33 लाख रोम छिद्रों में मन्त्र स्थापना और राज सुख सिद्धि की ऊर्जा आहुतियां

33 लाख रोम छिद्रों में मन्त्र स्थापना और राज सुख सिद्धि की ऊर्जा आहुतियां

राजसुख प्राप्ति साधना मंत्र-

ऊँ क्लीं क्लीं नमः

यह बहुत जरूरी है कि यह मंत्र आपके 33 लाख से अधिक रोम छिद्रों में व्याप्त हो जाए। जब आप जाप करेंगे तो आपके रोम रोम से यह मंत्र निकलेगा। 

इस मंत्र को आपके अंदर शक्तिपात के द्वारा स्थापित होंगी और ऊर्जा आहुतियाँ भी संपन्न होंगी। 

शक्तिपात को ग्रहण करने हेतु मृत्युंजय ताली लगातार बजाए और

ॐ जुं स: मंत्र का जाप करे। 

श्री गणेशाय नमः:बोलें। 

भगवान शिव से कहें- हे मेरे गुरुदेव देवाधिदेव महादेव आपको मेरा नमन है। आपको साक्षी बनाकर मै शक्तिपात के द्वारा मेरे साथ ऑनलाइन जुड़े हुए सभी साधकों को राजसुख साधना में सक्षम बनाने हेतु विशेष शक्तिपात संपन्न कर रहा हूँ। मुझे इसकी अनुमति प्रदान करिए। दैवीय सहायता व सुरक्षा प्रदान करें। संजीवनी शक्ति प्रदान करें। देवी कृपा प्रदान करिए। आपका धन्यवाद है। 

ऊर्जाओं का आवाहन-

शक्तिपात को ग्रहण करने हेतु मृत्युंजय ताली बजाए और

ॐ जुं स: मंत्र का जाप करे। 

हाथों मे आई हुई संजीवनी शक्ति से बोलेंगे। 

मेरे हाथों मे आई हुई दिव्य देवी सिद्धि ऊर्जा राजसुख प्राप्ति मंत्र के बीज मंत्रों आप सबको मेरा नमन है। आपको मै ब्रह्मांड मे प्रक्षेपित कर रहा हूँ। वहाँ से अनंत गुना विस्तारित होकर मेरे साथ जुड़े हुए सभी साधकों, मेरे और मेरे परिवार के अन्य लोगों पास जाइए। उनपर शक्तिपात करिए। शक्तिपात के द्वारा इनके तन, मन, मस्तिष्क, आभामंडल में, ऊर्जा चक्र में व्याप्त दुःख देने वाली समस्त प्रकार की  नकारात्मक ऊर्जाओं का विखंडन करके उनका निष्कासन कर दीजिए। उनका पातालीकरण कर दीजिए। 

पूर्ण सफाई के बाद इन सब के आभामंडल, ऊर्जा चक्र, अवचेतन शक्ति में दैवीय ऊर्जाएँ स्थापित करके इनके जीवन में सुख सुनिश्चित करें। इसके साथ ही जब यह सब जब राजसुख प्राप्ति साधना संपन्न करें तब इनके रोम-रोम से 33 लाख से अधिक रोम छिद्रों से ऊँ क्लीं क्लीं नमः मंत्र का जाप उच्चारित हो और अखिल अंतरिक्ष ब्रमांड में फैल जाए। वहाँ से सिद्ध दैवीय ऊर्जाओं को ग्रहण करें। इस हेतु शक्तिपात के द्वारा इस मंत्र के बीज मंत्रों को इनके 33 लाख से अधिक रोम छिद्रों में स्थापित कर दीजिए। इन सब को अलग अलग अभेद सुरक्षा कवच प्रदान करिए। जिसमे प्रेम और प्रकाश के आने जाने का उचित मार्ग प्रदान करिए। ऊर्जित करें, उपचारित करें। स्वस्थ करें, सर्वोत्तम करें। उनका पुनर्जनन करें। इन सुरक्षा कवचों में ये सभी लोग तन,मन, धन से स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित रहे। शिव कृपा से परिपूर्ण रहे। देवी कृपा से परिपूर्ण रहें। मेरे अनुकूल रहे, आनंदित रहे। तथास्तु!

ऊर्जाओं को ब्रह्मांड मे सिर के पीछे से  {बॉल की तरह} उछाल दीजिए। 

ऊर्जाओं को रिसीव करने के लिए लगातार मृत्युंजय ताली बजाते हुए ऊँ जुं स: मंत्र का जाप करें। 

ऊर्जा यज्ञ

सबसे पहले श्री गणेशाय नमः बोलें। 

भगवान शिव हमारे गुरु है। उनसे अनुमति ले। 

भगवान शिव से कहेंगे- 

हे मेरे गुरुदेव देवाधिदेव महादेव आपको साक्षी बनाकर मैं ऊर्जा यज्ञ संपन्न कर रहा हूँ। इसकी सफलता हेतु मुझे अनुमति प्रदान करिए, दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करिए, यज्ञ सामग्री की सर्वश्रेष्ठ ऊर्जाएँ प्रदान करिए। आपका धन्यवाद है। 

धरती माता से कहे- 

हे धरती माता आपको मेरा प्रणाम है। मैं अपने गुरुदेव भगवान शिव को साक्षी बनाकर ऊर्जा यज्ञ संपन्न कर रहा हूँ। इसकी सफलता हेतु आप मेरे समक्ष पृथ्वी तत्व का यज्ञ कुंड स्थापित कर दीजिए। जिसकी आकृति श्री यंत्र की हो। आपका धन्यवाद है। 

अग्नि देवता से कहिए-

हे अग्नि देवता मैं अपने गुरु भगवान शिव को साक्षी बनाकर ऊर्जा यज्ञ संपन्न कर रहा हूँ उसकी सफलता हेतु मेरे समक्ष स्थापित श्री यंत्र की आकृति वाले पृथ्वी तत्व के यज्ञ कुंड में यज्ञ अग्नि प्रज्ज्वलित कर दीजिए। आपका धन्यवाद है। यज्ञ अग्नि प्रज्जवलित होते ही यज्ञ देवता प्रकट हो जाते हैं। 

यज्ञ देवता से कहेंगे-  

हे यज्ञ देवता आपको मेरा प्रणाम है। मेरे द्वारा दी जाने वाली ऊर्जा आहुतियों को स्वीकार करें, साकार करें। यज्ञ अंश को सभी देवताओं तक पहुंचाएं और उनके आशीर्वाद को हम तक पहुंचाएं। आपका धन्यवाद है। 

अब ऊर्जा आहुतियाँ देना शुरू करेंगे- 

भगवान शिव से आपने यज्ञ सामग्री की ऊर्जाओं की जो मांग की है वह आपके नाभि चक्र के आस पास 6 इंच तक उपस्थित कर दी गई है। इनको पकड़ना है। जैसे आपके सामने किसी पात्र में यज्ञ सामग्री रखी होती है उसको आप पकड़कर  उठाते हैं और स्वाहा के साथ में उसको यज्ञ कुंड में अर्पित करते हैं उसी तरह से आप करेंगे। यज्ञ सामग्री को आप नाभि के पास से पकड़ेंगे और स्वाहा के साथ में सामने पृथ्वी तत्व के अग्निकुंड में अर्पित करेंगे। 

आरंभ करते हैं-

ऊँ श्री गणेशाय नमःस्वाहा,  ऊँ भू: नमः स्वाहा,  ऊँ भुव: नमः स्वाहा,  ऊँ सह नमः स्वाहा,  ऊँ सघा: नमः स्वाहा,  ऊँ अग्नेय नमः स्वाहा,  ऊँ प्रजापत्ये नमः स्वाहा,  ऊँ पंचवान्ये नमः स्वाहा,  ऊँ इंद्राय नमः स्वाहा,  ऊँ ब्रहमणे नमः स्वाहा

नवग्रह की आहुतियाँ

ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः स्वाहा,  ऊँ सोम सोमाय नमः स्वाहा,  ऊँ ह्रौं श्री मंगलाय नमः स्वाहा,  ऊँ बु: बुद्धाय नमः स्वाहा, ऊँ ब्र:ब्रहस्पत्ये नमः स्वाहा,  ऊँ शु:शुक्राय नमः स्वाहा,  ऊँ शं शनिश्चराय नमः स्वाहा,  ऊँ भ्राम भ्री भ्रौ स:राह्वे नमः स्वाहा,  ऊँ केम् केतवे नमः स्वाहा,  ऊँ ब्रहमा मुरारि तिरूप्रांतकारि भानु शशि शसु बुद्धम् गुरू शुक्राय शनि राहुवाय केतुआय सर्वे गृह शांति करा: भवंतु स्वाहा। 

पंचतत्त्व की आहुतियाँ

ऊँ पृ्थ्वी तत्वाय नमः स्वाहा,  ऊँ जल तत्वाय नमः स्वाहा, ऊँ अग्नि तत्वाय नमः स्वाहा,  ऊँ वायु तत्वाय नमः स्वाहा, ऊँ आकाश तत्वाय नमः स्वाहा,  ऊँ चंद्र तत्वाय नमः स्वाहा, ऊँ सूर्य तत्वाय नमः स्वाहा, ऊँ शिव तत्वाय नमः स्वाहा, ऊँ आत्म तत्वाय नमः स्वाहा, 

अपने माथे के बीच त्रिनेत्र में ध्यान लगाइए और बोलिए

ऊँ देवी तत्वाय नमः स्वाहा,

सिर के ऊपर ध्यान लगाइए और बोलिए

ऊँ सौभाग्य तत्वाय नमः स्वाहा। 

ऊँ भुर्व भुवस्व:तत्स वितुर्वर्नेन्य भर्गो देवस्य धीमहि धियो योन:प्रचोदयात स्वाहा,  ऊँ भुर्व भुवस्व:तत्स वितुर्वर्नेन्य भर्गो देवस्य धीमहि धियो योन:प्रचोदयात स्वाहा,  ऊँ भुर्व भुवस्व:तत्स वितुर्वर्नेन्य भर्गो देवस्य धीमहि धियो योन:प्रचोदयात स्वाहा।

त्रिदेवी की आहुतियाँ

श्री सरस्वती देब्ये नमः स्वाहा,  श्री लक्ष्मी देब्ये नमः स्वाहा, श्री दुर्गा देब्ये नमः स्वाहा, श्री गंगा देब्ये नमः स्वाहा, आयुर्देही, विधादेहि, धनमदेहि महेश्वरी समस्तलखम् देवी देहम् देवी परमेश्वरी स्वाहा। 

राजसुख के मंत्र की ऊर्जाओं की स्थापना के लिए माथे के बीचोबीच त्रिनेत्र में ध्यान लगाइए

ऊँ क्लीं क्लीं नमः स्वाहा

इस मंत्र की 11 bar आहुति दें। 

आयुर्देही, विधादेहि, धनमदेहि महेश्वरी समस्तलखम् देवी देहम् देवी परमेश्वरी स्वाहा। 

त्रिदेवों की आहुतियाँ 

ऊँ नमो भगवते ब्रहमदेवाय स्वाहा, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय  स्वाहा, ऊँ नमो भगवते रुद्र देवाय  स्वाहा। 

मनोकामना पूर्ति की आहुतियाँ 

(उत्तम स्वास्थ्य और मान-सम्मान प्रतिष्ठा के लिए) 

ऊँ ह्रौं जुं स:माम पालय पालय-पालय स:जुं ह्रौं ऊँ स्वाहा। 

ऊँ ह्रौं जुं स:माम पालय पालय-पालय स:जुं ह्रौं ऊँ स्वाहा। 

ऊँ ह्रौं जुं स:माम पालय पालय-पालय स:जुं ह्रौं ऊँ स्वाहा। 

धन-समृद्धि प्राप्ति की आहुतियाँ

ऊँ शं शंकराय धनम् देहि देहि ऊँ स्वाहा, ऊँ शं शंकराय धनम् देहि-देहि ऊँ स्वाहा, ऊँ शं शंकराय धनम् देहि-देहि ऊँ स्वाहा। ऊँ शं शंकराय धनम् देहि-देहि ऊँ स्वाहा, 

ऊँ इष्टदेवाय नमः स्वाहा, ऊँ कुलदेवाय नमः स्वाहा, ऊँ वास्तु देवाय नमः स्वाहा, ऊँ स्थान देवाय नमः स्वाहा, ऊँ ग्राम्य देवाय नमः स्वाहा, ऊँ क्षेत्रपालकाय नमः स्वाहा, ऊँ पित्रदेवाय नमः स्वाहा,  ऊँ मात्र प्रेक्षण कमलेभ्ये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे देवभ्ये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे देवभ्ये नमः स्वाहा, ऊँ पूर्ण आहुति नमः स्वाहा। 

तर्पण के लिए गाय, कुत्ता, चीटी, कौआ को रोटी या बिस्कुट खिलाए  और एक गरीब भूखे को भोजन या दान दें इसका परिणाम आपके जीवन में दिखाई देगा। 

ऊँ पित्रदेवाय नमः स्वाहा,  ऊँ पित्रदेवाय नमः स्वाहा, ऊँ पित्रदेवाय नमः स्वाहा

ऊँ गंगा देवये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे नदिभ्ये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे सागरभ्ए नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे परवर्ताये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे औषधाये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे वनस्पत्ये नमः स्वाहा, 

ऊँ सर्वे देवभ्ये नमः स्वाहा, ऊँ सर्वे देवभ्ये नमः स्वाहा, ऊँ पूर्ण आहुति नमः स्वाहा। 

हाथ जोड़े और बोलें 

पूर्ण करें प्रभु, पूर्ण करें प्रभु, पूर्ण करें प्रभु। तथास्तु!

ऊर्जा यज्ञ पूर्ण होने के बाद बोलें-

अग्नि विसर्जन के लिए – 

हे अग्नि देवता ऊर्जा यज्ञ संपन्न हुआ। आप यज्ञ अग्नि को अपने अंदर समाहित कर लीजिए और उससे सृष्टि का निर्माण कीजिए। आपका धन्यवाद है। 

धरती मां से बोले

हे धरती मां ऊर्जा यज्ञ संपन्न हुआ। आप पृथ्वी तत्व के यज्ञ कुंड को अपने अंदर समाहित कर लीजिए और उससे सृष्टि का निर्माण कीजिए। आपका धन्यवाद है।

ऊर्जा यज्ञ का ज्ञान देने के लिए अपने भगवान शिव जी से बोले

हे मेरे गुरुदेव देवाधिदेव महादेव मुझे उर्जा यज्ञ का ज्ञान देने के लिए सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए सदा सर्वदा शिव ज्ञान देने के लिए और शिव सुख, सुरक्षा और सिद्धि देने के लिए आपका धन्यवाद है। 

 गुरु दक्षिणा के रूप में आपको राम राम सुना रहे हैं आप सुने प्रसन्न हो। मुझे व मेरे परिवार जनो को दैवीय सहायता व सुरक्षा प्रदान कीजिए। मेरी आने वाली पीढी को उत्तरोत्तर उन्नति, प्रोन्नति प्रदान करें। सुनिश्चितता प्रदान करें। मेरे पितरों को मोक्ष प्रदान करें। शिव ज्ञान प्रदान करें। आपका धन्यवाद है। 

(10 मिनट तक राम राम सुनाइए। या और ज्यादा देर तक सुना सकते हैं।) 

राम नाम जाप श्री शिव अर्पणम् अस्तु! 

आपका जीवन सुखी हो यही हमारी कामना है। 

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