की साधना में उन्होंने जनहित के लिये कुछ बहुत खास हासिल किया है. इस साधना के प्रभाव से जो लोग भी साधक के सामने जाते हैं उनके जीवन में खुद बी खुद लक्ष्मी का आकर्षण हो जाता है. कुबेर की ऊर्जाएं उनके भंडार निरन्तर भरती रहती हैं.
गुरुदेव आज रात ही दिल्ली आश्रम पहुँच रहे हैं. कल से लोग वहां उनसे मिल सकेंगे.
अवचेतन साधना की तैयारियां जोरों पर हैं. साधना समिति के अध्यक्ष पवन जैन जी की अगुवाई में सब कुछ उत्साह जनक हो रहा है. अरुण जी के पास अधिकांश रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. कुछ ही स्थान रिक्त हैं. आपमें से जो लोग गुरुदेव के साथ अवचेतन साधना करने के इच्छुक हैं, वे तत्काल रजिस्ट्रेशन करा लें. बिना रजिस्ट्रेशन के एक भी प्रवेश संभव न होगा.
लोगों के जीवन में अवचेतन साधना का अवसर कभी कभार ही आता है. आपके सामने भी ये अवसर आ गया है. इसका लाभ जरूर उठायें. एक साधक के तौर पर इसे आप अपने लिये सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से मानें.
कई लोग मेरी आई डी पर समयाभाव, दूर रहने, व्यस्तता, धनाभाव, असमर्थता आदि के कारण बताकर साधना में शामिल न हो पाने की लाचारी जता रहे हैं. मै इसे लाचारी नही बल्कि इच्छा शक्ति की कमी मानता हूँ.
किसी समय लोग 45000 की फीस देकर गुरुदेव के साथ अवचेतन साधना करते थे. उस पर भी उन्हें कई माह तक इंतजार करना पड़ता था. कुछ लोगों द्वारा इस सिद्धी का दुरूपयोग किये जाने के कारण गुरुवर ने इसे कराना बन्द कर दिया.
अब गुरुदेव इसके लिये दोबारा तैयार हुए हैं. तो ज्यादा से ज्यादा लोग लाभ उठा लें.
जो लोग रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं उनमें से कुछ लोग साधना के लिये रिजेक्ट कर दिये जायेंगे. गुरुवर सभी की एनर्जी चेक करेंगे. जिनकी एनर्जी साधना से मैच नही होगी. उन्हें अनुमति नही दी जायेगी.
गुरुदेव साधकों की ऊर्जा का परीक्षण कल से शुरू करेंगे.
परीक्षण के बाद जिन्हें साधना की अनुमति मिलेगी मेरी तरफ से उन सभी को शुभकामनायें.
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16/11/2015
अवचेतन शक्ति साधना से जगायें अपने भीतर के शिव को
राम राम मै शिवांशु
अवचेतन शक्ति साधना से अपने भीतर की दैवीय शक्तियां जाग जाती हैं. शिव तत्व जाग जाता है. सीधे कहें तो अपने भीतर के शिव का जागरण हो जाता है. सभी जानते हैं अपने शिव को जागृत करने का मतलब है असीम शक्तियों से सम्पन्न हो जाना. वैसे तो अपने शिवत्व को जगाने में तमाम लोग उम्र लगा देते हैं. मगर उर्जा विज्ञान के सहारे इसे बड़ी सरलता से जगाया जा सकता है.
अगर सही तकनीक का उपयोग किया जाये तो अवचेतन मन का जागरण जटिल नहीं है. हां इसकी पात्रता जरुर थोड़ी मुश्किल है. अवचेतन में समस्त ब्रह्मांड के रहस्यों की जानकारी होती है. यही नहीं उन सभी का उपयोग करने की क्षमता भी इसमें होती है. इसी कारण ये हमारे लिये निजी भगवान की तरह काम करता है. यही हमारे भीतर शिवत्व का केन्द्र है.
हम जिस बात को सही मानते हैं और दोहराते हैं उसे अवचेतन मन स्वीकार कर लेता है और साकार कर देता है.
इससे कोई फर्क नही पड़ता कि वह काम छोटा है या बड़ा. सच्चा है या झूठा. जायज है या नाजायज. भौतिक है या मानसिक. दैवीय है या राक्षसी. इसकी प्रवृत्ति है काम को पूरा करना. इसके लिये अवचेतन मन ब्रह्मांड की सभी शक्तियों को इश्तेमाल करना जानता है. उन्हें कर भी लेता है. ये अच्छे बुरे का भेद नहीं कर पाता. बस सच मानकर सोची गई बातों को पूरा करता रहता है.
ज्यादातर लोग अपनी अवचेतन शक्ति का उपयोग करना नही जानते. जिसके कारण वे अनजाने में अपना अनर्थ करते रहते हैं. उदाहरण के लिये अगर कोई महिला सोचती है कि उसके प्रेमी का चाल चलन संदेह पूर्ण है वो किसी और से भी गहरे सम्पर्क में रहता है. तो बार बार सोचते रहने की वजह से उसकी अवचेतन शक्ति इस बात को स्वीकार कर लेगी. और साकार कर देगी. उसके प्रेमी के समक्ष एेसी स्थितियां उत्पन्न कर देगी, जिससे प्रेमी के कहीं और गहरे सम्पर्क स्थापित हो जायें. इसे रोक पाना लगभग नामुमकिन होगा.
दूसरा उदाहरण यदि कोई व्यक्ति लगातार सोचता है कि उसके कारोबार की स्थिति ठीक नही है. एेसे में वह कर्ज से नही निकल सकता. तो लगातार सोचे जाने के कारण उसका अवचेतन इस बात को स्वीकार कर लेगा. फिर उसके कारोबार की स्थिति बिगाड़ने वाली सारी सम्भावनायें उत्पन्न कर देगा. साथ ही उसे कर्ज से बाहर नहीं निकलने देगा. चाहे कुछ भी उपाय क्यों न कर लिये जायें.
अपनी अवचेतन शक्ति का उपयोग करने की तकनीक जान लेना और उसे अपना लेना ही भीतर के शिवत्व का जागरण हैं. जिसने इसे कर लिया समझो उसने दुनिया जीत ली.
अपनी अवचेतन शक्ति का जागरण करके उससे अपनी मनचाही बातें मनवायी जाती हैं. 5 दिसम्बर को होने जा रही अवचेतन साधना के दौरान गुरुदेव आपको अवचेतन शक्ति की बारीकियों से अवगत करायेंगे. इसे जगाकर कैसे अपनी मनचाही बातें मनवायी जायें, ये सिखायेंगे. और करायेंगे भी.
जिनकी अवचेतन शक्ति जाग्रत होती है उनकी सोची हुई बातें साकार होती चली जाती हैं. चाहे वे अपने बारे में सोचें या दूसरों के बारे में.
गुरुदेव द्वारा कराई जाने वाली अवचेतन साधना अवचेतन शक्ति को जागाने की बहुत ही प्रभावशाली साधना है. इससे कामयाबी मिल ही जाती है. मगर इसके लिये साधकों की पात्रता थोड़ी मुश्किल है. गुरुदेव इस साधना में सिर्फ उन्हीं साधकों को अपने साथ सामिल करेंगे जो उनके परीक्षण पर खरे उतरेंगे.
गुरुवर साधकों का परीक्षण शुरू कर चुके हैं. यदि आप अपनी अवचेतन शक्ति जगाकर अपने भीतर के शिव को जगाना चाहते हैं, तो लेटेस्ट फोटो भेजकर तत्काल अपना परीक्षण करा लें.
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19/11/2015
तैयार हो जायें धरती के देवदूत बनने के लिये…
अवचेतन साधना में बदलाव
राम राम
आज मै आपको एक ख़ुशी वाली और एक कुछ निराशा वाली खबर दे रहा हूँ. दोनों एक दूसरे से जुडी हैं.
निराशा की खबर ये है कि अवचेतन शक्ति साधना की पात्रता परीक्षण में 80 प्रतिशत से अधिक लोग साधना के लिये अयोग्य साबित हो रहे हैं. गुरुदेव फोटो के आधार पर उनकी एनर्जी को जाँच रहे हैं, जिन्होंने 5 दिसम्बर 15 को हिंदी भवन में प्रस्तावित अवचेतन शक्ति साधना के लिये रजिस्ट्रेशन कराया है.
आगे आप जानेंगे कि अवचेतन साधना अन्य साधनाओं की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण क्यों है और क्यों जरूरी है इसके लिये पूर्ण पात्रता. कैसे वे लोग चमत्कारिक हो जाते हैं जिन्होंने इस साधना को सिद्ध किया है.
अभी बस इतना जान लें कि जिन साधकों का अवचेतन जाग्रत व् नियंत्रण में होता है वो धरती पर रहने वाले देवदूतों की तरह होते हैं.
गुरुदेव अवचेतन शक्ति साधना में आपके अवचेतन को जगाकर उस पर कंट्रोल करना सिखयेंगे.
ख़ुशी की खबर ये है कि जो लोग अवचेतन साधना के लिये अयोग्य मिल रहे हैं, गुरुदेव ने उनकी पात्रता तैयार कराने का निर्णय लिया है. दरअसल आप लोगों का उत्साह देखकर गुरुदेव ने ये निर्णय लिया.
अगले एक माह तक गुरुवर उन सभी की ऊर्जा को ठीक करेंगे, जो लोग साधना के लिये अपना रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं.
इसलिये अवचेतन शक्ति साधना की तारिख बदल दी गयी है. अब साधना 5 दिसम्बर की जगह 3 जनवरी 16 को होगी. साधना स्थल हिंदी भवन ही होगा.
आप में से जो लोग अवचेतन शक्ति साधना करना चाहते हैं, उनके लिये ये अनमोल मौका हैं. क्योकि अवचेतन साधना की पात्रता बहुत कठिन होती हैं. और गुरुदेव साधकों की ऊर्जा का जागरण करके खुद उनकी पात्रता बनाने जा रहे हैं. ये बहुत संयम और मेहनत का काम होता है. गुरुवर इसे करने जा रहे हैं.
सो गुरुदेव की उदारता को शत शत नमन.
जो लोग अवचेतन साधना करना चाहते हैं वे तत्काल रजिस्ट्रेशन करा लें. ताकि गुरुदेव उनकी एनर्जी ठीक करके उन्हें पात्र और सक्षम साधक बना सकें.
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21/11/2015
अवचेतन शक्ति साधना का रजिस्ट्रेशन क्लोज हो रहा है.
प्रणाम
उम्मीद है आप सभी ने संजीवनी समाधान शिविर के लिये रिजर्वेशन करा ही लिया होगा. जिन्हें स्थान नही मिल पा रहा है वे निराश हुए बिना अरुण जी के पीछे लग जायें. उन्हें आपके लिये जगह बनानी ही होगी. क्योंकि अवचेतन शक्ति साधना का ये मौका आगे आसानी से हाथ नही लगने वाला.
गुरुदेव ने सभी पर मेहनत करके अवचेतन साधना के लायक बनाने का अनुरोध स्वीकार कर लिया है. जिनके रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, उन पर 26 नवम्बर से काम शुरू कर देंगे. लगातार एक महीने हर दिन 2 घण्टे मेहनत करके वे आपको अवचेतन साधना लायक बनाएंगे.
एक बार अवचेतन जाग उठा तो जीवन में किसी से कुछ मांगने की जरूरत नही पड़ती.
गुरुवर का निर्णय है कि साधना में शिव साधक या शिव साधिका ग्रुप से सिर्फ 50 प्रतिशत लोग ही लिये जाएँ. बाकी सीटों पर टी.वी. प्रोग्राम के जरिये अनुरोध कर रहे लोगों को भी अवसर दिया जाये. टी.वी. प्रोग्राम के जरिये अनुरोध करने वालों की गिनती बहुत ज्यादा है. अब तक उनके स्थान तकरीबन पूर्ण हो चले होंगे.
हमने गुरुदेव से अनुरोध किया था कि वे अवचेतन साधना के लिये रिक्वेस्ट कर रहे सभी लोगों को मौका दें. इसके लिये जरूरत हो तो 3 जनवरी 16 के बाद होने वाले संजीवनी समाधान शिविरों में भी इसी साधना को शामिल किया जाये. मगर फ़िलहाल उन्होंने इससे इंकार कर दिया है. व्यस्तता के चलते वे अधिक लोगों को अवचेतन शक्ति साधना के लायक नही बना सकते.
सो फ़िलहाल हमें निर्धारित स्थान से ही काम चलाना पड़ेगा. मेरी कामना है कि आपको भी इसमें स्थान मिल सके.
संजीवनी समाधान के तहत गुरुवर साधकों के आभामण्डल, ऊर्जा चक्रों, कुंडली और अवचेतन की सफाई अवचेतन साधना से पहले करेंगे. जिससे सभी तरह की रुकावटें हट जाती हैं. साधक द्वारा की जाने वाली पूजा पाठ फलित होने लगती है. साधनाएं सिद्ध होने लगती हैं. उपाय लगने लगते हैं. जीवन सरल हो जाता है.
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28/11/2015
अवचेतन शक्ति साधना के लिये क्षमता जागरण शुरू
प्रणाम मै शिवांशु
गुरुदेव ने उन सभी लोगों की ऊर्जा का जागरण शुरू कर दिया है, जिन्होंने अवचेतन शक्ति साधना के लिये रजिस्ट्रेशन कराया है.
अवचेतन शक्ति का जागरण होते ही साधक व्यक्ति के भीतर शिव तत्व का जागरण होता है. उसकी कामनाएं पूरी होने लगती हैं. साधक दूसरों के अवचेतन को पढ़ने और उनके ज्ञात अज्ञात को जान लेने की तकनीक से परिचित हो जाता है. साधनाओं में इसे महासाधना कहा जाता है.
3 जनवरी 16 को दिल्ली के हिंदी भवन में दोपहर 2 बजे के बाद साधना का मुहूर्त तय हुआ है. साधना के लिये रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.
उनकी लिस्ट गुरुवर के पास पहुंच चुकी है.
गुरुदेव ने कल से रजिस्टर्ड लोगों की ऊर्जा ठीक करनी शुरू कर दी है. वे उनके आभामण्डल, ऊर्जा चक्रों, कुंडली की सफाई करके उन्हें उर्जित कर रहे हैं. ताकि साधक अवचेतन शक्ति जागरण के योग्य बन सकें.
अवचेतन शक्ति साधना के लिये पात्रता बहुत कठिन होती है. इसीलिये गुरुवर इच्छुक लोगों को योग्य साधक बना रहे हैं.
गुरुदेव ने संकेत दिए हैं कि रजिस्टर्ड लोगों में से 70 प्रतिशत तक लोग साधना में शामिल होने लायक बन जायेंगे.
इस क्रिया की सफलता के लिये आपको भी अपने घर पर रहकर एक एक्सरसाइज करनी है. उसे मै कल बताऊंगा.
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30/11/2015
थर्ड आई को जगाकर उससे काम लेना शुरू कर दें.
प्रणाम मै शिवांशु
अवचेतन शक्ति साधना के लिये गुरुदेव ने साधकों की पात्रता जागरण शुरू कर दिया है.
इसके लिये आपको भी एक एक्सरसाइज करनी हैं.
जो लोग किसी वजह से साधना में नही आ पा रहे हैं वे भी इसे करें. इससे तीसरे नेत्र का जागरण होगा. साथ ही आप उससे मनचाहे काम ले सकेंगे. अवचेतन रीड करके ज्ञात अज्ञात जानने के लिये थर्ड आई का जागरण अनिवार्य होता है.
इस एक्सरसाइज को त्राटक साधना कहा जाता है. गुरुदेव द्वारा बताई थर्ड आई एक्टिवेशन की अति प्रभावशाली विधि नीचे दे रहा हूँ.
साधना समय….
रोज रात 10.40 से 10.50 बजे. उसी समय गुरुवर आपकी ऊर्जा के जरिये तीसरे नेत्र के जागरण लिये काम कर रहे होंगे. अगर समय मिले और मन हो तो दिन में दो तीन बार भी कर सकते हैं. मगर एक बार में 10 मिनट से अधिक न करें.
जरूरी सामग्री…
पीतल या ताबें की एक थाली, कपूर का एक टुकड़ा, एक छोटी सुई. आँखों में डालने के लिये शुद्ध गुलाब जल या कोई सामान्य आई ड्राप.
ये साधना आप जमीन पर आसन लगाकर या कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं. अगर जमीन पर आसन लगाया है तो थाली सामने किसी चौकी पर रखें. साधना स्थल पर रोशनी न बहुत कम हो न बहुत तेज.
विधि…
1. थाली में साफ पानी भरकर सामने चौकी या मेज पर रखें. थाली आपकी आँखों के सामने सुविधाजनक ऊंचाई पर हो. जिसे आप आराम से देख सकें.
2. पानी में कपूर का छोटा टुकड़ा डाल दें. उस पर संतुलित करके सुई रख दें. सुई के भार से कपूर का टुकड़ा पानी में दब जायेगा. पानी को अधिक हिलाये बिना कपूर को धीरे से सुई के नीचे से हटा लें. इसके लिए चाहें तो चिमटी का उपयोग कर सकते हैं. कपूर का टुकड़ा हटते ही सुई पानी की सतह पर तैरने लगेगी.
3. लम्बी और गहरी सासें 16 बार लें और रिलेक्स होकर आराम से बैठ जाएँ.
4. भगवान् शिव से प्रार्थना करें. कहें हे शिव आप मेरे गुरु हैं मै आपका शिष्य हूँ. मुझ शिष्य पर दया करें. मेरे तीसरे नेत्र का जागरण करें.
इस साधना के दौरान गैरजरूरी विचारों से बचने व् आलस्य, उबकाई से बचने के लिये उक्त प्रार्थना को लगातार दोहरा सकते हैं. मगर ध्यान रखें कि त्राटक के दौरान आपका सारा ध्यान सुई को देखने पर केंद्रित रहे न कि प्रार्थना पर.
5. पानी की सतह पर तैर रही सुई को एकटक देखें. अगर आँखों में जलन या दर्द महसूस हो तो गुलाब जल या आई ड्राप का उपयोग कर लें.
त्राटक साधना के प्रभाव से आपकी थर्ड आई एक्टिवेट होने लगेगी. तब आपको उससे काम लेना होगा. गुरुदेव ने इसके लिये बड़ी ही प्रभावशाली तकनीक बनाई है. सुई को एकटक देखते समय कुछ समय बाद आपको उसमें से प्रकाश सा निकलता लगेगा. तब आप सुई को थाली में मनचाही दिशा में ले जाने के लिये अपने तीसरे नेत्र को निर्देश दें. कुछ समय बाद आप देखेंगे कि जिधर जिधर आप निर्देश दे रहे हैं, सुई पानी में उधर ही जा रही है.
ये इस बात का प्रमाण होगा कि आपका तीसरा नेत्र जाग गया है और आपकी बातें मानने लगा है.
तीसरे नेत्र से कब क्या और कैसे काम लेना है. कैसे उससे भूत, भविष्य, वर्तमान की सूचनाएं प्राप्त करनी हैं? ये सब गुरुवर आपको अवचेतन शक्ति साधना के समय सामने बैठकर सिखाएंगे.
अवचेतन शक्ति साधना में आने के लिये अपने रजिस्ट्रेशन की कन्फर्मेशन जरूर कर लें. क्योँकि स्थान सीमित हैं.
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19/12/2015
प्रणाम मै शिवांशु
सभी की त्राटक साधना ठीक चल रही होगी.
गुरुवर आज शाम तक दिल्ली पहुँच जायेंगे. कल आप लोगों की अवचेतन साधना के लिये पात्रता परखेंगे.
मेरी शिव गुरु से प्रार्थना है कि आप पात्रता में खरे उतरें.
28/12/2015
अवचेतन साधक यानि खुद के भगवान.!
… अब सुई पर त्राटक बन्द कर सकते हैं
प्रणाम मै शिवांशु
अवचेतन साधक खुद के भगवान बन जाते हैं. वे अपनी कामनाओं के लिये गिड़गिड़ाते नही हैं बल्कि ब्रह्माण्ड से पूरी करा लेते हैं.
कुछ ऐसा ही है भगवान शिव का बनाया विधान.
तो आप भी हो जाएँ तैयार खुद के भगवान बनने को.
साधना 3 जनवरी 2016 को दिल्ली के हिंदी भवन में होगी. समय का ध्यान रखें. लेट हुए तो साधना में इंट्री से रोका जा सकता है.
जिन्होंने साधना में आने के लिये रजिस्ट्रेशन कराया है वे ग्रुप में तत्काल अपनी सहमति भेजें. यह भी बताएं कि आपके साथ कितने लोग आ रहे हैं.
कल गुरुदेव अवचेतन साधकों की पात्रता सुनिश्चित करेंगे. मेरी शिव गुरु से प्रार्थना है कि ज्यादा से ज्यादा लोग साधना के योग्य निकलें. क्योँकि इस विलक्षण साधना को कराने के लिये गुरुदेव का दोबारा मन कब बनेगा, कुछ पता नही.
पानी में सुई पर त्राटक का अभ्यास कल रात से पूर्ण हो गया. अवचेतन साधना के लिये जो लोग इसे कर रहे थे वे अब इसे बन्द कर सकते हैं.
आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिये, थर्ड आई को जाग्रत करने के लिये, ध्यान लगाने के लिये, एकाग्रता बढ़ाने के लिये, अपनी पर्सनालिटी को आकर्षक बनाने के लिए जो लोग करना चाहें वे जारी रख सकते हैं.
सुबह की महासाधना जारी रहेगी.
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28/12/2015
खुद अपना भगवान बनने का दिन नजदीक.
प्रणाम मै शिवांशु
बात किसी अहंकार की नही, बल्कि अपनी शक्तियों के उपयोग की है. उन शक्तियों उपयोग जिन्हें ब्रहमांड के भगवान ने रचा.
ब्रमांड बनाने वाले ने इंशान रचने के समय कभी न सोचा होगा कि ये प्राणी अपनी कामनाओं को पूरा करने के लिये गिड़गिड़ाना सीख जाएगा. क्योंकि उन्होंने इंशान को ब्रह्मांड से अपनी बात मनवा लेनी की शक्ति दे रखी है.
तो चूक कहां हुई. क्यों गिड़गिड़ाना सीख गये हम.
शायद हमने अपनी उन शक्तियों का उपयोग नही किया. जानबूझकर, अनजानें में या आलस्य में.
जो भी हो अब हम करेंगे ब्रह्मांड से अपनी बात मनवा लेने वाली शक्तियों का उपयोग.
और बनेंगे अपने भगवान. जो चाहेंगे उसे ले लेंगे, बिना दूसरों के अधिकार छीने.
इन शक्तियों को जानने, पहचानने और उपयोग करने का दिन आ गया.
दिन- रविवार.
तारीख- 3 जनवरी 2016
समय- दोपहर 1 बजे.
जगह- हिन्दी भवन, दिल्ली.
अवसर- अवचेतन शक्ति साधना.
गुरुदेव परिचित कराएंगे आपको आपकी ही दिव्य शक्तियों से.
जगाएंगे ब्रह्मांड पर राज करने में सक्षम अवचेतन शक्ति को.
सीखाएंगे उसका उपयोग करना.
बस आप तैयार हो जाइए मन में उत्साह और उमंग के साथ. विचारों के जरिए इसी क्षण जुड़ जाइए साधना की दैवीय उर्जाओं से. महसूस करिए खुद को गुरुवर के साथ साधना करते हुए. उतार लीजिए भविष्य की दिव्य उर्जाओं को अपने आभामंडल में. घुल जाने दीजिए सिद्धियों का खुशनुमा अहसास अपनी भावनाओं में. मुक्त कर दीजिए अपनी खुशियों की उड़ान को खुले आसमान में. वहां बैठे ब्रह्मांड बनाने वाले भगवान को इंतजार है आपकी खुशहाली का, आपकी जीत का, आपके अपने भगवान के जागने का.
हमें इंतजार है आपके गुरुवर तक पहुंचने का.
टीम मृत्युंजय योग आपकी साधना की तैयारियों में व्यस्त है.
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02/01/2016
आ ही गया खुद का भगवान बनने का दिन
साधक अपना रुद्राक्ष साथ लेकर आएं.
प्रणाम मै शिवांशु
जी हाँ अपना भगवान बनकर अपना जीवन संवारने का दिन आ गया.
कल होगी अवचेतन साधना. जिसमें गुरुवर साधकों की अवचेतन शक्ति जगाकर उसका उपयोग सिखाएंगे.
शास्त्र और विज्ञान दोनों सहमत हैं कि जिसे अपने अवचेतन का उपयोग आ गया. उसने दुनिया जीतनी सीख ली.
साधना में साधक पीताम्बर पहनेंगे. जिनके पास संजीवनी रुद्राक्ष हैं वे साथ लेकर आएं. जिनके पास मोहनी रुद्राक्ष है वे भी साथ लेकर आएं. साधना के दौरान गुरुवर रुद्राक्ष को साधक की ऊर्जाओं से मैच कराकर जाग्रत करेंगे. साथ ही रुद्राक्ष से उनकी अवचेतन शक्ति को जोड़ेंगे.
03/01/2016
हो गया अपने भीतर के शिव का जागरण
प्रणाम मै शिवांशु
आज की दिव्य साधना में शामिल सभी साधकों को शुभकामनायें.
अवचेतन जाग गया.
शिवतत्व जाग गया.
जीवन जाग गया.
अवचेतन शक्ति साधना का दिन अद्भुत रहा. साधना में गुरुवर ने ग्रहों की दूषित ऊर्जाओं को हथेली और उँगलियों से झाड़कर निकाल देनी की विधि सिखाई. उँगलियों के जरिये तन्त्र की खतरनाक ऊर्जाओं को निकालकर फेंक देना सिखाया. पितरो को मोक्ष की ऊर्जाएं देना सिखाया. आभामण्डल व् मणिपुर चक्र को लॉक करना सिखाया. ऊर्जा चक्रों को विस्तारित करके शक्तिशाली करना सिखाया.
शिव को गुरु बनवाया. हृदय में शिवलिंग स्थापित कराया. शक्तिपात से संजीवनी शक्ति का आकर्षण कराया. साधकों के भीतर शिवतत्व को जाग्रत कराया. उनके ऊर्जा चक्रों और कुंडली में शिवत्व मन्त्र स्थापित कराया.
अवचेतन शक्ति जगाकर साधकों को उसका सुरक्षित उपयोग करना सिखाया.
हर साधको को खुद का भगवान बनना सिखाया. साधकों ने खुद के भगवान को शिव नाम दिया.
साधकों के लिये आज का दिन भाग्य बदलने वाला साबित होगा.
उन्हें किसी की आलोचना न करने और किसी से तर्क न करने की हिदायत है.
गुरुदक्षिणा के रूप में गुरुदेव ने सभी साधकों से उनकी समस्याएं लिखकर मांग लीं. दूसरी गुरुदक्षिणा के रूप में साधक किसी एक गरीब परिवार को हर माह राशन देंगे. जिन साधकों के पास राशन दान के लिये पैसे नही हैं वे राशन दान के लिये गुरुदेव की संस्था से धन ले सकते हैं.
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्
शिव गुरु को प्रणाम
गुरुवर को नमन.
6 Jan 2016
खुद को शिव बनाने के लिये
साधना में आप आये, आपका धन्यवाद
राम राम मै शिवप्रिया
साधना में आपका आना, हमारी सेवाओं को स्वीकार करना, हमसे अपनापन जताना, हमारी अच्छाईंयों को सराहना, हमारी कमियों को सुधारने का मौका देना, यकीनन हमारे लिये दिव्य अनुभूति से कम नही.
साधना में आप आये, आपका धन्यवाद.
अब तक उच्च साधकों को अवचेतन साधना के चमत्कारिक नतीजे मिलने शुरू हो चुके होंगे.
* ग्रुप की सदस्य सीमा पासी जी ने अपनी पोस्ट में जबरदस्त परिणामों की तरफ इशारा किया है. उन्होंने लिखा है कि उनका 10 साल का बेटा भी अवचेतन साधना में शामिल हुआ. जब गुरुदेव ने मै शिव हूं का जाप कराकर सबके भीतर शिव को जगाना शुरू किया तो उसके भी शिव जाग गये. आज वह अपने 18 साल के बड़े भाई से संजीदगी के साथ कह रहा था मै शिव हूं मुझसे अच्छे से बात किया करो.
मतलब ये कि 10 साल के बच्चे ने खुद को शिव के रुप में स्वीकार कर लिया है, निःसंदेह उसका जीवन सफलताओं और चमत्कारों से भरा ही रहेगा. ये स्वीकारोक्ति जिस जिस साधक के भीतर आ गई है उन्हें दुनिया का कोई दुख हरा नही सकता, उनकी कोई कामना अधूरी नही रह सकती.*
जिन्हें नतीजे मिलने नही शुरू हुए हैं, उन्हें भी मिलेंगे जरूर. सावधानी सिर्फ इतनी है कि किसी की आलोचना न करें, किसी से बहस न करें. दूसरों की कमियों को देखने से पहले उनकी अच्छाईयों को जरूर देखें.
गुरु जी कहते हैं साधना एक बड़ा शब्द है. साधक उससे भी बड़ा है. एक साधक न सिर्फ खुद का जीवन जीतना जानता है, बल्कि दूसरों को भी जिताने में सक्षम होता है. एेसा ही सक्षम साधक बनकर आप खुद के भगवान बनें और वो सब कुछ पा लें जो आपको चाहिये.
किसी जमाने में साधक को आश्रमों में सालों सेवायें कराकर परखा जाता था. फिर भी सभी सेवक साधक नही बन पाते थे. इस बारे में ग्रुप के साथी विनय जी ने एक कमेंट लिखा है, जो कि एक सच्चाई है. उनका कमेंट, उन्हीं के शब्दों में…..
Acharya Vinay Krishna Srivastava- Pahle barso ashramo me rehkar guruseva b ashram seva karna padti thi phir bhi yadi guru prashann ho gaya tab deekchha multi thi.
हमारे गुरु जी पहले की अपेक्षा अधिक उदारता से साधनाएं करा रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि लोग अपनी समस्याओं के लिये दर दर भटके नहीं बल्कि अपनी शक्तियों से खुद समस्या मुक्त बनें.
टीम मृत्युंजय योग को आपकी साधनाओं के
आयोजन का दायित्व निभाने के लिये धन्यवाद.
हर हर महादेव.
शिव गुरु को प्रणाम.
गुरुदेव को प्रणाम.