मूलाधार चक्र साधना विधानः दिसम्बर 2025

मूलाधार जागरण साधना विधान

प्रथम चरण का विधान

प्रथम चरण में आभामंडल और मूलाधार चक्र एक्टिवेशन ब्रह्मनाद का प्रयोग करें।
इस बीच साधक के आभामंडल और मूलाधार चक्र की सक्रियता का अनुष्ठान सुनिश्चित कर लेना है। जिसमें आभामंडल और मूलाधार चक्र सहित सभी उर्जा चक्रों को साफ किया जाता है। फिर उन्हें उर्जित किया जाता है। फिर मूलाधार चक्र की चारो पंखुड़ियों में चक्र उर्जन मंत्र स्थापित किया जाता है। इसे लगातार कम से कम 10 दिन किया जाने चाहिये। अनुष्ठान की उर्जाओं से चक्र की सभी पंखुड़ियां सुडौल और चमकदार हो जाती हैं।
चक्र ब्रह्मांडीय उर्जाओं को ग्रहण करने की श्रेष्ठ स्थिति में तैयार हो जाता है। तब ब्रह्मनाद और चक्र पिरामिड के द्वारा ब्रह्मांड की उर्जायें प्राप्त कर पाना अधिक असरदार हो जाता है। चक्र तेजी से एक्टिवेट होने लगता है।
प्रथम चरण में आभामंडल और मूलाधार चक्र के ब्रह्मनाद सुनने का अभ्यास कम से कम एक महीने नियमित और नियत समय पर करें। समय अपनी सुविधानुसार फिक्स कर लें। उसी समय रोज ब्रह्मनाद सुनें।
ब्रह्मनाद सुनने के समय हर दिन कुछ न कुछ नया बदलाव फील होगा। कांफीडेंस में बदलाव, शारीरिक- मानसिक बल में बदलाव, आर्थिक स्थिति में बदलाव, पारिवारिक स्थिति में बदलाव, सामाजिक स्थिति में बदलाव, आध्यात्मिक स्थिति में बदलाव। कुछ साधक ब्रह्मनाद सुनने के दौरान खुद को आसन से हवा में उठता सा फील करते हैं। उन्हें लगता है जैसे बैठे बैठे हवा में उठ गये। और भी कई तरह की अलौकिक अनूभूतियां होती हैं।
ब्रह्मनाद को क्रमशः सुनें।
1- पहले आभामंडल का ब्रह्मनाद सुनें।
2- उसके बाद मूलाधार चक्र का ब्रह्मनाद सुनें।

दूसरे चरण का विधान

दूसरे चरण में मूलाधार चक्र एक्टिवेशन पिरामिड का प्रयोग करना है।
1- पिरामिड को सामने सुविधा जनक स्थिति में रखें। उसके नीचे सफेद या लाल पेपर रख लें।
आभामंडल एक्टिवेशन ब्रह्मनाद सुनते हुए पिरामिड के ऊपरी सिरे पर नजर टिका कर रखें। यह त्राटक की स्थिति है।
2- उसके बाद पिरामिड के आधार में बने मूलाधार चक्र को देखें। वहां उल्टे आकार का एक छोटा त्रिभुज बना दिखेगा।
उसके बीच में नजरें टिका दें। और मूलाधार चक्र एक्टिवेशन ब्रह्मनाद सुनें।

साधना के नियम

साधना के समय 5 फुट दूर तक कोई दूसरा व्यक्ति न हो।
चमड़े की कोई चीज पास में न रखें।
साधना से आधा घंटे पहले और बाद में कुछ खायें, पियें न।
साधना के 1 घंटे बाद तक स्नान न करें।
साधना के दिनों में उर्जाओं में लगातार बढ़ोत्तरी होगी। धैर्य के साथ सूक्ष्म शरीर के दावारा उनका उपयोग होने दें। किसी से तर्क-वितर्क न करें। इससे अर्जित उर्जायें नष्ट होती हैं। चक्र एक्टिवेशन कमजोर होता है।
साधना हेत्पलाइनः 9210500800