
आप में से अनेकों महिला, पुरुष साधक
ऐसे हैं जिनकी आध्यात्मिक क्षमताएं उच्च सिद्धि के अनुकूल हैं। वे देवी, देवता, अप्सरा, योगिनी, यक्षिणी सहित विभिन्न देव शक्तियों को जीवन में उतार सकते हैं। उनके साथ रह सकते हैं। उनके दिव्य सानिग्ध, ज्ञान, आशीष, प्रेम और अपनेपन का आनंद ले सकते हैं। उनसे धन, यौवन, समृद्धि सुख प्राप्त कर सकते हैं। जन्मों की दरिद्रता का नाश कर सकते हैं। पद, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि पा सकते हैं।
किसी भी साधना में मनोवांछित परिणामों के लिये
साधना सक्षम गुरू के मार्गदर्शन में हीं करें।
साधना मंत्र के बीज मंत्र उर्जा चक्रों में स्थापित हों। साधक का आभामंडल इष्ट के आभामंडल से जुड़ा हो। आज्ञा चक्र मार्गदर्शक गुरू की उर्जा से कनेक्ट हो। तो सिद्धी दूर नही। जिसे सिद्ध करने की योजना है वही उस साधना का इष्ट देवी/देवता होता है। इष्ट देवी/देवता के साथ उर्जा कनेक्टिविटी अनिवार्य होती है। उर्जा कनेक्ट होने के बाद ही जपे गए मंत्र या किया गया आवाहन इष्ट तक पहुंचता है।
सक्षम गुरू अपनी उर्जा शक्तियों का उपयोग करके
साधक की उर्जाओं को इष्ट के साथ सीधे कनेक्ट कर देते हैं। जो सिद्धि के लिये पर्याप्त होता है। किंतु यदि साधक के विचारों में भटकन हो तो गुरू द्वारा की गई उर्जा कनेक्टिविटी भंग हो जाती है। तब उर्जा उपकरण की जरूरत होती है। जो साधक और इष्ट को लगातार जोड़ कर रखे।
ऋषियों और विद्वानों ने उर्जा उपकरण के रूप में
यंत्र, मणि, गुटिका, बूटी, रुद्राक्ष आदि को सिद्ध करने का विधान बनाया। जो युगों से प्रभावी है। सिद्ध करके इनके भीतर आभामंडल, उर्जा चक्र, उर्जा नाड़ी, कुंडलिनी, पंचतत्व, सूक्ष्म चेतना को प्रबल बनाने वाली उर्जायें स्थापित कर दी जाती हैं। उनकी प्रोग्रामिंग करके साधक और इष्ट के साथ जोड़ दिया जाता है। इस तरह उर्जा उपकरण के रूप में सिद्ध ये वस्तुवें न सिर्फ इष्ट से जोड़कर रखती हैं बल्कि साधक के सूक्ष्म शरीर को सिद्धि हेतु सबल बनाये रखती हैं।
इनमें से किसी एक का उपयोग करना है। किसका यह गुरूजी बताएंगे।
इन्हें आमतौर से गुरू या सक्षम आचार्य मंडल सिद्ध करते हैं। जिन्हें विधान अभ्यस्त है वह कोई भी कर सकता है।
आप भी सिद्ध कर सकते हैं, विधान
इसके लिये शुद्ध यंत्र, मणि, गुटिका, बूटी, रुद्राक्ष का चयन करें। उसके भीतर मौजूद पूर्व की नकारात्मक उर्जाओं, नकारात्मक भावनाओं को डिफ्यूज करें। अपने आभामंडल, उर्जा चक्र, कुंडलिनी, उर्जा नाड़ी, पंचतत्व और सौभाग्य चक्र की उर्जाओं के साथ जोड़ दें। सम्बंधित मंत्र का निर्धारित संख्या में जप करें। दशांश हवन, तर्पण, मार्जन करें। दान आदि करें।
इस तरह सिद्ध वस्तु की उर्जा प्रोग्रामिंग करके साधना के इष्ट की उर्जाओं से जोड़ दें। अंत में सिद्धी हेतु अखंड कनेक्टिविटी की प्रोग्रामिंग करें। फिर उपयोग करें। शानदार परिणाम प्राप्त करें।
खुद न कर सकें तो सक्षम विद्वानों से करायें। चाहें तो मृत्युंजय योग से भी करा सकते हैं।
उसके लिये आगे दिये लिंक का उपयोग कर सकते हैं।
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रजिस्ट्रेशन होने पर गुरूजी साधक की लेटेस्ट फोटो मंगाकर आभामंडल के द्वारा उनकी अध्यात्मिक उर्जा को डिकोड करते हैं। आभामंडल और पंचतत्वों की परख करते हैं। आभामंडल की प्रवृत्ति के अनुसार निर्धारित करते हैं किस साधक को मणि, गुटिका, बूटी या यंत्र में से किसका उपयोग करना चाहिये। साथ ही गुरूजी साधना की क्षमता प्रखर करने के लिये रजिस्टर्ड साधकों के आभामंडल, उर्जा चक्र और पंचतत्वों को सशक्त करते हैं। साधना के दौरान भी आवश्यकता होने पर उर्जाओं की जांच करके जरूरी दिय़ा निर्देश देते हैं। ताकि साधक उत्साह पूर्नक सफलतायें अर्जित करने में सक्षम बनें।