Life with Corona: सेहत भी समृद्धि भी

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कोरोना की आवा जाही के बीच अब समृद्धि बचाना जरूरी

[अब व्यक्तिगत समृद्धि पर ध्यान केंद्रित करना होगा। आर्थिक संकट देर तक परेशान करेंगा। जो सुविधा भोगी जीवन जी रहे थे उनमें से अनगिनत की नैकरियां जाने वाली हैं। किश्तों पर ली गाड़ियों, फ्लैटों की नीलामी का निराशजनक दौर आएगा। सरकारी सहायता न मिली तो तमाम बच्चों की पढ़ाई ब्रेक होने का खतरा है। कम खर्च में जीना न सीखे तो अशंख्य लोग डिप्रेशन और आत्महत्या की सोच के शिकार होंगे। लोन पर कारोबार कर रहे तमाम लोग असहाय स्थिति में पहुंचने वाले हैं। तमाम काम धंधे बंद होंगे। फर्जी नौकरियों के नाम पर अनगिनत लोग ठगे जाएंगे। एेसे में सेहत के साथ समृद्धि की तकनीकी को अविलम्ब अपनाना होगा।]

सभी अपनों को राम राम।
आखिरकार डाक्टरों ने मान लिया कि कोरोना का इलाज घर में रहकर भी सम्भव है। हम इसे शुरूआत से कहते आये हैं। दिल्ली मुम्बई सहित देश भर में डाक्टर अब सर्दी खांसी के संक्रमण की तरह हर दिन हजारों कोरोना मरीजों का इलाज घर से ही करके उन्हें ठीक कर रहे हैं। दिल्ली सरकार तो विज्ञापन के जरिये घर में रहकर इलाज करने को कह रही है। मेरे विचार से अब कोरोना प्रभावितों की गिनती बंद करके उससे ठीक होने वालों की गिनती जारी की जानी चाहिये। चीन में दोनो तरह की गिनतियां रोक दी गई हैं। जिससे वहां के लोगों में कोरोना भय नियंत्रित हुआ है, लोग घर में गर्म पानी, काढ़ा (सूप) पीकर और स्ॊ्रीम लेकर ठीक हो रहे हैं।
कम्युनिटी फैलाव होने के बाद डाक्टर कह रहे हैं कोरोना की मारकता कम हो गई है। अब इससे ज्यादा खतरा नही।
हम शुरुआत से ही कहते आये हैं कि कोरोना वायरल फीवर से भी कमजोर वायरस है। यह सिर्फ तभी जान लेने में सक्षम है जब इसका इलाज सर्दी खांसी के पारम्परिक इलाज से अलग हटकर किया जाये। सर्दी खांसी के इलाज में सबसे पहले रोगी को ठंडे पानी, ठंडी चीजों और ठंढे माहौल से बचाया जाता है। ए.सी., कूलर के सम्पर्क से अलग किया जाता है। अन्यथा उसके निमोनिया में तब्दील होने का खतरा रहता है। जान फेफड़ों में उपजा निमोनिया ही लेता है चाहे साधारण सर्दी जुकाम से हो या कोरोना से। अस्पलातालों में ए.सी. के बिना कामकाज सम्भव नही। एेसे में सर्दी खांसी के निमोनिया तक पहुंचने का खतरा बना रहता है।
दुनिया भर में कोरोना के नाम पर गिनी गई मौतों का यही प्रमुख कारण है।
कोरोना सर्दी खांसी की तरह आता जाता रहेगा। दिन में तीन चार बार चाय की तरह गर्म पानी पिये। हल्दी वाला पानी या दूध लें। घर में बना काढ़ा पियें। गरारे करें। स्ट्रीम लें। अपनी इम्युनिटी को स्ट्रांग रखें। कोरोना की छुआछूत से बचें। जरूरत हो तो अपने डाक्टर से बात करके सर्दी के संक्रमण को खत्म करने वाली दवा ले लें। बस इतना ही काफी है कोरोना के लिये।
अब अनियंत्रित समस्या आने वाली है आर्थिक संकट की।
जिन्होंने अपनी सूक्ष्म शक्तियों की तरफ ध्यान न दिया उनके दिन बहुत खराब गुजरेंगे। सूक्ष्म शक्तियां मतलब आपका आभामंडल और उर्जा चक्र। एक उदाहरण के साथ आगे बढ़ना तर्क संगत होगा। मान लीजिये एक कम्पनी है। जिसमें 500 लोग काम करते हैं। उनमें से काम की कमी बताकर 300 लोगों की छटनी होती है। अब सवाल ये है कि एक जैसी क्षमता से एक जैसा काम करने वालों में से यही 300 लोग छटनी का शिकार क्यों हुए। क्योंकि इनकी एनर्जी कमजोर थी। क्योंकि इनका आभामंडल और उर्जा चक्र एेसी स्थिति के लिये तैयार नही थे। उनमें एनर्जी की कमी थी।
कारण कोई भी हो। एनर्जी खराब होने पर व्यक्ति अलग थलग पड़ ही जाता है।
अपने आभामंडल की नियमित सफाई रखें। जिस तरह रोज स्नान करके स्थुल शरीर को साफ करना जरूरी होता है उसी तरह सूक्ष्म शरीर की सफाई भी जरूरी होती है। इसके लिये नमक के पानी से स्नान करें। किसी बर्तन में तकरीबन एक लीटर पानी लें। उसमें दो चम्मच नमक मिलायें। पहले उससे नहायें। फिर जैसे रोज नहाते हैं वैसे नहा लें। नमक में आभामंडल की नकारात्मक उर्जाओं को छिन्न भिन्न करने की प्राकृतिक क्षमता होती है। पानी छिन्न भिन्न हुई नकारात्मक उर्जा को बहाकर डिस्पोजल युनिट नाली या सीवर में ले जाकर आभामंडल से अलग कर देता है।
इम्युनिटी और समृद्धि के लिये मूलाधार चक्र को नियमित उपचारित करें। इसके बिगड़ने पर जीवन शक्ति घटती है, बीमारी, बेकारी और गरीबी का खतरा रहता है। यह कर्मयोग, आत्मबल, साहस और समृद्धि का केंद्र है। इसे ठीक रखा जाये तो जीवन में कभी भी गरीबी व्याप्त नही होती। मूलाधार चक्र को मंत्र संजीवनी विद्या के द्वारा तेजी से ठीक किया जा सकता है।
किंतु इसे उपचारित करने का कोई तरीका ज्ञात न हो तो त्राटक का सहारा लें। इसके लिये सुर्योदय का समय सर्वोत्तम है। लाल गुड़हल का एक फूल लें। उसे सुविधाजनक स्थिति में सामने रखें। फूल के मध्य बिंदु को 20 मिनट अपलक देखें। उसके बाद नंगे पैर कम से कम 5 किलोमीटर तेज गति से टहलें। पैरों के तलवों में मूलाधार चक्र के उप चक्र होते हैं। धरती की लाल उर्जा मूलाधार चक्र को पोषित करती है। नंगे पैर चलने से उपचक्र धऱती की एनर्जी लेकर मूलाधार चक्र को देते हैं। उससे पोषित मूलाधार चक्र कर्म क्षमता को मजबूत करता है। जिससे बेकारी और गरीबी की स्थितियां खत्म होती हैं। इसी कारण नंगे पैर मंदिरों के दर्शन हेतु जाने और कावड़ सहित कई तरह की धार्मिक यात्रायें करने का प्रचलन है।
समृद्धि बनी रहे इसके लिये गुस्से और आलोचना से बचें। इनसे मणिपुर चक्र गंदा होकर तेजी से बिगड़ा है। बिगड़ा मणिपुर चक्र सफलताओं में व्यवधान डालता है। एेसे में काम होते होते रह जाने की शिकायत सामने आती है। कुछ लोग पूरी जिंदगी इस समस्या से पीछा नही छुड़ा पाते। क्योंकि उनके जीवन में गुस्से और आलोचनाों (खासतौर से अपनी असफलता के लिये दूसरों को जिम्मेदार बताने) का सिलसिला चलता रहता है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ नही। एेसेा कुछ हो तो इसे मंत्र संजीवनी से उपचारित करें। या पीले फूव पर दोपहर के समय 10 मिनट त्राटक करें।
सही समय पर सही फैसला लिया जाये तो न सफलतायें रुकती हैं न समृद्धि दूर जाती है। इसके लिये आज्ञा चक्र को उपचारित करना अनिवार्य है। कोरोना काल ने लोगों के दिमाग में तमाम तरह की भ्रांतियां और अस्थिरता पैदा कर दी हैं। जिससे आज्ञा चक्र छतिग्रस्त होता है। बिगड़ा आज्ञा चक्र कन्फ्यूजन पैदा करता है। निर्णय लेने की क्षमता खत्म कर देता है। मंत्र संजीवनी विद्या से इस चक्र का सटीक उपचार किया जा सकता है। जिन्हें कोई विधा नही ज्ञात वे नीले फूल पर 10 मिनट त्राटक करके इसे उपचारित कर सकते हैं।
हमें विश्वास है कि आप सब अपने सूक्ष्म शरीर को उपचारित करके सेहत और समृद्धि से परिपूर्ण रहेंगे।
शिव शरणं।।