
बेरोक तरक्की के इच्छुक लोग इसे जरूर करें
• जिनका स्वास्थ डावाडोल रहता है
• जिनका कांफीडेंस डावाडोल रहता है
• जिनकी आर्थिक स्थिति डावाडोल रहती है
• जो लोग अनजाने भय का शिकार रहते हैं
• जो लोग बेकारी, बेरोडगारी के शिकार रहते हैं
• जिनके कामकाज में घाटा, नुकसान होता रहता है
• जो लोग आलस्य के शिकार रहते हैं
उन लोगों को अपना मूलाधार चक्र तुरंत ठीक कर लेना चाहिये।
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सभी साधकों को राम राम
मूलाधार चक्र जीवन का मूल आधार है। यह जीविका और आजीविका दोनों को तय करता है। पीठ की तरफ रीढ़ की हड्डी के निचले सिरे पर स्थिति पृथ्वी तत्व वाले मूलाधार चक्र में 4 पंखुड़ियां होती हैं। 3 लाल एक पीली। पीली पंखुड़ी अत्यधिक संवेदनशील होती है। बिगड़ने पर प्रायः तिरछी हो जाती है। जिसका जीवन पर बड़ा ही खराब प्रभाव पड़ता। कांफीडेंस, स्वास्थ, आर्थिक स्थिति, साहस गड़बड़ा जाता है। आलस्य छाया रहता है। घाटा नुकसान होता है। बेकारी, बेरोजकारी का श्राप सा लग जाता है। कई बार लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।
ऊपर के लक्षण दिखते ही मूलाधार चक्र को ठीक कर लेना चाहिये। अन्यथा कई बार ये परिस्थितियां जीवन भर परेशान करती हैं। खासतौर से कैरियर निर्माण में लगे युवाओं का मूलाधार जरूर ठीक रहना चाहिये। वरना उनका मनचाहा कैरियर नही बन पाता।
मूलाधार चक्र जागरण के लिए पृथ्वी तत्व के अनुष्ठान की ऊर्जाएं उपयोगी सिद्ध होती हैं। मृत्युंजय योग के रजिस्टर्ड साधकों के लिए अनुष्ठान आरम्भ हो चुका है। जिसमें सिद्ध करके साधकों को प्रिज्म पिरामिड भेजा जाएगा। साधक उस पर त्राटक करते हुए मूलाधार चक्र का ब्रह्म नाद सुनेंगे। जिसकी संयोजित तरंगें साधकों के मूलाधार चक्र पर ऊर्जाओं का प्रक्षेपण करेंगी। इससे मूलाधार का जागरण होता है।
सिद्ध होते ही प्रिज्म पिरामिड और ब्रह्म नाद रजिस्टर्ड साधकों को भेजा जाएगा। तब तक रजिस्टर्ड साधक रोज मीठा पान खाएं और कुछ न कुछ व्यायाम, योग आदि नियमित करें। मीठा पान पृथ्वी तत्व और आकाश तत्व को उत्साहजनक रूप से उत्थानित करता है।
शिव शरण।