राक्षसों के देश में कोरोना का नुस्खा…

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राक्षसों के देश में कोरोना का नुस्खा…
लॉक डॉउन का विकल्प तलाशना होगा

सभी अपनों को राम राम
[ राक्षसों की तरह जीव जंतुओं को खा जाने वाले देश चीन के कुछ असरदार लोगों ने कोरोना के अदृश्य राक्षस को फैलाया। चीन के वुहान सहित कुछ शहरों को मौत के जीवंत शोकेश की तरह पेश किया। कुछ लोगों को मरने दिया। जबकि उनके पास कोरोना का नुस्खा तैयार है। जिसे वे रहस्य के पर्दे में छिपाए हैं। इस पर हमने पिछले अंक में चर्चा की । वे ऐसा क्यों कर रहे? यह यहां समझने की कोशिश करेंगे। ]
कोरोना उन तमाम बीमारियों के समूह में से एक है जो नाक बहने से शुरू होकर सर्दी, खांसी, जुकाम, इन्फ्लुएंजा, फ्लू आदि की तरह होती हैं। जिनमें नजला जुकाम, नाक बहने, गले में दिक्कत, खासी, बुखार, बदन दर्द, बेचैनी, सांस लेने में दिक्कत आदि के लक्षण सामने आते हैं। इन बीमारियों के विषाणु एक से दूसरे में तेजी से फैलते हैं।
इनमें से कुछ बीमारियां निमोनिया की सी स्थिति तक पहुंचकर जानलेवा हो जाती हैं।
ऐसा हर साल होता है। लोग छोटे बड़े डॉक्टरों के पास जाते हैं। कुछ सावधानियां, कुछ परहेज बरते जाते हैं। ज्यादातर ठीक हो जाते हैं। जिनका रोग प्रतिरोधक तंत्र इम्यून सिस्टम कमजोर होता है वही संक्रमण वाली इन बीमारियों के आसान शिकार होते हैं। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा कमजोर होती है, वे मृत्यु तक पहुंच जाते हैं।
हर देश में हर साल इन बीमारियों से हजारों लोग मरते हैं। कोरोना भी इन्हीं में एक है। हर देश में हर साल मरने वाले हजारों बीमारों में से कुछ लोग कोरोना से भी मरते रहे हैं।
इस समय भी जिस देश में जितने लोग मर रहे हैं उनका औसत लगभग वही है जो हर साल संक्रमण की उपरोक्त बीमारियों से मरने का होता हैं। साल के अंत में लोग पाएंगे कि सभी देशों में संक्रमण से तकरीबन उतनी ही मौतें हुईं जितनी हर साल होती हैं। सिर्फ कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या में कोई खास बढ़ोत्तरी नही मिलेगी। वो अलग बात है कि इस बार आइडेंटिफाई हो जाने के कारण उन्हें कोरोना मौत का नाम दे दिया जाए।
अब तक कोरोना का ऐसा आइडेंटिफिकेशन नही हुआ था। इसलिये उससे होने वाली मौतों को क्लासिफाइड करके चिन्हित नही किया जाता था। अब भविष्य में हर साल उन्हें भी चिन्हित किया जाएगा।
तो इस साल का कोरोना इतना खास क्यों हो गया?  क्योंकि चीन के वैज्ञानिकों ने इस रोग के विषाणुओं की जांच के लिये एक नई किट ईजाद कर ली। जिसमें कोरोना वायरस की डिटेल जानकारी मिल जाती है। इस अधिक जानकारी को प्रचारित करके ही नाक बहने वाले समूह की इस बीमारी को covid 19 का नाम दिया गया।
अब सवाल है कि इस साल ही कोरोना के इतने ज्यादा रोगी दुनिया भर में कैसे पैदा हो गए? पहले तो ऐसा नही था!
पहले भी ऐसा था। नाक बहने वाली बीमारियाँ हमेशा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती रही है। मगर तब उनकी गिनती नही होती थी। सर्दी जुकाम मानकर उन्हें भुला दिया जाता था। कोरोनो को इस तरह  डिफाइन करने वाली मेडिकल किट नही थी। इसलिये इस तरह की जांच नही होती थी। उसके बीमारों की गिनती का पता नही चलता था।
व्यक्ति चाहे जिस देश का हो, अमीर हो या गरीब, नेता हो अधिकारी, राजा हो या प्रजा। नाक बहने वाली बीमारी के संपर्क में आया तो संक्रमित हुए बिना नही रह सकता। अगर उसका रोग प्रतिरोधी सिस्टम कमजोर हुआ तो संक्रमण बिस्तर तक पहुंचा ही देता है। फिर बिस्तर घर का हो या वेंटीलेटर।
संक्रमण में नाक बहने वाली इन बीमारियों का एक समूह है। जिनके लक्षण मिलते जुलते होते हैं। फ्लू इन्फ्लुएंजा, डेंगू, मलेरिया की तरह जब चिकित्सा विज्ञानी उनमें से किसी तरह के विषाणुओं का पता लगा लेते हैं तो उसे एक नाम देते हैं। उस साल सारी दुनिया उस नाम की बीमारी से भयभीत हो जाती है।
उसके बाद वह बीमारी हर साल फैलने वाली मौसमी बीमारी बन जाती है। कोरोना के साथ भी ऐसा ही होगा। आने वाले समय में वह मौसमी बीमारी की तरह आता जाता रहेगा। तब यह इतने भय का विषय नही रहेगा। लोग सर्दी, जुकाम, फ्लू इन्फ्लुएंजा, डेंगू, मलेरिया की तरह इसकी दवा खाएंगे। 4 से 5 दिन में ठीक होकर अपने काम पर लग जाया करेंगे।
अब सवाल है उस दवा के बनने का। कब बनेगी इसकी दवा। इसका जवाब चीन के उन असरदार लोगों के पास सुरक्षित है, जिन्होंने चीन में कोरोना का शोरूम सजाया।
राक्षस गुरु शुक्राचार्य की तरह चीन में अध्यात्म की कुछ अति सक्षम हस्तियां मौजूद हैं। वहां कोरोना का नुस्खा तैयार हो चुका है। वहां के वे असरदार लोग उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब कोरोना से भयभीत दुनिया उनके सामने हाथ फैलाये।
अभी तो वहां के वे असरदार लोग दुनिया भर को कोरोना टेस्ट की किट, वेंटीलेटर व अन्य मेडिकल सामान बेचकर कमा रहे हैं। वहां के असरदार लोग दुनिया भर में गिरावट का शिकार हुए नामी गिरामी शेयरों को खरीद रहे हैं।
नागरिकों की जान का खतरा देखकर सभी देश घबराहट में हैं। अभी तक लॉकडॉउन का विकल्प ही उनके सामने आ पाया है।
लेकिन इससे सभी देश पंगु हो गए हैं। उनकी अर्थव्यवस्था छिन्नभिन्न हो रही है। ऐसे में चीन सबसे महत्वपूर्ण देश बनने की तरफ बढ़ता दिख रहा है।
कोरोना के नुस्खे के बदले चीन का दूसरे देशों पर अघोषित दबाव बन रहा है। चीन की पहली शर्त होगी कि दूसरे देश कोरोना के लिये चीन को जिम्मेदार ठहराना बन्द करें।
इस बीच चीन के डॉक्टरों की टीमें मदद के लिये उन छोटे देशों में जाना शुरू करेंगी जो उसकी संप्रभुता स्वीकार कर लेंगे। उन देशों को चीन एक बार फिर अपने शोरूम की तरह इस्तेमाल करेगा। वहां उसके डॉक्टर चीन में तैयार नुस्खे का उपयोग करके बीमारों को ठीक करेंगे। इस तरह चीन दुनिया को दिखायेगा कि कोरोना का इलाज उसके पास है।
तब कोरोना हाहाकार और लॉक डॉउन में उलझे तमाम देश चीन की शर्तें स्वीकारने की तरफ बढ़ेंगे। खासतौर से प्रजातांत्रिक देश। क्योंकि वहां का विपक्ष और मीडिया का एक वर्ग जनता की दुहाई देकर सरकारों पर दबाव बनाएंगे।
कोरोना नुस्खा के बदले चीन किस देश से क्या चाहेगा? अभी कुछ कहा नही जा सकता।
तो क्या कोरोना से डरने की जरूरत नही?
इससे डर कर सावधानी बरतें यहां तक ठीक है। मगर घबराकर पंगु हो जाएं, यह बिल्कुल उचित नही है। सभी देशों को कोरोना स्थितियों पर पुनर्विचार करना चाहिये। जरूरत के मुताबिक कोरोना युद्ध की नीतियों को बदल लेना चाहिये। चीन चाहता है कि अधिक से अधिक दुनिया लॉक डॉउन में जाये। परिस्थियां देशों को इसके लिये मजबूर करती नजर आ रही हैं। अधिकांश जगहों पर लोग सोसल डिस्टनसिंग से परिचित हो चुके हैं। उसे स्वतः स्वीकार करने लगे हैं।
सरकारों को अब लॉक डॉउन के विकल्प की तरफ बढ़ना चाहिये। जो देश चीन के दबाव के सामने झुकना नही चाहते वे कोरोना उपचार के साथ ही लॉक डॉउन के विकल्प तलाशने में जुट जाएं।

सामान्य लोग क्या करें?
अपने इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग करते रहें।
ऊर्जाओं में प्रदूषण बीमारियों को आमंत्रित करता है। नमक के पानी से स्नान करके अपनी ऊर्जाओं को साफ करते रहें। नमक आभामंडल की नकारात्मक ऊर्जाओं का विखंडन करता है, पानी उन्हें अपने साथ बहाकर डिस्पोजल यूनिट सीवर में पहुंचा देता है।
अकारण के गुस्सा, तनाव से बचें। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
हंसते, मुस्कराते रहें। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
ध्यान, योग, एक्सरसाइज करके ब्रह्मांड से सकारात्मक ऊर्जाएं ग्रहण करते रहें। इससे रोग निवारक क्षमता बढ़ती है।
संतुलित, सुपाच्य भोजन करें।
लोगों से मिलने के समय, छींकते, खांसते समय उनके मुंह के सामने बिल्कुल न रहें।
किसी भी व्यक्ति के द्वारा छुवी वस्तु छूने पर अपने हाथों को चेहरे, नाक, मुंह पर बिल्कुल न लगाएं। उन्हें जितनी जल्दी हो सके अच्छे से धो लें।
सर्दी जुकाम खांसी बलगम आदि की अनदेखी न करें। डॉ के परामर्श से दवा लें। गले में दिक्कत हो तो गरारा जरूर करें। स्ट्रीम लें।
गरम पानी, चाय, काफी, सूप आदि कोई गर्म पेय दिन में कई बार पीते रहें। इससे यदि किसी कारण कोरोना वायरस मुंह के भीतर गले तक पहुंच चुके हैं तो वे निष्क्रिय हो जाएंगे। वे 26 डिग्री या उससे अधिक के तापमान में खत्म हो जाते हैं।
यदि गलती से कोई संकित वस्तु छू ली है और हाथ मुंह में लगा लिया है। मगर पीने के लिये कोई गर्म चीज उपलब्ध नही है तो ज्यादा मात्रा में साधा पानी पी लें। उससे कोरोना वायरस पानी के साथ पेट में चला जायेगा। वहां जठराग्नि व एसिड के संपर्क में आते ही खत्म हो जाएगा।
यदि किसी को कोरोना हो गया है तो डॉक्टरों का इलाज लेते रहें । दिन में हर घण्टे पर गर्म पानी, गर्म दूध, चाय, काफी में से किसी चीज का सेवन करें। हर 3 घण्टे पर स्ट्रीम लें। हर 3 घण्टे में गरारा करते रहें। इससे गले में मौजूद कोरोना वायरस मर जायेगा। 4 से 5 दिन ऐसा करें तो शरीर से कोरोना बीमारी खत्म होने की पुष्टि की संभावना है।
नाक को बहने न दें। उसके लिये नॉजल स्प्रे आदि का प्रयोग कर सकते हैं।
ठंडी चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
आपातकाल में शासन प्रशासन और जरूरतमंदों की मदद करते रहें।
सबका जीवन सुरक्षित हो
यही हमारी कामना है।

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