विपरीत प्रत्यंगिरा साधनाः विधान

मंत्र-
ॐ ऐं ह्रीं श्री प्रत्यंगिरे माम् रक्ष रक्ष मम् शत्रुन भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा

साधना सामग्री कोई नही
साधना में किसी माला, भोग, प्रसाद, फूल आदि सामग्री की आवश्यकता नही। उपलब्ध हों तो पीले कपड़े पहनकर साधना करें। कपड़े साफ सुथरे और आरामदायक पहनें।
मंत्र जप- हर दिन 2 घंटे
साधना अवधि- 4 दिन। चार दिन की साधना पूरी होने के बाद मणिपुर चक्र में शक्तिशाली उर्जाओं को सक्रिय रखने के लिये हर दिन 100 मंत्र जप करते रहना है। इससे दैवीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
साधना का समय- रात 10 बजे के बाद

साधना विधानः

साधना स्थल पर पूरब मुख होकर सुविधाजनक आसन पर बैठें। साधना करें।
साधना के आग्रह और संकल्प
जब भी साधना करने बैठेंगे तब हर बार आगे दिए आग्रह और संकल्पों को दोहराएंगे।
1- सबसे पहले संजीवनी शक्ति से आग्रह
कहें- हे दिव्य संजीवनी शक्ति मुझ पर दैवीय ऊर्जाओं की बरसात करके शक्तिपात करें ।
मेरे द्वारा की जा रही विपरीत प्रत्यंगिरा साधना सिद्ध हो। इस हेतु मेरे तन मन मस्तिष्क आभा मंडल ऊर्जा चक्रों को और कुंडलिनी को ऊर्जित करें, उपचारित करें, स्वस्थ करें, सर्वोत्तम करें। मुझे मेरे गुरुदेव भगवान शिव के चरणों से जोड़कर रखते हुए मेरे आभामंडल को मां प्रत्यंगिरा के आभामंडल के साथ जोड़ दें और सदैव जोड़ कर रखें । इसके साथ ही मेरे सूक्ष्म शरीर को एनर्जी गुरु राकेश आचार्य जी के सूक्ष्म शरीर से जोड़ कर रखें ताकि साधना सिद्धि के लिए उनकी उर्जायें भी मुझे निरंतर प्राप्त होती रहें।
आपका धन्यवाद।
2- भगवान शिव से आग्रह करें
कहें- हे देवाधिदेव महादेव हे मेरे गुरुदेव आप को मेरा प्रणाम है ।आप मेरे मन को स्वस्थ और सुखमय शिव आश्रम बनाकर इसमें माता महेश्वरी भगवान गणेश जी सहित सपरिवार विराजमान हों। आप को साक्षी बनाकर मैं विपरीत प्रत्यंगिरा साधना संपन्न कर रहा हूं। इसकी सफलता हेतु मुझे अनुमति प्रदान करें, दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें। मां प्रत्यंगिरा की अनुकूलता प्रदान करें।
आपका धन्यवाद है।
3- माता प्रत्यंगिरा से आग्रह करें
कहें- हे माता पीतांबरा आपको प्रणाम। मां प्रत्यंगिरा सहित अपने सभी स्वरूपों में मेरे मन मंदिर में विराजमान हों।
मैं अपने गुरु भगवान शिव को साक्षी बनाकर विपरीत प्रत्यंगिरा साधना सम्पन्न कर रहा हूं। इस हेतु
ॐ ऐं ह्रीं श्री प्रत्यंगिरे माम् रक्ष रक्ष मम् शत्रुन भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा
मंत्र का जाप कर रहा हूं। मेरे द्वारा की जा रही साधना को शुद्ध सिद्ध सुफल करके स्वीकार करें साकार करें। मेरे मणिपुर चक्र में अपनी दिव्य शक्तियां स्थापित करके इसे दिव्यास्त्र बनायें। जो दिव्यास्त्र के रूप में सदैव सक्रिय रहे। मेरे विरुद्ध नकारात्मक हमले करने वाले शत्रुओं और उनकी शक्तियों का संहार करें। हे मां प्रत्यंगिरा सदैव मेरी व मेरे द्वारा इच्छित लोगों की रक्षा करें।
आपका धन्यवाद है।
4- मंत्र से आग्रह करें
कहें- हे दिव्य मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्री प्रत्यंगिरे माम् रक्ष रक्ष मम् शत्रुन भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा
आप को मेरा प्रणाम है आप मेरी भावनाओं से जुड़कर मेरे लिए सिद्ध हो जाइए। मुझे प्रत्यंगिरा सिद्धि प्रदान करें।
आपका धन्यवाद।
5- अपनी शक्तियों से आग्रह करें
कहें- मेरे तन मन मस्तिष्क आभामंडल ऊर्जा चक्र, मणिपुर चक्र और मेरी कुंडलिनी सहित मेरे सभी शक्ति केंद्रों और मेरे हृदय सहित मेरे सभी अंगों। 33 लाख से अधिक रोम छिद्रों। आप सब को नमन है। आप सब प्रत्यंगिरा सिद्धी हेतु सक्रिय हो जाइए, जागृत हो जाइए। विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्री प्रत्यंगिरे माम् रक्ष रक्ष मम् शत्रुन भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा
के साथ जुड़ जाइए । इनके बीज मंत्रों को अपने अंदर स्थापित कर लीजिए। मेरे साथ मिलकर आप इस मंत्र का जाप करिए। ब्रह्मांड से माता मां प्रत्यंगिरा की शक्तिशाली उर्जायें ग्रहण करें। उन्हें अपने अंदर स्थापित करिए और मुझे शत्रु हीन करें, भय हीन करें।
आपका धन्यवाद।
6- मणिपुर चक्र से आग्रह करें
कहें- मेरे दिव्य मणिपुर चक्र आपको नमन। मेरे द्वारा जपे जा रहे मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्री प्रत्यंगिरे माम् रक्ष रक्ष मम् शत्रुन भंजय भंजय फें हुं फट् स्वाहा
की दैवीय उर्जायें ब्रह्मांड से ग्रहण करें। अपने अंदर स्थपित करें। अपने दसों दलों पर मंत्र शक्ति को स्थापित करें। उससे सदैव मेरी रक्षा करें। साथ ही मुझे सफलता, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि, धैर्य प्रदान करें।
आपका धन्यवाद।
इन संकल्पों के बाद मंत्र जाप आरंभ करिए और साधना पूरी करिए। मंत्र जप रोज 2 घंटे करना है।