वैवाहिक सुख, संतान सुख, सम्पत्ति सुख, सम्मान सुख, देव सुख, बेरोक उन्नति और अखंड सुरक्षा

कुल देव यानी परिवार के पर्सनल भगवान। हर क्षण सुख देने के लिये तत्पर। हर दम रक्षा करने में सक्षम। खुश हो जाएं तो दुनिया का कोई ऐसा सुख नही जो न दें। रुष्ट हो जाएं तो विपत्तियों का पहाड़। बेरोक सुख शांति के लिये कुल देव साधना सभी को करनी चाहिये
कुल देवी रुष्ट हो तो…
● शादी, संतान में देरी
● बीमारी, बेरोजगारी
● धनाभाव, दरिद्रता
● कलह, बिखराव
● विपत्ति, हानि
● पितृ पीड़ा
● बाधा भय
● शत्रु भय
कुल देवी प्रशन्न हों तो…
● परिवार में सुख, शांति
● देव कृपा, लक्ष्मी कृपा
● यश, कीर्ति, विजय
● मान, सम्मान
● आरोग्य सुख
कुलदेव मुद्रा सिद्धि रजिस्ट्रेशन लिंक…
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हेल्पलाइन: 9999945010
कुलदेव सिद्ध मुद्रा
सिद्ध हुई कुलदेव मुद्रा (सिक्का) पर की गई कुलदेव साधना के परिणाम बड़े ही अलौकिक देखे गये हैं। इसी में कुलदेव/कुलदेवी का आवाहन करना चाहिये। साधना के बाद सिद्ध मुद्रा सम्भालकर घर के लाकर में रख लें। उसी की एनर्जी के द्वारा कुलदेव की उर्जायें कुल, परिवार में सक्रिय होती हैं। सुख, शांति, समृद्धि, उन्नति देती हैं।
कुलदेव सिद्ध मुद्रा का विधान युगों से कारगर होता आया है। कुलदेव मुद्रा इसके विशेषज्ञों द्वारा ही सिद्ध की जानी चाहिये। उसे जिस परिवार के लिये सिद्ध किया गया है, वही उपयोग करें।
इसके बड़े ही उत्साह जनक परिणाम देखने में आते हैं।
कुलदेव मुद्रा को सिद्ध करने का विधान गोजनीय एवं लम्बा है। इसलिये यहां हम उसका विधान नही बता पा रहे हैं। किसी जानकार आचार्य की टीम से इसे सिद्ध करायें। इसके अनुष्ठान में 3 से 9 दिन का समय लगता है। यह इस पर निर्भर करता है कि कितने आचार्य अनुष्ठान कर रहे हैं।
यदि कोई विशेशज्ञ व विश्वसनीय आचार्य टीम न मिले तो आप कुलदेव मुद्रा मृत्युंजय योग संस्थान से भी सिद्ध करा सकते हैं। इसके लिये दिये गये लिंक से रजिस्ट्रेशन करा लीजिये। रजिस्ट्रेशन कराते ही हमारी आचार्य टीम जरुरी विवरण के लिये आपसे सम्पर्क करेगी।
घर में कुलदेव या पितृों का स्थान न बनायें
इससे उर्जाओं में मिलावट और असंतुलन का खतरा रहता है। अक्सर देखने में आता है कि घर में कुलदेव या पितृों का स्थान बनाने वाले परिवार परेशानियों से घिरे रहते हैं।
उनको लगता है कि परेशानी आयी और घर में बने कुलदेव या पितृों के स्थान के कारण बचाव हो गया।
जबकि सच्चाई यह है कि परेशानी आई ही घर में बने कुलदेव या पितृों के स्थान के कारण।
यह बड़ा विज्ञान है। अनाड़ीपन में इसके साथ छेड़छाड़ नही की जानी चाहिये।
सामान्य रूप में सबके कुल देव हमेशा खुश ही रहते हैं। लोगों को बिना मांगे ही सब सुख देते रहते हैं। किंतु जब व्यक्ति ग्रह दोष, पितृ दोष, तंत्र दोष, दारिद्र्य दोष, भूत भय आदि की पीड़ा में छटपटा रहा हो। फिर भी अपने कुल देव से रक्षा की गुहार न करे तो वे रुष्ट हो जाते हैं। क्योंकि कुल देव इन सभी पीड़ाओं को तिनके की तरह उड़ा देने में सक्षम होते हैं। अपने से जुड़े सभी कुलों/ परिवारों की रक्षा करना, उन्हें सुखी रखना ही उनकी जिम्मेदारी है। यही उनका देव कार्य है।
कुलदेव/देवी अपने से जुड़े कुलों/ परिवारों के सभी लोगों को अपने बच्चे मानते हैं। ऐसे में जब लोग उनके पास न जाकर तकलीफ लिये इधर उधर भटकते हैं, तब वे रुष्ट हो जाते हैं।
कुल देव मात्र दर्शन करने भर से प्रशन्न हो जाते हैं। सब सुख देने लगते हैं। साल में कम से कम एक बार पूरे परिवार के साथ कुल देव के दर्शन जरूर करने चाहिये।
आधुनिकता की दौड़ या बेपरवाही में तमाम लोगों ने अपने कुल देव को खो दिया है।
उनको पता ही नही कि उनके कुल देव कौन हैं, कहां हैं, उनकी पूजा कैसे करें।
ऐसे परिवार कुल देव की रुष्टता के शिकार बने रहते हैं।
अपनी सुविधा के लिये तमाम लोगों ने कुल देव अपने घर में स्थापित कर रखे हैं। वे कुल देव के स्थान पर नही जाते। ऐसे परिवार भी हमेशा किसी न किसी दुख और विपत्ति के शिकार रहते हैं।
अपने जीवन में एक बार अपने कुल देव को सिद्ध करके उनकी शक्तियों को जगा लिया जाए। तो ऐसे लोगों के घर से सुख और खुशियां कभी खत्म नही होतीं।
मृत्युंजय योग द्वारा अपने साधकों के कल्याण हेतु कुल देव सिद्धि साधना का आयोजन किया जा रहा है।
रजिस्ट्रेशन कराने के बाद शुभ मुपहर्त में आप अपनी सुविधानुसार किसी भी दिन से साधना आरम्भ कर सकेंगे।
अपने ही घर से 3-3 दिन की साधना करनी है।
रजिस्ट्रेशन कराने वाले साधकों को ऑनलाइन साधना का विधान भेज दिया जाएगा। उसके मुताबिक साधना सम्पन्न करें।
शिव शरणं।
कुलदेव सिद्ध मुद्रा
सिद्ध हुई कुलदेव मुद्रा (सिक्का) पर की गई कुलदेव साधना के परिणाम बड़े ही अलौकिक देखे गये हैं। इसी में कुलदेव/कुलदेवी का आवाहन करना चाहिये। साधना के बाद सिद्ध मुद्रा सम्भालकर घर के लाकर में रख लें। उसी की एनर्जी के द्वारा कुलदेव की उर्जायें कुल, परिवार में सक्रिय होती हैं। सुख, शांति, समृद्धि, उन्नति देती हैं।
कोई कन्फ्यूजन न हो इसलिये बताते चलें कि कुलदेव का मतलब कुल के देवता या देवी से है। जब कुलदेव कहा जाये तो आपके कुल का कोई देवता है तो उसे माने या कि कोई देवी हैं तो उहें मानें।
घर में कुलदेव या पितृों का स्थान न बनायें
इससे उर्जाओं में मिलावट और असंतुलन का खतरा रहता है। अक्सर देखने में आता है कि घर में कुलदेव या पितृों का स्थान बनाने वाले परिवार परेशानियों से घिरे रहते हैं।
उनको लगता है कि परेशानी आयी और घर में बने कुलदेव या पितृों के स्थान के कारण बचाव हो गया।
जबकि सच्चाई यह है कि परेशानी आई ही घर में बने कुलदेव या पितृों के स्थान के कारण।
यह बड़ा विज्ञान है। अनाड़ीपन में इसके साथ छेड़छाड़ नही की जानी चाहिये।
कुलदेव सिद्ध मुद्रा का विधान युगों से कारगर होता आया है। कुलदेव मुद्रा इसके विशेषज्ञों द्वारा ही सिद्ध की जानी चाहिये। उसे जिस परिवार के लिये सिद्ध किया गया है, वही उपयोग करें।
इसके बड़े ही उत्साहरनक परिणाम देखने में आते हैं।
साधना सामग्री-
सिद्ध कुलदेव मुद्रा, पानी वाले 3 नारियल, हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, चावल, कुछ छोटी सुपारी, 6 पान के पत्ते, लौंग, इलायची, मिठाई, पुष्प, माला, लाल कपड़ा। नारियल की जटाएं निकलवा दें।
समय-
कभी भी अपनी सुविधानुसार करें। तीनों दिन एक ही समय पर करें।
मन्त्र:-
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कुलदेव प्रसीद प्रसीद सकल पुरुषार्थ देहि देहि श्रीं ह्रीं ऐं ॐ नमः
साधना की तैयारी
एक नारियल हल्दी से, दूसरा कुमकुम से, तीसरा सिंदूर से रंग लें। पूजा के समय जो नारियल जिस चीज से रंगा है वही उस पर चढ़ाएं। थोड़े थोड़े चावल हल्दी , सिंदूर, कुमकुम से रंग लें।
लाल कपड़ा किसी पाटे पर बिछा दें। उस पर रंगे चावल की 3 ढेरियां बना दें। उन पर एक एक नारियल उस पर स्थापित करें। जिस चीज से चावल रंगे है उस ढेरी पर उसी चीज से रंगा नारियल रखें।
नारियलों के सामने पान का एक एक पत्ता रख दें। उन पर एक एक सिक्का रख दें। सिक्के पर एक एक सुपारी रख दें।
तीनों नारियल के सामने घी का एक एक दीपक जला दें। धूप जला दें।
कुलदेव का परिचय और ध्यान
कुलदेव का मतलब कुलदेवी या कुलदेवता। यदि आपको पहले से पता है आपके कुलदेव कौन हैं। उनका स्वरूप क्या है? देवी या देवता। तो आगे संकल्पों में उनके नाम से उनका ध्यान करें, संबोधन करें।
यदि आपको अपने कुलदेव के बारे में कोई जानकारी नही है तो उन्हें कुलदेव के नाम से संबोधित करें।
इस साधना के पूरा होते होते आपके कुलदेव का परिचय और स्वरूप सामने आ जायेगा। किसी व्यक्ति द्वारा या स्वप्न के द्वारा।
साधना विधान
1- स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर
पूजा घर में पूरब मुख होकर साफ सुथरे आसान पर बैठ जाएं।
घर की छोटी कुवांरी लड़कियों की इस साधना में न बैठाएं।
यह साधना कुल के सभी लोगों की भलाई के लिये होती है। इसे सबके साथ मिलकर करनी चाहिये।
किंतु हो सकता है मनभेद के कारण कई लोग आपके साथ साधना करने को तैयार न हों। इसलिये उनकी सूक्ष्म चेतना को बुला लें।
कुल के लोगों के सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म शरीर अपने सूक्ष्म शरीर में आमंत्रित करें
कहें- मेरे कुल के सभी लोगों के सूक्ष्म शरीर मेरे सूक्ष्म शरीर में आ जाएं। मेरे साथ मिलकर कुलदेव साधना सम्पन्न करें। कुलदेव की कृपा को अपने जीवन में धारण करें। उनके पुण्य फल को अर्जित करें। उससे अपने शरीर धारियों को तन, मन, धन से सूखी और सुरक्षित बनाएं। मेरे अनुकूल बनाएं।
आपका धन्यवाद।
2- श्री गणेशाय नमः बोलकर भगवान गणेश से निर्विघ्नता का आग्रह करें
अपने मूलाधार चक्र पर ध्यान लगाएं और कहें हे गौरीनंदन आपको हमारा प्रणाम। हमारे द्वारा सम्पन्न की रही कुलदेव साधना को निर्विघ्न करें। हमें शक्ति सम्पन्न बनाएं।
आपका धन्यवाद।
नवग्रहों से पंचतत्नों के लिये सकारात्मक उर्जायें मांगे
कहें- हे सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध , गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु सहित सभी ग्रह नक्षत्रों आपको नमन। हमें अपने ग्रहों के दुष्प्रभावों से मुक्त रखते हुए कुलदेव सिद्धि हेतु आपकी सकारात्मक उर्जायें प्रदान करें। मेरे भीतर पंचतत्वों को सशक्त करें।
आपका धन्यवाद!
3- संजीवनी शक्ति से शुद्धता और क्षमता का आग्रह करें
सिर के ऊपर सहस्रार चक्र पर ध्यान लगाते हुए कहें हे दिव्य संजीवनी शक्ति आपको नमन। हम पर दैवीय ऊर्जाओं का शक्तिपात करें। हमारे तन, मन, मस्तिष्क, अभामंण्डल, ऊर्जा चक्रों को स्वच्छ और शक्तिशाली बनाएं। हमें कुलदेव सिद्धि हेतु सक्षम बनाएं। साथ ही हमारे समक्ष रखी पूजा सामग्री को शुद्ध और पवित्र करके देवों के ग्रहण करने योग्य सक्षम बनाएं।
आपका धन्यवाद!
4- भगवान शिव को साक्षी बनाकर साधना की सफलता हेतु उनसे सहायता और सुरक्षा मांगे
छाती पर स्थित अनाहत चक्र पर ध्यान लगाकर कहें हे देवाधिदेव महादेव आपको हमारा प्रणाम। हमारे मन मंदिर में विराजमान हों। आपको साक्षी बनाकर हम *ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कुलदेव प्रसीद प्रसीद सकल पुरुषार्थ देहि देहि श्रीं ह्रीं ऐं ॐ नमः* मन्त्र का जप करके अपने कुलदेव की साधना सम्पन्न कर रहे हैं। इसकी सफलता हेतु मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें। कुलदेव की अनुकूलता प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
कुलदेव का पूजन
किसी प्लेट या कटोरी में नया लाल कपड़ा बिछा दें। उस पर सिद्ध कुलदेव मुद्रा स्थापित कर दें। उसी पर कुलदेव का आवाहन करें।
कहें- हे मेरे कुलदेव/कुलदेवी अपने सभी स्वरूपों में इस सिद्ध कुलदेव मुद्रा में पधारें। साथ ही अपने सहयोगी देनों को सम्मुख रखे तीनों नारियल में आमंत्रित कर लीजिये। कई बार कुलदेव के साथ उनके सहयोगी स्थानीय देव भी रहते हैं। उनकी भी पूजा हो जाये तो क्षेत्रपालकों सहित स्थानीय देवों की सुरक्षा और सकारात्मकता मिलती है। जीवन में इससे बड़ी उन्नति के रास्ते खुलते हैं।
तीनों नारियल पर कुलदेव सहयोगी देवों का आवाहन, पूजन करने के लिये सिद्ध सिक्के के साथ उनका भी पंचोपचार पूजन करें।
चोपचार पूजा विधि
(1): जल छिड़ककर स्नान कराने की कामना करें।
(2): कलावा का धागा सौंपकर वस्त्र पहनाने की कामना करें।
(3): जो जिस रंग से रंगा है उस नारियल और उसी चीज हल्दी, सिंदूर या कुमकुम का तिलक करें। उसी रंग के अक्षत चढ़ाएं।
(4): दीप, धूप दिखाकर पुष्प, माला अर्पित करें।
(5): भोग प्रसाद अर्पित करें। एक एक पान पत्ते पर रखकर लौंग, इलायची सुपारी अर्पित करें। दक्षिणा के रूप में एक एक सुपारी अलग से अर्पित करें।
5- कुलदेव से सिद्धि का आग्रह
अपने माथे के बीच में स्थित तीसरे नेत्र चक्र पर ध्यान लगाते हुए कहें हे मेरे कुलदेव (नाम मालूम है तो उनका नाम लें) आपको हमारा प्रणाम। हमारे मन मंदिर में विराजमान हों। भगवान शिव को साक्षी बनाकर हम
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कुलदेव प्रसीद प्रसीद सकल पुरुषार्थ देहि देहि श्रीं ह्रीं ऐं ॐ नमः
मन्त्र का जप करके आपकी साधना सम्पन्न कर रहे हैं। इसे स्वीकार करें। साकार करें। हमारे जीवन में जाग्रत हों। सदैव हमारे साथ रहें। हमें अपनी शरण में रखें। सुख , शांति, विजय, आरोग्य और राजसुख प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
6- मन्त्र से सिद्ध शक्ति का आग्रह
अपनी भौहों के बीच पर स्थित आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाकर कहें हे दिव्य मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कुलदेव प्रसीद प्रसीद सकल पुरुषार्थ देहि देहि श्रीं ह्रीं ऐं ॐ नमः
आपको नमन। आप बीज मंत्रों सहित हमारे तन, मन, मस्तिष्क, अभामंण्डल, ऊर्जा चक्रों, हृदय सहित सभी अंगों और रोम रोम में व्याप्त हो जाएं। हमारी भावनाओं से जुड़कर हमारे लिए सिद्ध हो जाएं। हमें कुलदेव सिद्धि वरदान करें।
आपका धन्यवाद!
7- अपनी शक्तियों में मन्त्र स्थापना करें
गले के बीच स्थित विशुद्धि चक्र पर ध्यान लगाते हुए कहें हमारे तन, मन, मस्तिष्क, अभामंण्डल, ऊर्जा चक्रों, हृदय सहित सभी अंगों और रोम रोम आपको नमन। आप सब
*ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कुलदेव प्रसीद प्रसीद सकल पुरुषार्थ देहि देहि श्रीं ह्रीं ऐं ॐ नमः*
के साथ जुड़ जाएं। इनके बीज मंत्रों को अपने अंदर स्थापित करें। मन्त्र की शक्तियों को ब्रह्मांड से ग्रहण करके अपने अंदर धारण करें। हमें कुलदेव सिद्धि हेतु सक्षम बनाएं।
आपका धन्यवाद!
मन्त्र जप
पंचोपचार पूजा और संकल्प के बाद
*ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कुलदेव प्रसीद प्रसीद सकल पुरुषार्थ देहि देहि श्रीं ह्रीं ऐं ॐ नमः*
मन्त्र का रुद्राक्ष माला से 108 वाली एक माला जप करें।
जप पूरा होने के बाद ॐ इन्द्राय नमः कहते हुए धरती पर मत्था टेकें और उठ जाएं।
ऐसा 3 दिन करें।
नारियल, सिक्के, सुपारी स्थापित रहने दें। उन पर पंचोपचार करके रोज साधना करें।
3 दिन की कुलदेव साधना पूरी होने के बाद क्या करना है इसे ध्यान से समझ लीजिये।
1- पान के पत्तों पर रखी सुपारी और सिक्कों को उठाकर साफ कपड़े में पोटली बना लें। उसे घर के खजाने/ लॉकर या पूजा घर में रख दें।2- नारियल सहित बाकी सारी सामग्री किसी नदी, नहर, झील, समुद्र में विसर्जित कर दें।
जहां नदी, नहर, झील, समुद्र नही है वहां के लोग सामग्री किसी पुराने बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।
उसके बाद उधर बार बार जाने की जरूरत नहीं।
3- रोज लगाया जाने वाला भोग प्रसाद परिवार जनों के साथ ग्रहण कर लें।
रोज भोग के साथ जो पान, इलायची, लौंग अर्पित करते हैं उसका भी प्रसाद के रूप में सेवन कर सकते हैं।
या फिर उसे अलग रखते जाएं। बाद में नारियल के साथ विसर्जित कर दें।
शिव शरणं।।
हेल्पलाइन- 9250500800