सम्मोहन साधनाः पद, प्रतिष्ठा, धन, राजसुख, अट्रेक्शन, रिश्तों का सुख

धन, समृद्धि, पद, प्रतिष्ठा, रिश्तों के सुख के लिये सम्मोहन साधना कर लेनी चाहिये। जो जीवन में राजयोग जगाकर दमदार पर्सनालिटी और मनचाही पद, प्रतिष्ठा पाना चाहते हैं। वे एक बार इस साधना को सम्पन्न करके अपनी एनर्जी को जरूर जगायें। सभी जानते हैं जाग्रत उर्जा किसी को भी आसमान का चमकता सितारा बनाने में सक्षम होती है।
इस साधना को कौन करें?
* जिनकी अपने भी केयर नही करते।
* जिनकी लोग बात नही मानते।
* जिन पर लोग ध्यान नही देते।
* जिन्हें रिश्तों का सुख नही मिलता।
* जिनका व्यक्तित्व कमजोर हुआ जा रहा है।
* जिन्हें बार बार धन संकट का सामना करना पड़ता है।

मनोवांछित परिणामों के लिये
साधना सक्षम गुरू के मार्गदर्शन में करें। साधना मंत्र के बीज मंत्र उर्जा चक्रों में स्थापित हों। साधक का आभामंडल इष्ट के आभामंडल से जुड़ा हो। आज्ञा चक्र मार्गदर्शक गुरू की उर्जा से कनेक्ट हो। तो सिद्धी दूर नही। जिसे सिद्ध करने की योजना है वही उस साधना का इष्ट देवी/देवता होता है। इष्ट देवी/देवता के साथ उर्जा कनेक्टिविटी अनिवार्य होती है। उर्जा कनेक्ट होने के बाद ही जपे गए मंत्र या किया गया आवाहन इष्ट तक पहुंचता है। उनका सम्मोहन होता है।

सक्षम गुरू अपनी उर्जा शक्तियों का उपयोग करके
साधक की उर्जाओं को इष्ट के साथ सीधे कनेक्ट कर देते हैं। जो सिद्धि के लिये पर्याप्त होता है। किंतु यदि साधक के विचारों में भटकन हो तो गुरू द्वारा की गई उर्जा कनेक्टिविटी भंग हो जाती है। तब उर्जा उपकरण की जरूरत होती है। जो साधक और इष्ट को लगातार जोड़ कर रखे।
इस साधना के लिये उर्जा उपकरण के रूप में सिद्ध त्र्यलोक्य सम्मोहन यंत्र का उपयोग किया जाता है।
इसे खुद सिद्ध करें या किसी विद्वान से करायें।
चाहें तो आगे दिये लिंक का उपयोग करके मृत्युंजय योग संस्थान से भी सिद्ध करा सकते हैं।


त्र्यलोक्य सम्मोहन यंत्र सिद्धि लिंक…
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हेल्पलाइन- 91 9999945010


साधना का दिन- किसी भी रविवार (संडे) से आरम्भ करके अगले संडे तक करें।
साधना का समय- 6 am
मन्त्र- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
जप संख्या- 10 माला रोज
माला- रुद्राक्ष की
आसन- लाल
दीपक- सरसों के तेल का
दिशा- पूरब मुख होकर बैठें
कपड़े- अपनी इच्छानुसार
सुगंध- अपनी इच्छानुसार
प्रसाद- अपनी इच्छानुसार
दान- अपनी इच्छानुसार
परहेज- किसी के प्रति नफरत या चिढ़ की भावना से बचें।
सम्मोहन साधना के संकल्प इन्हें साधना से पहले रोज कहना है।


1- भगवान शिव से आग्रह
कहें- हे देवों के देव महादेव मेरे गुरुदेव आप को साक्षी बनाकर मै
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः मंत्र का जाप करके सम्मोहन साधना सम्पन्न कर रहा हूं। मुझे इसकी अनुमति प्रदान करें। इसकी सफलता हेतु दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
2- भगवान सूर्य से आग्रह
कहें- हे ब्रह्मांड ऊर्जा के कारक देव भगवान सूर्य आप को मेरा प्रणाम है, मै अपने गुरुदेव भगवान शिव को साक्षी बनाकर ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः मंत्र का जाप करके सम्मोहन साधना संपन्न कर रहा हूं। आप मेरे द्वारा किए जा रहे मंत्र जाप को स्वीकार करें, साकार करें। मुझे और मेरे परिवार जनों को सूर्य ग्रह सहित सभी ग्रहों के दुष्प्रभाव से मुक्त रखते हुए मुझे सम्मोहन सिद्धि प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
3- सम्मोहन मन्त्र से आग्रह
कहें- हे दिव्य सम्मोहन मन्त्र
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
आप मेरे आभामण्डल, उर्जा चक्रों, कुंडलिनी सहित सभी शक्ति केंद्रों में और हृदय सहित सभी अंगों में व्याप्त हो जाएं। मेरी भावनाओं से जुड़कर मेरे लिए सिद्ध हो जाएं। मुझे सम्मोहन सिद्धि प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
4- रुद्राक्ष माला से आग्रह
कहें- हे दिव्य रुद्राक्ष माला आपको मेरी ऊर्जाओं के साथ जुड़े हैं। आप मेरी भावनाओं से जुड़ जाएं और मेरे द्वारा किये जा रहे मंत्र जाप को शुद्ध, सिद्ध और सुफल करें।
आपका धन्यवाद!


साधना का विधान
यह पूरा विधान रोज करना है। करते समय मन में उत्साह और खुशी रखें।
स्नान आदि करके सूर्योदय के समय
साधना शुरू करें। सबसे पहले दीपक जला लें। उसके बाद भगवान गणेश को प्रणाम करके ऊपर लिखे संकल्प बोलें।
उसके बाद 5 मिनट सम्मोहन प्राणायाम करें। फिर 108 मनकों वाली रुद्राक्ष माला से 10 माला मन्त्र जप आरम्भ करें।
जो साधक विदेश में हैं और वहां माला नही ले सकते वे काउंटर से मंत्रों की गिनती कर सकते हैं।
साधना संपन्न होने के बाद धरती पर मत्था टेक कर ॐ इन्द्राय नमः बोलें। फिर 5 मिनट हर हर महादेव करें। और उठ जाएं। 
धन्यवाद।