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सूक्ष्म शरीर से घर बैठे हिमालय साधना

हिमालय में उच्च आयामों के तमाम अदृश्य दरवाजे हैं। विद्वान साधक उन्हें पहचानते हैं। वहां पहुंचकर साधना करते हैं। अपने सूक्ष्म शरीर को डाई डाइमेंशन में पहुंचाते हैं। देवी-देवता, भैरव-भैरवी, यक्ष- यक्षिणी, गंधर्व-किन्नर के उच्च आयाम बड़े ही अलौकिक और चमत्कारिक होते हैं। सिद्ध साधक अपने सूक्ष्म शरीर के जरिये उनसे सम्पर्क स्थापित करते हैं। उनसे अपनी कामनायें पूरी कराते हैं।
कुछ साधक जो किसी कारणवश भौतिक शरीर से हिमालय की दुर्गम यात्रायें नही कर सकते वे अपने सूक्ष्म शरीर से वहां के डाई डाइमेंशन द्वारों तक पहुंचते हैं। उनकी उर्जाओं से जुड़कर साधनायें करते हैं। सिद्धियां अर्जित करते हैं। कामनायें पूरी करते हैं।
इसके लिये उन्हें सक्षम मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। जो उनकी सूक्ष्म चेतना को हिमालय के हाई डाइमेंशन द्वारों तक पहुपंचा सके। वहां उनकी सूक्ष्म चेतना को साधना हेतु स्थिर कर सके। जरूरी है कि वह मार्गदर्शक स्वयं हिमालय के डाई डाइमेंशन द्वारों तक पहुंचा हो। वहां सिद्ध साधनायें सम्पन्न की हों। जब मार्गदर्शक हिमालय के उच्च आयामों की प्रकृति से परिचित होगा। तभी अन्य साधकों की सूक्ष्म चेतना को उच्च आयामों की राह दिखा सकता है। वहां पहुंचा सकता है।
साधक भले ही घरों से साधना कर रहे हों किन्तु मार्गदर्शक का हिमालय क्षेत्र में पहुंचना अनिवार्य होता है। तभी वह अन्य साधकों के सूक्ष्म शरीर साधना हेतु वहां आमंत्रित कर सकता है।
पिछले साल हिमालय साधना के समय काफी साधकों ने आग्रह किया था उन्हें घरों से हिमालय साधना का विधान दिया जाये। तब मै अपनी गहन साधना में था। समयाभाव के कारण अन्य साधकों के सूक्ष्म शरीर आमंत्रित नही कर सकता था। घरों से साधक भले ही एक घंटे की सूक्ष्म हिमालय साधना करें, किन्तु हिमालय क्षेत्र में उनके सूक्ष्म शरीर आमंत्रित करके साधना हेतु स्थिर करने में 4 घंटे से भी अधिक का समय लगता है। क्योंकि वहां सबके लिये अलग अलग सुरक्षा कवच निर्मित करने होते हैं। ताकि कोई भी नकारात्मक उर्जा उन्हें नुकसान न पहुंचा सके। हालांकि नकारात्मक हमलों का खतरा बहुत कम होता है, फिर भी सूक्ष्म शरीर को असुरक्षित नही छोड़ा जाना चाहिये।
इस बार हमने सभी मृत्युंजय योग के इच्छुक साधकों को घरों से सूक्ष्म हिमालय साधना का विधान देने का निर्णय लिया है। चयनित साधकों को जल्दी ही विधान और साधना तिथि से अवगत कराया जाएगा। गुरूजी हिमालय क्षेत्र में पहुंचकर उन्हें सूक्ष्म रूप से हिमालय साधना कराएंगे।
सूक्ष्म मानस हिमालय साधना 5 चरणों में होगी। सभी चरणों में साधकों के अनुष्ठान सम्पन्न होंगे। ताकि साधना की उर्जायें निर्विघ्न उन तक पहुंच सकें और साधक उनका लाभ उठा सकें।
1. साधकों के पितृ मोक्ष का अनुष्ठान, हरिद्वार में
2. पंचतत्व जागरण का अनुष्ठान, ऋषिकेश में
3. कुंडलिनी जागरण अनुष्ठान, भूतनाथ गुफा में
4. शिवत्व जागरण का अनुष्ठान, नीलकंठ में
5. शिव-कुवेर शक्ति का जागरण, गुप्त काशी में
इसके साथ सात दिन होने वाली सूक्ष्म हिमालय साधना में हिमालय के अदृश्य उच्च आयाम क्षेत्रों में साधना सम्पन्न होगी।
जिन साधकों ने सूक्ष्म हिमालय साधना के लिये अब फार्म नही भरा है वे नीचे दिया फार्म भरकर सम्मिट करके अपने चयन का इंतजार करें।