
युगों से अनेकों ऋषियों और साधकों ने अप्सराएं सिद्ध कीं। उन्हें धरती पर उतारा। उनके साथ रहे। उनकी शक्तियों/ क्षमताओं से न सिर्फ सुख सुविधाएं पायीं, बल्कि आध्यात्मिक सहयोग भी लिया। आज भी इसका ऋषि विधान सरल और अचूक माना जाता है।
यह साधना किसके लिये-
- जिन्हें धन, यौवन, समृद्धि, सुख की चाह है।
- जो सौंदर्य की देवी के साथ रहना चाहते हैं।
- जो राज सुख चाहते हैं।
- जो ऐश्वर्य पूर्ण जीवन चाहते हैं।
- इसे महिला पुरुष कोई भी कर सकता है।
- सिद्ध अप्सरा आजीवन साथ रहती हैं। साधक का तन, मन, धन से ध्यान रखती हैं। मित्र, पत्नी या प्रेमिका की तरह बिना शर्त प्रेम व अपनापन देती हैं।
- महिला साधक अप्सरा को दिव्य सहेली के रूप में सिद्ध करती हैं। अप्सरा उनकी अपनेपन के साथ सहेली, बहन की तरह केयर करती हैं। धन, यौवन की इच्छाएं पूरी करती हैं। उन्हें लोक परलोक की जानकारियां देती हैं। साधिका को खुश रहने में हर क्षण तत्पर रहती हैं।
एनर्जी गुरू श्री राकेश आचार्या जी
ने इस साधना के ऋषि विधान के साथ उर्जा विज्ञान का समायोजन किया है। जिससे साधाना न सिर्फ अधिक प्रभावशाली हो जाती है बल्कि सिद्धि की सम्भावनायें अनेकों गुना प्रबल हो जाती हैं। इस विधान से उर्जा कनेक्टिविटी सुनिश्चित होने पर अप्सरा सिद्धि खिंची चली आती है।
मनोवांछित परिणामों के लिये
साधना सक्षम गुरू के मार्गदर्शन में हीं करें।
साधना मंत्र के बीज मंत्र उर्जा चक्रों में स्थापित हों। साधक का आभामंडल इष्ट के आभामंडल से जुड़ा हो। आज्ञा चक्र मार्गदर्शक गुरू की उर्जा से कनेक्ट हो। तो सिद्धी दूर नही। उर्वसी के साथ उर्जा कनेक्टिविटी अनिवार्य होती है। उर्जा कनेक्ट होने के बाद ही जपे गए मंत्र या किया गया आवाहन अप्सरा तक पहुंचता है।
सक्षम गुरू अपनी उर्जा शक्तियों का उपयोग करके
साधक की उर्जाओं को अप्सरा के साथ सीधे कनेक्ट कर देते हैं। जो सिद्धि के लिये पर्याप्त होता है। किंतु यदि साधक के विचारों में भटकन हो तो गुरू द्वारा की गई उर्जा कनेक्टिविटी भंग हो जाती है। तब उर्जा उपकरण की जरूरत होती है। जो साधक और अप्सरा को लगातार जोड़ कर रखे।
ऋषियों और विद्वानों ने उर्जा उपकरण के रूप में
यंत्र, मणि, गुटिका, बूटी, रुद्राक्ष आदि को सिद्ध करने का विधान बनाया। जो युगों से प्रभावी है। सिद्ध करके इनके भीतर आभामंडल, उर्जा चक्र, उर्जा नाड़ी, कुंडलिनी, पंचतत्व, सूक्ष्म चेतना को प्रबल बनाने वाली उर्जायें स्थापित कर दी जाती हैं। उनकी प्रोग्रामिंग करके साधक और इष्ट के साथ जोड़ दिया जाता है। इस तरह उर्जा उपकरण के रूप में सिद्ध ये वस्तुवें न सिर्फ अप्सरा से जोड़कर रखती हैं बल्कि साधक के सूक्ष्म शरीर को सिद्धि हेतु सक्षम बनाये रखती हैं।
इन्हें आमतौर से गुरू या सक्षम आचार्य मंडल सिद्ध करते हैं। जिन्हें विधान अभ्यस्त है वह कोई भी कर सकता है। इसे दिये लिंक का उपयोग करके मृत्युंजय योग संस्थान से भी सम्पन्न करा सकते हैं।
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साधना के आयाम, नियम और उपकरण
साधना की ऊर्जा- सम्मोहक सफेद
साधना का चक्र- स्वाधिष्ठान चक्र
साधना का तत्व- जल तत्व
साधना के वस्त्र- सुंदर और सफेद। कपडों में गुलाब का इत्र जरूर लगाएं।
साधना की मुद्रा– सुखासन में बैठें
साधना का दीपक- घी का दीपक
साधना का आसन- लाल या पीला आसान
साधना का स्थान- एकांत कमरे में
साधना की दिशा- उत्तर मुख
साधना की माला- स्फटिक माला
साधना का दिन- शुक्रवार/ शुभ मुहूर्त में
साधना की कनेक्टिविटी- गुरू द्वारा या उर्वसी अप्सरा यज्ञ अनुष्ठान द्वारा या सिद्ध सामग्री द्वारा
साधना के देव- उर्वसी अप्सरा
देव का स्वभाव- भोलापन, प्रेम और सौंदर्य की देवी।
साधना का मन्त्र-
ॐ श्रीं उर्वसी अप्सराय आगच्छ आगच्छ स्वाहा
मन्त्र जप का समय- रात 10 बजे के बाद
मन्त्र जप की संख्या-11 माला प्रतिदिन, 8 दिन तक।
साधना का ऋषि विधान-
अप्सरा लोक के डाइमेंशन में गंधर्व कन्या उर्वसी अप्सरा के साथ ऊर्जा कनेक्टिविटी दिन में ही सम्पन्न कर लें।
ऐसा साधना के दिनों में रोज करना है।
इसके लिये उर्वसी अप्सरा यज्ञ, तर्पन, मार्जन सम्पन्न करना है।
यज्ञ में ॐ श्रीं उर्वसी अप्सराय आगच्छ आगच्छ स्वाहा
मन्त्र की 108 आहुतियां रोज देनी हैं। उसका दशांश तर्पन, मार्जन करें।
साधक इसे अपने गुरू या किसी विद्वान से करा सकते हैं। इसके लिये सिद्धि साधना सामग्री यंत्र, मणि, बूटी, गुटिका, रुद्राक्ष का भी उपयोग कर सकते हैं।
साधना से पहले इसका होना जरूरी है।
1- रात में उत्साह के साथ तैयारी करके आसन पर आराम से बैठ जाएं।
श्री गणेशाय नमः बोलकर
भगवान गणेश से निर्विघ्नता का आग्रह करें। कहें- हे विघ्न विनाशक गौरी नंदन मेरे मूलाधार चक्र में अपनी शक्तियां स्थापित करके मेरी साधना को निर्विघ्न करें।
आपका धन्यवाद!
2- पहले दिन एक थाली में गीली लाल कुमकुम से श्रीं लिखें।
उस पर एक मुट्ठी साबुत (टूटे न हों) चावल रखें।
थाली को अपने सामने उचित स्थान और उचित दूरी पर रखें।
श्रीं के ऊपर रखी चावल की ढेरी पर लाल गुलाब का फूल रख दें। उस पर सिद्ध सामग्री यंत्र, मणि, बूटी में से गुरू द्वारा बताई कोई एक चीज रख दें।
उससे उर्जा कनेक्टिविटी का मानसिक आग्रह करें।
कहें- आपको मेरे लिये सिद्ध किया गया है। मेरी भावनाओं के अनुरूप मुझे मेरे गुरूदेव के चरणों से जोड़कर रखते हुए मेरे आभामंडल को सिद्धि हेतु उर्वसी अप्सरा के आभामंडल के साथ जोड़ दें। निरंतर जोड़ कर रखें।
गुलाब का फूल रोज बदलें।
मगर थाली को उसकी जगह से न हटाएं।
(आठवें दिन की साधना पूरी होने के बाद या देवी के प्रकट होने के अगले दिन थाली हटाएं। चावल कहीं पक्षी भोजन में डाल दें। लिखे गए श्रीं को धोकर पानी किसी गमले में डाल दें।)
3- संजीवनी शक्ति का आवाहन-
सिद्धि के लिये संजीवनी शक्ति का आवाहन करें।
कहें- हे दिव्य संजीवनी शक्ति साधना सिद्धि के लिये मेरे तन, मन, मस्तिष्क, आभामण्डल, ऊर्जा चक्रों पर दैवीय ऊर्जाओं का शक्तिपात करें। उन्हें उर्जित करके जाग्रत करें।
मुझे उर्वसी अप्सरा सिद्धि हेतु सक्षम बनाएं। मुझे मेरे गुरुदेव के चरणों से जोड़कर रखते हुए मेरे आभामण्डल को उर्वसी अप्सरा के आभामण्डल के साथ जोड़ दें।
आपका धन्यवाद!
4- आचमन करें-
ॐ केशवाय नमः बोलकर दायीं हथेली पर चम्मच से जल डालें।
मेरे स्थूल शरीर से आलस्य और असंयम दूर हो। ऐसा बोलकर जल पी लें।
ॐ नारायणाय नमः बोलकर हथेली पर जल डालें।
मेरे सूक्ष्म शरीर से लोभ,मोह,क्रोध,भय,ईर्ष्या दूर हो। ऐसा बोलकर जल पी लें।
ॐ माधवाय नमः बोलकर हथेली पर जल डालें।
मेरे परा शरीर से अविवेक और अनास्था दूर हो। ऐसा बोलकर जल पी लें।
ॐ ऋषिकेशाय नमः बोलते हुए हथेली पर जल डालें।
मै पाप और दुखों से मुक्त रहूं। ऐसा बोलकर जल को धरती पर गिरा दें।
ॐ गोविन्दाय नमः बोलकर हथेली पर जल डालें।
मेरे तन, मन, मस्तिष्क से समस्त प्रकार की नकारात्मकता नष्ट हो। ऐसा बोलते हुए 3 बार जल को अपने ऊपर छिड़क लें।
5-मन्त्र से आग्रह-
मन्त्र से कहें- हे दिव्य मन्त्र
ॐ श्रीं उर्वसी अप्सराय आगच्छ आगच्छ स्वाहा
आप मेरी भावनाओं के साथ जुड़कर मेरे लिये सिद्ध हो जाएं। मुझे उर्वसी अप्सरा सिद्धी प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
6- सिद्धि के लिये देवी आग्रह-
उर्वसी अप्सरा से कहें- हे सौंदर्य की देवी उर्वसी अप्सरा आप मेरे समक्ष स्थापित गुलाब पुष्प में आकर विराजमान हो जाएं। मेरे द्वारा किये जा रहे मन्त्र जप को मेरे प्रेम निवेदन के रूप में स्वीकार करें, साकार करें। मेरे लिये सिद्ध होकर मुझे धन, यौवन, समृद्धि, राज, सुख, ऐश्वर्य प्रदान करें। सशरीर अपने सानिध्य का सुख प्रदान करें।
आपका धन्यवाद!
7- पुष्प, माला, सुगंध, भोग, प्रसाद, अर्पित करें
सामने स्थापित थाली में फूल, माला, गुलाब का इत्र अर्पित करें।
फिर दूध की मिठाई का भोग लगाएं। देवी से कहें- हे सौंदर्य की देवी भोग प्रसाद स्वीकारें, प्रसन्न हों।
8- भगवान शिव को साक्षी बनाएं .
कहें हे देवाधि देव महादेव आपको प्रणाम। आपको साक्षी बनाकर मै उर्वसी अप्सरा सिद्धि साधना सम्पन्न कर रहा हूँ। इसकी सफलता हेतु मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें। आपको धन्यवाद!
9- विधान सम्पादन और प्रबलता के लिये एनर्जी गुरू जी की उर्जाओं का आवाहन करें
दोनों भौहों के बीच आज्ञा चक्र पर धायन लगाते हुए कहें- एनर्जी गुरू राकेश आचार्या जी ऋषियों द्वारा निर्मित साधना सिद्धि विधान को उर्जा प्रखंड में सम्पादित करके अति प्रभावशाली बनाने के लिये आपका धन्यवाद। साधना सिद्धि के लिये आप अपनी सूक्ष्म चेतना और सकारात्मक उर्जाओं के द्वारा हमें निरंतर सहयोग करें।
10- मन्त्र जप आरम्भ करें-
अपने गुरुदेव का स्मरण करके मन्त्र जप आरम्भ करें।
जप के शुरुआती 10 मिनट तक सामने रखें चावल की ढेरी पर रखे गुलाब के पुष्प को एकटक देखें। उसके बाद धीरे से आंखें बंद कर लें और जप जारी रखें।
प्रतिदिन 11 माला जप सम्पन्न करें।
10 मिनट के ध्यान में देवी के साथ रहें
11 माला जप के बाद माला जप बन्द करके 10 मिनट का ध्यान करें। ध्यान के समय देवी उर्वसी के बारे में सोचें। ऐसे जैसे देवी आपके साथ हैं, आप उनके साथ हो।
उन्हें क्यों पाना चाहते हैं। किस रूप में पाना चाहते हैं। आने पर उनसे क्या पाना चाहेंगे। उनके साथ क्या करना चाहेंगे। क्या बातें करना चाहेंगे। इसी तरह की अन्य बातें ध्यान के समय लगातार सोचें।
साधना के समय कहीं दूर से आती घुंघुरुओं की आवाज, कदमों की आहट, चूड़ियों की खनक, महिला स्वर में फुसफुसाहट, हंसी, मनमोहक सुगंध, किसी सुंदरी की कोमल छुअन, आकर्षक स्त्री के पास बैठने का अहसास होने पर विचलित न हों। असमय बादलों की गड़गड़ाहट, बारिश, आंधी, तूफान हो तो भी घबरायें नही। देवी के सशरीर सामने आकर बैठने तक मंत्र जप जारी रखें।
आखिरी दिन गुलाब की 2 माला साथ रखें
साधना के समय आखिरी दिन पास में ताजे गुलाब के फूलों की 2 माला रखें।
जब देवी उर्वसी का आगमन हो तब एक माला उन्हें पहना दें। तब देवी द्वारा दूसरी माला साधक को पहना दी जाती है।
जब अप्सरा कामना पूछे तब उनका हाथ अपने हाथ में लेकर वचन लें। कहें- आप हमेशा मेरे साथ रहें। जब चाहूं तब मेरे सामने आ जाएं। जो चाहूं उसे पूरा करें। धन, यौवन, समृद्धि, सुख, ऐश्वर्य दें।
वचन के साथ देवी सिद्ध हो जाती हैं। आजीवन साथ रहती हैं। साधक का ध्यान रखती हैं। पत्नी या प्रेमिका की तरह बिना शर्त दिव्य प्रेम व अपनापन देती हैं।
महिला साधकों के साथ सुंदर सहेली की तरह रहती हैं। उन्नति में उन्हें हर तरह का सहयोग करती हैं।
11- साधना पूरी करके ऐसे उठें –
मन्त्र जप पूरा होने के बाद धरती पर थोड़ा जल गिराएं। फिर
ॐ इन्द्राय नमः बोलकर धरती माँ को प्रणाम करें। फिर उठ जाएं।
अप्सरा सिद्धि 2 तरह की होती है एक में अप्सरा साधक के सम्मुख आ जाती है।
दूसरी स्थिति में अप्सरा सामने नही आती। किंतु साधक को अप्सरा के आस पास होने का अहसास होता है। उसकी सुगंध मिलती है। घुंघुरू, चूड़ियों की आवाज सुनाई देती है। हंसी या फुसफुसाहट सुनाई देती है। अदृश्य छुअन, पास बैठने और चहलकदमी का अहसास होता है। ऐसे ही कई और अलौकिक अनुभूतियां होती हैं जिनसे संकेत मिलते हैं कि अप्सरा जीवन में आ चुकी हैं। तब साधक को अप्सरा से सहायता लेने की प्रक्रिया आरम्भ कर देनी होती है।
किसी भी जानकारी और सहयोग के लिये आप हमारी साधना हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं।
साधना हेल्पलाइन- 9999945010
शिव शरणं।